मंकी फीवर का कहर: युवा हो रहे वायरस का शिकार, ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सतर्क
punjabkesari.in Monday, Feb 02, 2026 - 03:53 PM (IST)
नारी डेस्क: मंकी फीवर (Monkey Fever) तेजी से फैल रहा है और खासकर युवा वर्ग इसके शिकार बन रहे हैं। अक्सर लोग इसके शुरुआती लक्षणों को हल्के में ले लेते हैं, जिससे समय पर इलाज में देरी हो जाती है। यह जरूरी है कि हम इसके संकेतों को समझें और सतर्क रहें। कर्नाटक में मंकी फीवर से 29 साल के एक युवक की मौत के बाद एक बार फिर इस गंभीर बीमारी को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह बीमारी अक्सर चर्चा में तब आती है, जब कोई गंभीर मामला सामने आता है। मृतक युवक तिरथहल्ली तालुक का रहने वाला था, जिसकी 28 जनवरी को उडुपी जिले के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग के कमिश्नर गुरुदत्ता हेगड़े के अनुसार, यह मामला दुर्भाग्यपूर्ण और असामान्य रहा। आमतौर पर अगर मंकी फीवर की पहचान संक्रमण के पहले हफ्ते में हो जाए तो मरीज के बचने की संभावना लगभग 100 प्रतिशत होती है। उन्होंने बताया कि लक्षण सामने आते ही युवक को अस्पताल पहुंचाया गया था और एक दिन के भीतर KFD की पुष्टि भी हो गई थी। कुछ दिनों तक उसकी हालत स्थिर रही, लेकिन अचानक तबीयत बिगड़ गई और उसकी जान नहीं बच सकी।
मंकी फीवर क्या होता है?
मंकी फीवर को मेडिकल भाषा में क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (KFD) कहा जाता है। यह एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से जंगलों और पहाड़ी इलाकों में पाई जाती है। यह बीमारी आमतौर पर कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र और केरल के कुछ हिस्सों में देखने को मिलती है। यह बीमारी अचानक तेज बुखार और शरीर में कमजोरी के साथ शुरू होती है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकती है।
World Health Network declares Monkeypox a pandemic.
— CSE page (@CSE_page) June 24, 2022
So far 3,417 confirmed Monkeypox cases reported across 58 countries.
To the point from IE ( Archive) pic.twitter.com/q1XIpB2iXu
मंकी फीवर कैसे फैलता है?
यह जानना जरूरी है कि मंकी फीवर सीधे बंदरों से इंसानों में नहीं फैलता। यह बीमारी एक खास किस्म के जंगली टिक (कीड़े) हेमाफिसैलिस स्पिनिगेरा के काटने से फैलती है। इसके अलावा गिलहरी, चूहे और अन्य छोटे जंगली जानवर भी इस वायरस के स्रोत हो सकते हैं। इंसान तब संक्रमित होता है जब उसे संक्रमित टिक काट ले या वह बीमार या मरे हुए बंदरों के सीधे संपर्क में आ जाए। अच्छी बात यह है कि यह बीमारी इंसान से इंसान में नहीं फैलती।
साल के किस समय खतरा ज्यादा रहता है?
मंकी फीवर के मामले आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर से शुरू होते हैं और जनवरी से अप्रैल के बीच सबसे ज्यादा सामने आते हैं। इस दौरान जंगलों और आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है।
किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है?
डॉक्टरों के अनुसार, जो लोग बिना सुरक्षा के जानवरों को संभालते हैं, जंगलों में जाते हैं या ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां संक्रमित बंदरों की मौत हुई हो, उनमें मंकी फीवर का खतरा ज्यादा होता है। जंगल में काम करने वाले मजदूर, लकड़ी काटने वाले, चरवाहे और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा जोखिम में रहते हैं।

मंकी फीवर के लक्षण क्या हैं?
मंकी फीवर के लक्षण आमतौर पर 3 से 8 दिन के भीतर दिखने लगते हैं। शुरुआत में मरीज को तेज ठंड लगती है और तेज सिरदर्द होता है। इसके बाद लक्षण गंभीर हो सकते हैं।
शुरुआती लक्षणों
तेज बुखार
ठंड लगना
तेज सिरदर्द
शरीर और मांसपेशियों में दर्द
बीमारी बढ़ने पर ये लक्षण दिख सकते हैं
नाक, गले और मसूड़ों से खून आना
लो ब्लड प्रेशर
प्लेटलेट्स और ब्लड काउंट का गिरना
कुछ गंभीर मामलों में न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी नजर आते हैं, जैसे
उल्टी और मितली
मांसपेशियों में जकड़न
मानसिक भ्रम
हाथ-पैर कांपना
नजर कमजोर होना
रिफ्लेक्स कम होना
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मंकी फीवर कितना जानलेवा है?
मंकी फीवर की मृत्यु दर आमतौर पर 2 से 10 प्रतिशत के बीच मानी जाती है। यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी की पहचान कितनी जल्दी हुई और इलाज कब शुरू किया गया। अगर समय रहते इलाज मिल जाए, तो ज्यादातर मरीज पूरी तरह ठीक हो सकते हैं।
मंकी फीवर का इलाज क्या है?
फिलहाल मंकी फीवर का कोई खास एंटी-वायरल इलाज नहीं है। इलाज में मरीज को सपोर्टिव केयर दी जाती है। इसमें शामिल है
आईवी फ्लूइड देना
खून बहने की स्थिति को नियंत्रित करना
पूरी तरह आराम कराना
प्रोटीन युक्त आहार देना
पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाना
समय पर अस्पताल में भर्ती होना इस बीमारी में सबसे अहम भूमिका निभाता है।
🚨🌎 Monkey Pox - “Around 27,000 people in the Congo have been diagnosed”
— Concerned Citizen (@BGatesIsaPyscho) August 19, 2024
Here the Mpox sufferer on video whose picture is now viral. pic.twitter.com/XZ4l3BqFc0
बचाव ही सबसे बड़ा इलाज है
मंकी फीवर से बचने के लिए जंगलों में जाते समय पूरी सुरक्षा अपनानी चाहिए। पूरी बाजू के कपड़े पहनें, शरीर को ढककर रखें और टिक से बचाव के उपाय करें। बीमार या मरे हुए बंदरों को बिना सुरक्षा के छूने से बचें। अगर बुखार, सिरदर्द या खून बहने जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी तरह के लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से तुरंत सलाह लें।

