आपके नाखून बताते हैं इन गंभीर बीमारियों का राज

punjabkesari.in Monday, Mar 09, 2026 - 11:41 AM (IST)

नारी डेस्क : अक्सर लोग नाखूनों को केवल सुंदरता और साफ-सफाई से जोड़कर देखते हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार नाखून हमारी सेहत के बारे में कई महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं। हाथ और नाखून न केवल हमारी पर्सनैलिटी और मैनर्स का प्रतीक होते हैं, बल्कि शरीर के अंदर चल रही कई प्रक्रियाओं की जानकारी भी देते हैं। नाखून शरीर की अंदरूनी स्थिति के छोटे मेसेंजर की तरह काम करते हैं। आमतौर पर नाखून लगभग 3 मिलीमीटर प्रति माह की धीमी गति से बढ़ते हैं। इसी कारण वे समय के साथ शरीर में हो रहे सूक्ष्म बदलावों को भी दर्शाते रहते हैं। यदि नाखूनों का रंग, आकार, मोटाई या बनावट बदलने लगे, तो यह कई बार किसी स्वास्थ्य समस्या का संकेत हो सकता है।

नाखूनों पर ध्यान देना क्यों जरूरी है?

स्किन विशेषज्ञों का कहना है कि नाखूनों में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। कई बार नाखूनों का रंग, बनावट और आकार शरीर में छिपी गंभीर बीमारियों का संकेत दे सकते हैं। उदाहरण के लिए पीले या चम्मच जैसे नाखून आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया का संकेत हो सकते हैं, जबकि पीले और मोटे नाखून फंगल संक्रमण या फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं की ओर इशारा कर सकते हैं। इसके अलावा नाखूनों पर गहरे धब्बे या रंग बदलना कुछ मामलों में त्वचा के कैंसर का संकेत भी हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार नाखूनों में दिखाई देने वाले बदलाव पोषण की कमी, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारियों और मेटाबॉलिक समस्याओं से भी जुड़े हो सकते हैं।

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आयरन की कमी का संकेत

आयरन शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए बेहद जरूरी तत्व है। जब शरीर में आयरन की कमी हो जाती है, तो उसका असर सबसे पहले नाखूनों पर दिखाई दे सकता है। आयरन की कमी के कारण नाखून पीले पड़ सकते हैं, पतले और कमजोर हो सकते हैं और कई बार अंदर की ओर मुड़कर चम्मच जैसे आकार के दिखाई देने लगते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि नाखून केराटिन से बने होते हैं और उनकी मजबूती अच्छे ब्लड फ्लो पर निर्भर करती है। जब शरीर में आयरन की कमी पूरी हो जाती है, तो धीरे-धीरे नाखून फिर से सामान्य आकार और मजबूती में लौट आते हैं।

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फेफड़ों और संक्रमण से जुड़े संकेत

नाखूनों का पीला और मोटा होना अक्सर फंगल संक्रमण का संकेत माना जाता है। हालांकि अगर पीले नाखून लंबे समय तक बने रहें और इसके साथ सांस लेने में परेशानी या शरीर में सूजन जैसी समस्या भी हो, तो यह येलो नेल सिंड्रोम नाम की दुर्लभ स्थिति की ओर भी इशारा कर सकता है। यह स्थिति कई बार फेफड़ों की पुरानी बीमारियों जैसे ब्रोंकिएक्टेसिस या प्लूरल रोग से जुड़ी हो सकती है। हालांकि हर पीला नाखून फेफड़ों की बीमारी का संकेत नहीं होता, लेकिन अगर नाखूनों में लंबे समय तक बदलाव बना रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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नाखूनों पर गहरे धब्बे या रंग बदलना

कभी-कभी नाखूनों पर दिखाई देने वाली पतली या गहरी रेखाएं सामान्य भी हो सकती हैं, लेकिन कुछ मामलों में यह नाखून के नीचे बनने वाले कैंसर (Subungual Melanoma) का संकेत भी हो सकती हैं। इसलिए यदि नाखूनों पर अचानक गहरी रेखा, धब्बा या रंग में बदलाव दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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नाखून का आकार बदलना

अगर नाखूनों का आकार गोल या गुंबद जैसा हो जाए, जिसे क्लबिंग कहा जाता है, तो यह लंबे समय तक शरीर में ऑक्सीजन की कमी का संकेत हो सकता है। क्लबिंग का संबंध कई बीमारियों से जुड़ा हो सकता है, जैसे जन्मजात हृदय रोग, पुरानी फेफड़ों की बीमारियां या सूजन से जुड़ी आंतों की बीमारी।

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कमजोर या धारीदार नाखून

अगर नाखूनों पर खड़ी धारियां दिखाई दें, वे कमजोर हो जाएं या आसानी से टूटने लगें, तो यह अक्सर पोषण की कमी का संकेत होता है। खासकर बायोटिन, जिंक, आयरन और प्रोटीन की कमी से नाखून कमजोर हो सकते हैं। इसके अलावा थायरॉयड से जुड़ी समस्याएं या लंबे समय तक रहने वाला तनाव भी नाखूनों को प्रभावित कर सकता है।

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नाखून केवल सुंदरता का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे शरीर की सेहत से जुड़े कई संकेत भी देते हैं। यदि नाखूनों के रंग, आकार या बनावट में लगातार बदलाव दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर होता है। समय पर ध्यान देने से कई बीमारियों का जल्दी पता लगाया जा सकता है और उचित इलाज शुरू किया जा सकता है।
 


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Monika

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