12 मन सूखी लकड़ी ही मेरी प्रॉपर्टी है, नाना पाटेकर ने मौत से पहले कही थी ऐसी बात, कहा- मेरी तस्वीर...
punjabkesari.in Thursday, Oct 08, 2026 - 12:05 PM (IST)
नारी डेस्क : बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। 75 साल की उम्र में उन्होंने 8 अक्टूबर की सुबह गोवा स्थित अपने घर में अंतिम सांस ली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया था और अस्पताल में करीब 45 मिनट तक सीपीआर देने के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। नाना पाटेकर के निधन की खबर ने उनके चाहने वालों को गहरे सदमे में डाल दिया है। पर्दे पर अपनी दमदार आवाज, बेबाक अंदाज और अलग तरह की अदाकारी के लिए पहचाने जाने वाले नाना सिर्फ एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि अपने विचारों को बिना किसी लाग-लपेट के रखने के लिए भी जाने जाते थे। उनकी जिंदगी को लेकर कही गई कई बातें अब उनके जाने के बाद फिर चर्चा में हैं। खासकर 2023 का वह इंटरव्यू, जिसमें नाना पाटेकर ने मौत, जिंदगी और अपनी आखिरी यात्रा को लेकर ऐसी बातें कही थीं, जिन्हें सुनकर शायद आज हर किसी को उनकी बेबाक सोच याद आ रही है।
मुझे मालूम है कि जाना है और 12 मन लकड़ी लगने वाली है
2023 में अपनी फिल्म 'द वैक्सीन वॉर' के दौरान दिए एक इंटरव्यू में नाना पाटेकर से पूछा गया था कि फिल्म इंडस्ट्री में इतने साल बिताने के बाद भी ग्लैमर और शोहरत का असर उन पर क्यों नहीं हुआ। इस सवाल का जवाब उन्होंने अपने उसी सीधे और बेबाक अंदाज में दिया था। नाना ने कहा था कि उन्हें पता है कि एक दिन इस दुनिया से जाना है और आखिर में उनके साथ सिर्फ उतनी ही लकड़ी जाएगी, जितनी अंतिम संस्कार के लिए जरूरी होगी। उन्होंने कहा था, 'मुझे मालूम है कि हमको जाना है और 12 मन लकड़ी लगने वाली है। यही मेरी पूरी प्रॉपर्टी है। इसी के साथ चला जाऊंगा। यानी उनके लिए जिंदगी में जमा की गई दौलत, शोहरत और नाम से कहीं ज्यादा बड़ी सच्चाई मृत्यु थी।
सूखी लकड़ी में जलाना, गीली लकड़ी मत इस्तेमाल करना
नाना पाटेकर ने अपने अंतिम संस्कार को लेकर भी बेहद अलग अंदाज में बात की थी। उन्होंने बताया था कि उन्होंने पहले से कह रखा है कि उनके अंतिम संस्कार में सूखी लकड़ी का इस्तेमाल किया जाए। उनका कहना था कि अगर गीली लकड़ी इस्तेमाल की गई तो धुआं होगा और आसपास खड़े लोगों की आंखों में पानी आ जाएगा। फिर उन्हें यह गलतफहमी हो सकती है कि लोग उनके लिए रो रहे हैं। उनका यह अंदाज सुनने में भले ही मजाकिया लगे, लेकिन इसके पीछे मौत को लेकर उनकी बेहद स्पष्ट सोच दिखाई देती थी। वह मृत्यु को जीवन की एक स्वाभाविक सच्चाई मानते थे और आखिरी वक्त तक किसी भ्रम में नहीं रहना चाहते थे।
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मर जाऊंगा तो मेरी तस्वीर भी मत लगाना
नाना पाटेकर ने इसी इंटरव्यू में एक और ऐसी बात कही थी, जो अब उनके निधन के बाद बेहद भावुक कर देने वाली है। उन्होंने कहा था कि इंसान के चले जाने के बाद कुछ समय तक लोग उसे याद करते हैं, लेकिन फिर जिंदगी आगे बढ़ जाती है। इसी सोच के चलते उन्होंने अपने परिवार से यहां तक कह दिया था कि उनकी तस्वीर भी न लगाई जाए। उन्होंने कहा था कि मरने के बाद उन्हें पूरी तरह भूल जाना। उनकी यह बात उनके व्यक्तित्व की उस सादगी को दिखाती है, जिसमें वह शोहरत और याद किए जाने की चाह से खुद को दूर रखते थे।
मृत्यु के बाद मां से मिलने जाऊंगा
नाना पाटेकर के लिए मौत सिर्फ जिंदगी का अंत नहीं थी। उन्होंने अपनी मां और परिवार को याद करते हुए कहा था कि उन्हें लगता है कि मृत्यु के बाद वह अपनी मां से मिलने जाएंगे। उन्होंने बताया था कि वह सात भाई-बहन थे और उनके छह भाई-बहन गुजर चुके थे। ऐसे में उनके लिए परिवार के कई लोग पहले ही उस दुनिया में जा चुके थे। उनकी सोच थी कि जब यहां उनके अपने लोग नहीं रहे तो मृत्यु के बाद उन्हीं लोगों से मिलने की यात्रा होगी। शायद यही वजह थी कि वह मृत्यु से डरने के बजाय उसे जिंदगी का स्वाभाविक हिस्सा मानते थे।
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'प्रहार' से निर्देशन की दुनिया में रखा कदम
नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ एक अभिनेता के तौर पर नहीं थी। उन्होंने 1991 में आई फिल्म 'प्रहार: द फाइनल अटैक' से निर्देशन की दुनिया में भी कदम रखा। इस फिल्म में उन्होंने अभिनय करने के साथ-साथ इसका निर्देशन और लेखन भी किया था। फिल्म में उन्होंने मेजर प्रताप चौहान का किरदार निभाया था। सेना और देशभक्ति की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की कहानी थी। इससे पहले 1989 में आई 'परिंदा' में उनके अन्ना सेठ के किरदार ने उन्हें अलग पहचान दिलाई थी। इस फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला था।
'क्रांतिवीर' से 'वेलकम' तक, हर किरदार में छोड़ी छाप
नाना पाटेकर का फिल्मी सफर कई दशकों तक चला और इस दौरान उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। 'परिंदा' में खूंखार अन्ना सेठ, 'प्रहार' में मेजर चौहान, 'तिरंगा' में पुलिस इंस्पेक्टर शिवाजीराव वाघले, 'क्रांतिवीर' में प्रताप, 'अब तक छप्पन' में साधु आगाशे और 'वेलकम' में उदय शेट्टी जैसे किरदारों ने उन्हें हर पीढ़ी के दर्शकों से जोड़ दिया। 'क्रांतिवीर' के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। वहीं 'अब तक छप्पन' में उनका शांत लेकिन प्रभावशाली पुलिस अधिकारी वाला अंदाज खूब पसंद किया गया। एक तरफ जहां वह गंभीर और आक्रामक किरदारों के लिए जाने जाते थे, वहीं 'वेलकम' के उदय शेट्टी ने उनके कॉमिक अंदाज को भी दर्शकों के सामने ला दिया।
नाना पाटेकर चले गए हैं, लेकिन उनके किरदार, उनकी आवाज और उनका बेबाक अंदाज लंबे समय तक लोगों के बीच जिंदा रहेगा। शायद यही उस अभिनेता की सबसे बड़ी विरासत है, जिसने कभी अपनी तस्वीर लगाए जाने तक की इच्छा नहीं जताई थी।

