चैत्र नवरात्रि 2026: इन 9 दिनों में इन चीज़ों को खरीदने से बचें, माना जाता है अशुभ
punjabkesari.in Sunday, Mar 15, 2026 - 03:47 PM (IST)
नारी डेस्क: Chaitra Navratri हिंदू धर्म का एक बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। यह त्योहार मां दुर्गा की भक्ति, पूजा और आध्यात्मिक साधना के लिए समर्पित होता है। इन नौ दिनों के दौरान भक्त देवी के नौ रूपों की पूजा करते हैं और अपने जीवन में शुद्धता, संयम और सात्विकता बनाए रखने की कोशिश करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के दौरान खानपान से लेकर खरीदारी तक कई नियमों का पालन किया जाता है। माना जाता है कि इस समय कुछ खास चीजों को खरीदने से बचना चाहिए, क्योंकि वे नकारात्मक ऊर्जा या अशुभता का प्रतीक मानी जाती हैं। आइए जानते हैं उन चीजों के बारे में, जिन्हें नवरात्रि के दिनों में खरीदना उचित नहीं माना जाता।
चमड़े से बने सामान
नवरात्रि के दौरान कई लोग चमड़े से बने सामान जैसे जूते, बेल्ट, बैग या वॉलेट खरीदने से बचते हैं। चूंकि चमड़ा जानवरों की खाल से बनाया जाता है, इसलिए इसे इस पवित्र समय में खरीदना उचित नहीं माना जाता। नवरात्रि का पर्व करुणा, पवित्रता और भक्ति का प्रतीक है, इसलिए इस दौरान ऐसे उत्पादों से दूरी रखने की सलाह दी जाती है।

शराब
नवरात्रि के नौ दिनों में शराब का सेवन और उसकी खरीदारी दोनों से ही परहेज करने की परंपरा है। यह पर्व आध्यात्मिक शुद्धता और भक्ति पर केंद्रित होता है, इसलिए शराब जैसी चीजों को इस दौरान नकारात्मक माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर के पवित्र वातावरण पर भी असर पड़ सकता है।
मांसाहारी भोजन
नवरात्रि के समय ज्यादातर लोग मांस, मछली और अंडे जैसे मांसाहारी भोजन से दूरी बना लेते हैं। भक्त इन दिनों सात्विक भोजन को प्राथमिकता देते हैं, जिसमें फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू का आटा और अन्य हल्के व पवित्र खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। माना जाता है कि इससे शरीर और मन दोनों शुद्ध रहते हैं और पूजा-पाठ में ध्यान लगाने में आसानी होती है।
काले रंग के कपड़े
कई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान काले रंग के कपड़े पहनने या खरीदने से बचना चाहिए। इसके बजाय लोग लाल, पीला और सफेद जैसे शुभ रंगों के कपड़े पहनना पसंद करते हैं। इन रंगों को सकारात्मक ऊर्जा और शुभता का प्रतीक माना जाता है।

धारदार वस्तुएं
पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान चाकू, कैंची या अन्य धारदार वस्तुएं खरीदना भी उचित नहीं माना जाता। इन वस्तुओं को संघर्ष और नकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है, जो त्योहार के शांत और पवित्र माहौल के विपरीत समझा जाता है।
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लोहे से बनी चीजें
कुछ लोग नवरात्रि के दौरान लोहे से बनी वस्तुएं खरीदने से भी परहेज करते हैं। सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुसार लोहे को भारी और कठोर ऊर्जा से जोड़ा जाता है। इसलिए इन नौ दिनों में भौतिक खरीदारी से ज्यादा ध्यान पूजा, व्रत और आध्यात्मिक गतिविधियों पर दिया जाता है।
प्याज और लहसुन
नवरात्रि के दौरान कई लोग प्याज और लहसुन का सेवन भी नहीं करते। हिंदू परंपरा में इन्हें तामसिक भोजन की श्रेणी में रखा गया है। उपवास रखने वाले भक्त सात्विक भोजन का सेवन करते हैं, जिससे मन शांत और एकाग्र बना रहता है।

तंबाकू से जुड़ी चीजें
नवरात्रि के दौरान सिगरेट, गुटखा, तंबाकू या तंबाकू युक्त पान जैसी चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। यह त्योहार आत्म-अनुशासन और शारीरिक व मानसिक शुद्धता का संदेश देता है। इसलिए इस दौरान ऐसी चीजों की खरीदारी और सेवन को भक्ति की भावना के विपरीत माना जाता है।नवरात्रि केवल एक त्योहार नहीं बल्कि आध्यात्मिक साधना और आत्मसंयम का समय माना जाता है। इन नौ दिनों में लोग अपने खानपान, व्यवहार और दिनचर्या में पवित्रता बनाए रखने की कोशिश करते हैं। इसी कारण कई धार्मिक परंपराओं में कुछ वस्तुओं की खरीदारी और सेवन से परहेज करने की सलाह दी जाती है, ताकि घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे और देवी की कृपा प्राप्त हो सके।

