केरल में Nipah Virus का नया खतरा, संपर्क में आए 77 लोग, जानें यह कैसे फैलता है
punjabkesari.in Friday, Jun 12, 2026 - 05:25 PM (IST)
नारी डेस्क: केरल में निपाह वायरस संक्रमण का नया मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। कोझिकोड जिले के 45 वर्षीय व्यक्ति में निपाह वायरस की पुष्टि हुई है, जिसके बाद उसके संपर्क में आए लोगों की पहचान और निगरानी शुरू कर दी गई है। फिलहाल मरीज का इलाज अस्पताल में चल रहा है और स्वास्थ्य अधिकारी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि निपाह वायरस क्या है, यह कैसे फैलता है और क्यों इसे दुनिया के सबसे खतरनाक वायरसों में गिना जाता है।
केरल में मिला निपाह वायरस का नया मामला
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए 77 लोगों की पहचान की गई है। इनमें परिवार के सदस्य, दोस्त, सहकर्मी और स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। राहत की बात यह है कि अभी तक इनमें से किसी में भी संक्रमण के लक्षण नहीं पाए गए हैं। हालांकि, 15 लोगों को हाई-रिस्क कैटेगरी में रखा गया है और उनकी विशेष निगरानी की जा रही है।

निपाह वायरस
निपाह वायरस एक जूनोटिक वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलता है। इसका मुख्य स्रोत फल खाने वाले चमगादड़ (फ्रूट बैट्स) माने जाते हैं। यह वायरस पहली बार वर्ष 1999 में मलेशिया और सिंगापुर में सामने आया था। इसके बाद भारत, बांग्लादेश और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में समय-समय पर इसके मामले दर्ज किए गए हैं।
कैसे फैलता है निपाह वायरस
निपाह वायरस कई माध्यमों से इंसानों तक पहुंच सकता है। संक्रमित चमगादड़ों की लार, पेशाब या मल से दूषित फल खाने पर संक्रमण हो सकता है। इसके अलावा ऐसा कच्चा खजूर का रस पीना, जो चमगादड़ों के संपर्क में आया हो, भी जोखिम बढ़ा सकता है। संक्रमित जानवरों, खासकर सूअरों के संपर्क में आने से भी वायरस फैल सकता है। वहीं संक्रमित व्यक्ति की लार, खून या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के संपर्क में आने से व्यक्ति-से-व्यक्ति संक्रमण का खतरा भी रहता है। यही वजह है कि मरीज की देखभाल करने वाले लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
निपाह वायरस के शुरुआती लक्षण क्या हैं
निपाह वायरस के लक्षण संक्रमण होने के 4 से 14 दिनों के भीतर दिखाई दे सकते हैं। शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे लगते हैं, जिससे पहचान करना मुश्किल हो सकता है। संक्रमित व्यक्ति को तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई मामलों में मरीज को अत्यधिक थकान और भ्रम की स्थिति भी महसूस हो सकती है।
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क्यों माना जाता है बेहद खतरनाक
निपाह वायरस की सबसे बड़ी चिंता इसकी उच्च मृत्यु दर है। गंभीर मामलों में यह वायरस दिमाग तक पहुंचकर एन्सेफलाइटिस यानी मस्तिष्क में सूजन पैदा कर सकता है। इसके कारण मरीज को दौरे पड़ना, बेहोशी और कोमा जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह संक्रमण तेजी से गंभीर रूप ले सकता है और कई बार मरीज की जान भी जा सकती है। यही कारण है कि निपाह वायरस को अत्यधिक घातक संक्रमणों में गिना जाता है।

बचाव के लिए क्या करें
निपाह वायरस से बचाव के लिए साफ-सफाई और सतर्कता बेहद जरूरी है। खुले में रखे फलों को अच्छी तरह धोकर ही खाएं। कच्चा खजूर का रस पीने से बचें और बीमार जानवरों के संपर्क में आने से परहेज करें। अगर किसी व्यक्ति में तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या न्यूरोलॉजिकल लक्षण दिखाई दें और वह संक्रमित क्षेत्र से जुड़ा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। संक्रमित मरीजों की देखभाल करते समय मास्क, दस्ताने और अन्य सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल करना भी जरूरी है।
सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव
केरल में सामने आया यह नया मामला याद दिलाता है कि निपाह वायरस अभी भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। हालांकि समय रहते पहचान, निगरानी और सावधानी बरतकर इसके प्रसार को रोका जा सकता है। ऐसे में घबराने की बजाय जागरूक रहना और स्वास्थ्य विभाग की सलाह का पालन करना सबसे जरूरी है।

