इस बार खुद बनाएं ईको-फ्रेंडली राखी, भाई की कलाई पर सजाएं खूबसूरत रक्षा सूत्र

punjabkesari.in Monday, Jul 27, 2026 - 03:34 PM (IST)

नारी डेस्क : रक्षाबंधन भाई-बहन के अटूट रिश्ते, प्यार और विश्वास का त्योहार है। अगर इस बार आप अपने भाई के लिए कुछ अलग और यादगार करना चाहते हैं, तो बाजार की प्लास्टिक और सिंथेटिक राखियों की बजाय घर पर बनी ईको-फ्रेंडली हैंडमेड राखी चुनें। यह न सिर्फ आपके स्नेह को खास बनाएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी आपका छोटा-सा योगदान होगा। थोड़ी-सी रचनात्मकता और घर में मौजूद प्राकृतिक चीजों की मदद से आप बेहद खूबसूरत और टिकाऊ राखी तैयार कर सकते हैं।

क्यों चुनें ईको-फ्रेंडली राखी?

बाजार में मिलने वाली कई राखियों में प्लास्टिक, ग्लिटर, फोम और सिंथेटिक धागों का इस्तेमाल किया जाता है, जो आसानी से नष्ट नहीं होते और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके विपरीत, प्राकृतिक और बायोडिग्रेडेबल सामग्री से बनी राखियां पर्यावरण के अनुकूल होती हैं और त्योहार को अधिक जिम्मेदारी के साथ मनाने का अवसर देती हैं।

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राखी बनाने के लिए जरूरी सामग्री

घर पर ईको-फ्रेंडली राखी बनाने के लिए आप आसानी से उपलब्ध चीजों का इस्तेमाल कर सकते हैं 
जैसे, सूती या जूट का धागा
पुराने कॉटन कपड़े के टुकड़े
सूखे फूल या पत्तियां
लकड़ी या मिट्टी के मोती
रंगीन रिसाइकल्ड कागज
छोटे बीज (सीड्स)
प्राकृतिक गोंद।

ऐसे दें राखी को खूबसूरत लुक

राखी को आकर्षक बनाने के लिए बीच में कपड़े का फूल, लकड़ी की छोटी आकृति, मिट्टी का छोटा पदक, दालचीनी की स्टिक या रंगीन कागज से बनी सजावट लगाई जा सकती है। अगर आप इसे और खास बनाना चाहते हैं, तो सीड राखी बनाएं। इसे बाद में मिट्टी में लगाने पर पौधा उग सकता है, जिससे यह राखी लंबे समय तक यादगार बनी रहती है।

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धागा और खुशबू का रखें ध्यान

राखी बनाने के लिए हमेशा सूती, जूट या ऊनी धागे का इस्तेमाल करें। यह मजबूत होने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित होता है। चाहें तो राखी पर चंदन, गुलाब या लैवेंडर के एसेंशियल ऑयल की 1-2 बूंदें डालकर उसे प्राकृतिक और हल्की खुशबू भी दे सकते हैं।

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प्यार के साथ दें प्रकृति की सुरक्षा का संदेश

इस रक्षाबंधन पर हैंडमेड ईको-फ्रेंडली राखी सिर्फ एक रक्षा सूत्र नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और भाई-बहन के रिश्ते में स्नेह का खूबसूरत प्रतीक बन सकती है। आपकी छोटी-सी पहल न केवल त्योहार को खास बनाएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देगी।


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Content Editor

Monika

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