लोगों की बातों पर नाना पाटेकर के बेटे ने तोड़ी चुप्पी, बताया कैसा था उनके माता- पिता का रिश्ता
punjabkesari.in Friday, Oct 16, 2026 - 02:09 PM (IST)
नारी डेस्क: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर ने अपने पिता के आखिरी पलों की यादें साझा की हैं। इस नुकसान से उबरने के बारे में बात करते हुए, फिल्म निर्माता और समाज सेवक ने बताया कि उनके माता-पिता की हिम्मत ने उन्हें इस मुश्किल दौर में मजबूत बने रहने में मदद की है। नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर को गोवा में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार पुणे स्थित उनके फार्महाउस पर किया गया।
परिवार के रिश्तों को लेकर बताई सच्चाई
मल्हार ने कहा- "बचपन में, मैंने अपने माता-पिता से काफी मजबूती और मुश्किलों का सामना करने की क्षमता सीखी। इसके अलावा, बाहर से लोगों को जो भी दिखता हो उससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, असल में, हम एक परिवार के तौर पर भावनात्मक रूप से बहुत मजबूती से जुड़े हुए थे " । उन्होंने आगे कहा- "इतना सब कुछ वायरल हो रहा है, जो कि बहुत गलत है। सिर्फ इसलिए कि हम इंस्टाग्राम पर परिवार की तस्वीरें शेयर नहीं करते इसका मतलब यह नहीं है कि हमारे बीच कोई रिश्ता या जुड़ाव नहीं है। अलग होने के बाद भी, मेरे माता-पिता के रिश्ते अच्छे थे, उनका 38-39 साल का साथ था, और चीजें हमेशा वैसी नहीं होतीं जैसी वे बाहर से दिखती हैं..."
नाना पाटेकर के आखिरी पलों को किया याद
नाना पाटेकर ने आगे कहा- मैंने जो पढ़ा है, उसका जवाब यह है कि वे अकेले नहीं थे कभी नहीं थे। और न ही उनकी तबीयत खराब थी, क्योंकि हममें से कोई न कोई हमेशा उनके साथ रहता था। वे बहुत एक्टिव थे और जिम में ढाई घंटे तक वर्कआउट करते थे; आज के युवा भी ऐसा नहीं कर पाते, उनका फिटनेस लेवल ऐसा था," । मल्हार उस दिन को याद करते हैं जब उनके पिता नाना पाटेकर का निधन हुआ था। उन्होंने बताया- "नाना जी गोवा में थे। मेरे चचेरे भाई प्रसाद, जो उनकी मनोरंजन से जुड़ी सभी मीटिंग्स देखते थे, उन्हें नाना जी ने मुंबई भेज दिया था क्योंकि उन्हें अगले ही दिन माधुरी जी (दीक्षित) के साथ 'केबीसी मराठी' की शूटिंग करनी थी। इसके अलावा, मेरे दूसरे भाई अमय उन्हें घर के ऊपर वाले हिस्से में आराम से बिठाने के बाद ही वहां से निकले थे। नाना जी ऐसे इंसान थे जो कभी किसी को परेशान नहीं करते थे।"
पिता को याद कर हुए भावुक
मल्हार ने कहा- दिग्गज अभिनेता के आखिरी पलों को याद करते हुए आगे कहा, "जब उन्हें बेचैनी महसूस हुई, तो उन्होंने बस एक मैसेज भेजा और कुछ देर बाद फोन भी किया। वे तुरंत वहां पहुंच गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मैं पुणे में था, तभी सुबह करीब 5 बजे मुझे मेरी मां का फोन आया। उसके बाद क्या हुआ, मुझे कुछ याद नहीं, ऐसा लगा जैसे मेरे आस-पास की दुनिया ही थम गई हो।"

