नाना पाटेकर को आया कार्डियक अरेस्ट, आखिर कैसे अचानक रुक जाती है दिल की पंपिंग

punjabkesari.in Thursday, Oct 08, 2026 - 01:42 PM (IST)

नारी डेस्क : बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर ने उनके चाहने वालों को गहरे सदमे में डाल दिया है। 75 साल की उम्र में नाना पाटेकर ने 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा स्थित अपने घर पर अंतिम सांस ली। उन्हें बेहोशी की हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट से एक घंटे तक उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। मणिपाल हॉस्पिटल के डॉक्टर शेखर सालकर के मुताबिक, नाना को अस्पताल लाए जाने के समय उनकी हालत बेहद गंभीर थी और उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। नाना पाटेकर की मौत कार्डियक अरेस्ट से हुई बताई जा रही है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि कार्डियक अरेस्ट आखिर क्या होता है और इसमें दिल के अंदर क्या होता है? क्या वाकई दिल की 'बिजली' बंद हो जाती है?

क्या होता है हार्ट का इलेक्ट्रिकल सिस्टम?

हमारा दिल सिर्फ एक मांसपेशी नहीं है, बल्कि इसके धड़कने के पीछे एक जटिल इलेक्ट्रिकल सिस्टम काम करता है। मेडिकल भाषा में इसे कार्डियक कंडक्शन सिस्टम कहा जाता है। इस सिस्टम में विशेष कोशिकाएं और नोड्स होते हैं, जो इलेक्ट्रिकल सिग्नल पैदा करते हैं और उन्हें दिल के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाते हैं। यही संकेत दिल की मांसपेशियों को बताते हैं कि कब सिकुड़ना है और कब रिलैक्स होना है, जिससे शरीर में खून का प्रवाह बना रहता है। इस प्रक्रिया की शुरुआत आमतौर पर साइनोएट्रियल (SA) नोड से होती है, जिसे दिल का प्राकृतिक पेसमेकर कहा जाता है। इसके बाद इलेक्ट्रिकल सिग्नल दिल के दूसरे हिस्सों तक पहुंचता है और दिल की धड़कन को नियंत्रित करता है।

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कार्डियक अरेस्ट में क्या होता है?

कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधि में ऐसी गंभीर गड़बड़ी आ जाती है कि दिल सामान्य तरीके से धड़ककर शरीर में खून पंप नहीं कर पाता। कुछ स्थितियों में दिल पूरी तरह रुक सकता है, जबकि कुछ मामलों में उसकी रिदम इतनी तेज या अव्यवस्थित हो जाती है कि प्रभावी पंपिंग बंद हो जाती है। ऐसा होने पर शरीर के महत्वपूर्ण अंगों, खासकर दिमाग तक ऑक्सीजन वाला खून पहुंचना बंद हो जाता है। व्यक्ति अचानक बेहोश हो सकता है और सामान्य सांस लेना बंद कर सकता है। यही वजह है कि कार्डियक अरेस्ट एक बेहद गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है।

क्या नाना पाटेकर के मामले में भी दिल की 'बिजली' की गड़बड़ी हुई थी?

नाना पाटेकर की मौत को कार्डियक अरेस्ट से जोड़ा गया है, लेकिन कार्डियक अरेस्ट का सटीक कारण या ट्रिगर क्या था, इसे लेकर अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि उनके मामले में किसी खास इलेक्ट्रिकल बीमारी या रिदम की समस्या के कारण ही कार्डियक अरेस्ट हुआ। मेडिकल तौर पर कार्डियक अरेस्ट के पीछे कई कारण हो सकते हैं। अनियमित हृदय गति यानी अरिदमिया, खासकर वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन, इसके प्रमुख कारणों में शामिल है। इसके अलावा कोरोनरी आर्टरी डिजीज, पहले से मौजूद हृदय संबंधी समस्याएं, हार्ट फेलियर, दिल की मांसपेशियों या वाल्व की बीमारी और कुछ अन्य गंभीर स्थितियां भी कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकती हैं।

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हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट एक ही नहीं हैं

अक्सर लोग हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों अलग स्थितियां हैं। हार्ट अटैक में दिल की किसी मांसपेशी तक खून पहुंचाने वाली रक्त वाहिका में रुकावट आ जाती है। वहीं कार्डियक अरेस्ट में दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधि में गंभीर गड़बड़ी होने के कारण दिल प्रभावी तरीके से खून पंप करना बंद कर देता है। हालांकि दोनों के बीच संबंध हो सकता है। हार्ट अटैक के कारण दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधि प्रभावित होकर कार्डियक अरेस्ट भी हो सकता है।

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कार्डियक अरेस्ट के संकेत क्या हैं?

कार्डियक अरेस्ट कई बार बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के अचानक हो सकता है। 
इसके दौरान व्यक्ति अचानक बेहोश हो सकता है
आवाज देने या छूने पर प्रतिक्रिया नहीं देता
सामान्य तरीके से सांस लेना बंद कर सकता है
नाड़ी महसूस नहीं हो सकती
कुछ मामलों में इससे पहले सीने में दर्द या दबाव, सांस फूलना, धड़कन तेज होना, चक्कर या कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं।
हालांकि हर व्यक्ति में पहले से चेतावनी देने वाले लक्षण हों, यह जरूरी नहीं है।

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कार्डियक अरेस्ट में हर मिनट क्यों है जरूरी?

कार्डियक अरेस्ट के दौरान शरीर में खून और ऑक्सीजन का प्रवाह अचानक रुक जाता है। ऐसे में समय पर मदद मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है। तुरंत CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) शुरू करना और उपलब्ध होने पर AED (ऑटोमेटेड एक्सटर्नल डिफिब्रिलेटर) का इस्तेमाल जीवन बचाने में मदद कर सकता है। CPR दिल की सामान्य धड़कन को अपने आप वापस शुरू नहीं करता, लेकिन यह शरीर और खासकर दिमाग तक कुछ हद तक रक्त और ऑक्सीजन पहुंचाए रखने में मदद करता है। वहीं डिफिब्रिलेशन कुछ जानलेवा रिदम में सामान्य हृदय रिदम बहाल करने में मदद कर सकता है।

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नाना पाटेकर के आखिरी पलों को लेकर डॉक्टर ने क्या बताया?

मणिपाल हॉस्पिटल के डॉक्टर शेखर सालकर के मुताबिक, नाना पाटेकर ने रात करीब 2:30 बजे अपने दोस्त को मैसेज कर बताया था कि उनकी तबीयत ठीक नहीं लग रही। बाद में उनके दोस्त उनके घर पहुंचे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाना की हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट से एक घंटे तक उन्हें बचाने की कोशिश की। अस्पताल पहुंचने तक उनकी हालत बेहद गंभीर थी और उन्हें बचाया नहीं जा सका। नाना पाटेकर के निधन ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि कार्डियक अरेस्ट जैसी मेडिकल इमरजेंसी में शुरुआती मिनट कितने महत्वपूर्ण होते हैं।


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Monika

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