जानलेवा ओवरडोज से बचाएगा ये नया Device , जानिए कैसे काम करेगी नई तकनीक

punjabkesari.in Tuesday, Aug 18, 2026 - 09:29 AM (IST)

नारी डेस्क:   दवाओं के ओवरडोज की स्थिति में सबसे बड़ा खतरा यह होता है कि मरीज के आसपास उस समय कोई मदद के लिए मौजूद नहीं होता। खासकर ओपिओइड दवाओं के अधिक सेवन की स्थिति में समय पर इलाज न मिलने पर मामला जानलेवा हो सकता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए अमेरिका के वर्जीनिया टेक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक विकसित की है, जो मरीज के अकेले होने पर भी आपात स्थिति में मदद कर सकती है। वैज्ञानिकों ने सिक्के के आकार का एक स्मार्ट वियरेबल पैच तैयार किया है। यह पैच शरीर में फेंटानिल की मात्रा बढ़ने का पता लगाकर जरूरत पड़ने पर खुद ही नालोक्सोन दवा रिलीज कर सकता है। इस तकनीक से जुड़ा शोध अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘एडवांस्ड साइंस’ में प्रकाशित हुआ है।

शरीर में फेंटानिल बढ़ते ही सक्रिय होगा पैच

शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह स्मार्ट पैच शरीर पर लगाया जा सकता है और लगातार शरीर में मौजूद संकेतों की निगरानी करता है। जब सिस्टम फेंटानिल से जुड़े ओवरडोज के संकेतों का पता लगाता है, तो पैच अपने आप नालोक्सोन रिलीज करने के लिए सक्रिय हो जाता है। इस तकनीक की खासियत यह है कि मरीज को खुद दवा लेने या आसपास मौजूद किसी व्यक्ति पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यानी अगर ओवरडोज की स्थिति में व्यक्ति अकेला है और समय पर मदद के लिए कोई मौजूद नहीं है, तब भी यह डिवाइस आपात स्थिति में प्रतिक्रिया देने की कोशिश कर सकता है।

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ओपिओइड ओवरडोज में नालोक्सोन की भूमिका

नालोक्सोन एक ऐसी दवा है जिसका इस्तेमाल ओपिओइड ओवरडोज के प्रभाव को तेजी से उलटने के लिए किया जाता है। ओपिओइड दवाएं ज्यादा मात्रा में लेने पर सांस लेने की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे मामलों में समय पर नालोक्सोन देना बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। वर्जीनिया टेक के प्रोफेसर वुजिन सन के अनुसार, इस पैच का उद्देश्य मरीज की दर्द की दवा को रोकना नहीं है। इसे खास तौर पर अनजाने में होने वाले ओवरडोज की स्थिति में जान बचाने वाले एक अतिरिक्त सुरक्षा उपकरण के तौर पर विकसित किया गया है।

भारत में भी हो सकता है इस्तेमाल

फेंटानिल का इस्तेमाल भारत में भी कुछ गंभीर चिकित्सकीय स्थितियों में किया जाता है। खासतौर पर कैंसर या अत्यधिक दर्द से जूझ रहे मरीजों के इलाज में डॉक्टर सीमित परिस्थितियों में इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर स्मार्ट पैच आगे चलकर क्लिनिकल ट्रायल में सुरक्षित और प्रभावी साबित होता है और इसे चिकित्सा उपयोग के लिए मंजूरी मिलती है, तो ऐसी तकनीक उन मरीजों के लिए उपयोगी हो सकती है जिन्हें ओपिओइड दवाएं दी जाती हैं। खासकर घर पर इलाज करा रहे मरीजों में यह आपात स्थिति के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा दे सकता है।

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ओपिओइड ओवरडोज क्यों बन रहा है बड़ी चुनौती

ओपिओइड दवाएं डॉक्टरों की सलाह पर दर्द से राहत के लिए इस्तेमाल की जाती हैं। लेकिन निर्धारित मात्रा से ज्यादा दवा लेना, गलती से दोबारा खुराक ले लेना या दवा के प्रभाव को सही तरीके से न समझ पाना ओवरडोज का कारण बन सकता है। ओवरडोज की स्थिति में मरीज को अत्यधिक नींद आना, प्रतिक्रिया न देना और सांस लेने में गंभीर परेशानी जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। यदि समय पर मदद नहीं मिलती, तो स्थिति जानलेवा भी हो सकती है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक भारत में भी ओपिओइड का इस्तेमाल करने वाली बड़ी आबादी है। ऐसे में ओवरडोज से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए समय पर पहचान और तुरंत उपचार की व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण है।

अकेले रहने वाले मरीजों के लिए खास मददगार हो सकती है तकनीक

इस पैच की सबसे अहम संभावनाओं में से एक यह है कि यह उस स्थिति में भी काम करने के लिए डिजाइन किया गया है जब मरीज के आसपास कोई दूसरा व्यक्ति मौजूद न हो। सामान्य तौर पर ओवरडोज की स्थिति में नालोक्सोन देने के लिए किसी व्यक्ति की जरूरत पड़ती है। लेकिन अगर मरीज अकेला है, तो मदद मिलने में देरी हो सकती है। ऐसे में शरीर में ओवरडोज के संकेतों को पहचानकर अपने आप दवा देने वाली तकनीक आपात स्थिति और इलाज के बीच के महत्वपूर्ण समय को कम करने में मदद कर सकती है।

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अभी क्लिनिकल इस्तेमाल से पहले बाकी हैं कई चरण

हालांकि यह तकनीक काफी उम्मीद जगाती है, लेकिन इसे आम मरीजों के लिए उपलब्ध होने से पहले कई जरूरी परीक्षणों से गुजरना होगा। शुरुआती शोध में इसकी क्षमता दिखाई गई है, लेकिन वास्तविक मरीजों में इसकी सुरक्षा, सटीकता और प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना जरूरी होगा। क्लिनिकल ट्रायल और नियामकीय मंजूरी के बाद ही यह तय हो पाएगा कि स्मार्ट पैच को बड़े स्तर पर चिकित्सा क्षेत्र में इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं। फिलहाल शोधकर्ताओं का लक्ष्य ऐसी तकनीक विकसित करना है, जो ओपिओइड ओवरडोज की स्थिति में समय पर हस्तक्षेप कर सके और अनजाने में होने वाली मौतों को रोकने में मदद करे।
  
 
 


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Content Editor

Priya Yadav

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