रक्षाबंधन पर लगी हो भद्रा तो जानें क्यों नहीं बांधी जाती भाई को राखी

punjabkesari.in Sunday, Aug 09, 2026 - 05:19 PM (IST)

नारी डेस्क : रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पर्व है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना करती हैं। लेकिन राखी बांधने से पहले पंचांग में भद्रा काल का विचार करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना और अन्य मांगलिक कार्य करना शुभ नहीं माना जाता। आखिर भद्रा क्या है? इसे अशुभ क्यों माना जाता है? भद्रा का संबंध किससे है और रक्षाबंधन पर इसके दौरान राखी बांधने की मनाही क्यों है? आइए जानते हैं भद्रा से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय महत्व के बारे में।

क्या है भद्रा?

ज्योतिष और हिंदू पंचांग में भद्रा को विष्टि करण के नाम से जाना जाता है। करण तिथि का आधा भाग होता है और पंचांग में कुल 11 करण माने जाते हैं, जिनमें विष्टि करण को भद्रा कहा जाता है। पंचांग की गणना के अनुसार भद्रा एक निश्चित अवधि के रूप में आती है। धार्मिक परंपरा में इस समय को शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इसी वजह से विवाह, गृह प्रवेश जैसे कई शुभ कार्यों के साथ रक्षाबंधन पर राखी बांधने के लिए भी भद्रा काल से बचने की सलाह दी जाती है।

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कौन हैं भद्रा?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा सूर्य देव और माता छाया की पुत्री तथा शनिदेव की बहन मानी जाती हैं। धार्मिक कथाओं में उनका स्वरूप उग्र और स्वभाव क्रोधी बताया गया है। मान्यता है कि भद्रा के जन्म के बाद उनके उग्र स्वभाव के कारण देवता और मनुष्य चिंतित हो गए थे। वह यज्ञ, हवन और दूसरे मांगलिक कार्यों में बाधा डालने लगीं। उनकी इसी प्रकृति को देखते हुए उन्हें पंचांग के एक विशेष करण में स्थान दिया गया।

कैसा बताया गया है भद्रा का स्वरूप?

पौराणिक वर्णनों में भद्रा का रूप सामान्य देवी-स्वरूप से अलग और भय उत्पन्न करने वाला बताया गया है। उनका वर्ण काला, लंबे बाल और बड़े दांत बताए जाते हैं। कुछ धार्मिक कथाओं में उन्हें गधे के मुख, लंबी पूंछ और तीन पैरों वाले स्वरूप में भी वर्णित किया गया है। इन वर्णनों को धार्मिक और पौराणिक मान्यता के संदर्भ में ही समझना चाहिए। इनका उद्देश्य भद्रा के उग्र स्वभाव और उनके प्रतीकात्मक स्वरूप को बताना है।

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भद्रा को पंचांग में स्थान क्यों मिला?

पौराणिक कथा के अनुसार भद्रा के उग्र स्वभाव से लोग परेशान होने लगे थे। तब उनके पिता सूर्य देव ने इस समस्या का समाधान खोजने के लिए ब्रह्मा जी से मार्गदर्शन लिया। मान्यता है कि ब्रह्मा जी ने भद्रा को पंचांग के विष्टि करण में स्थान दिया। इस तरह भद्रा का समय निश्चित हो गया और उनकी स्थिति पंचांग की गणना से निर्धारित होने लगी। इसी वजह से भद्रा को किसी एक पूरे दिन या स्थायी अवधि के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि पंचांग के अनुसार अलग-अलग समय पर आने वाले विष्टि करण के रूप में देखा जाता है।

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भद्रा में शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते?

धार्मिक ज्योतिषीय मान्यताओं में भद्रा को शुभ कार्यों के लिए अनुपयुक्त समय माना गया है। माना जाता है कि इस दौरान किए गए मांगलिक कार्यों में बाधा या विलंब आ सकता है। इसी कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नए कार्य की शुरुआत और अन्य शुभ संस्कारों के लिए भद्रा से बचने की परंपरा है। रक्षाबंधन पर भी भद्रा समाप्त होने के बाद ही राखी बांधने की सलाह दी जाती है। हालांकि इसे इस तरह नहीं समझना चाहिए कि भद्रा में किया गया हर काम निश्चित रूप से खराब ही होगा। यह मुख्य रूप से धार्मिक मान्यता और मुहूर्त-विचार का विषय है।

रक्षाबंधन पर भद्रा में क्यों नहीं बांधी जाती राखी?

रक्षाबंधन का मुख्य उद्देश्य भाई के लिए मंगलकामना और रक्षा का संकल्प है। इसलिए परंपरा में राखी बांधने के लिए शुभ समय का चुनाव किया जाता है और भद्रा काल से बचा जाता है। पंचांग परंपरा के अनुसार रक्षाबंधन की पूर्णिमा तिथि के दौरान यदि भद्रा मौजूद हो, तो उसके समाप्त होने के बाद राखी बांधने का मुहूर्त देखा जाता है। प्रसिद्ध पंचांग स्रोत भी रक्षाबंधन के रक्षा-सूत्र समारोह को भद्रा समाप्त होने के बाद करने की सलाह देते हैं।

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क्या रावण की बहन ने भद्रा में बांधी थी राखी?

भद्रा और रक्षाबंधन से जुड़ी एक लोकप्रिय लोकमान्यता रावण और उसकी बहन शूर्पणखा से जुड़ी है। कथा के अनुसार, शूर्पणखा ने भद्रा काल में अपने भाई रावण को राखी बांधी थी। इसके बाद रावण और उसके पूरे कुल का विनाश हुआ। इसी लोकमान्यता के आधार पर कहा जाता है कि भद्रा के समय भाई को राखी नहीं बांधनी चाहिए। हालांकि, यह बात ध्यान रखना जरूरी है कि रावण-शूर्पणखा द्वारा रक्षाबंधन पर भद्रा में राखी बांधने की कथा को प्रमाणित प्राचीन रक्षाबंधन कथा के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। यह बाद की प्रचलित धार्मिक/लोक मान्यताओं में मिलती है। रक्षाबंधन की अधिक प्राचीन और प्रमुख कथा-परंपराओं में इंद्राणी द्वारा इंद्र को रक्षा-सूत्र बांधने की कथा मिलती है, जिसका उल्लेख भविष्य पुराण से जोड़ा जाता है।

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क्या भद्रा के दौरान कोई भी काम नहीं करना चाहिए?

भद्रा को मुख्य रूप से मांगलिक और शुभ कार्यों के लिए वर्जित समय माना जाता है। इसलिए यदि किसी महत्वपूर्ण धार्मिक संस्कार या शुभ कार्य का मुहूर्त निकाला जा रहा हो, तो पंचांग में भद्रा की स्थिति देखी जाती है। लेकिन दैनिक जीवन के जरूरी कामों को लेकर अलग-अलग परंपराओं में अलग-अलग मान्यताएं हो सकती हैं। इसलिए भद्रा को लेकर अनावश्यक भय पैदा करने के बजाय इसे मुहूर्त संबंधी धार्मिक परंपरा के रूप में समझना बेहतर है।


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Content Editor

Monika

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