ब्रेन फॉग बन सकता है हार्ट डिजीज का शुरुआती संकेत, समय रहते जांच जरूरी

punjabkesari.in Thursday, Jan 22, 2026 - 10:25 AM (IST)

नारी डेस्क: अगर आपको बार-बार ध्यान लगाने में दिक्कत हो रही है, छोटी-छोटी बातें भूलने लगे हैं या दिमाग हर समय भारी और सुस्त सा महसूस होता है, तो इसे सिर्फ तनाव या थकान समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है। डॉक्टरों के अनुसार, कई बार ऐसे लक्षण दिमाग से नहीं बल्कि दिल से जुड़ी समस्या की ओर इशारा करते हैं। अक्सर लोग मानते हैं कि हार्ट डिजीज का मतलब सिर्फ सीने में दर्द या सांस फूलना होता है, लेकिन ऐसा हमेशा जरूरी नहीं है। कई मामलों में दिल की बीमारी बिना किसी साफ लक्षण के भी शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है।

जब दिमाग के लक्षण बताते हैं दिल की हालत

डॉक्टर बताते हैं कि उनके पास कई मरीज ऐसे आते हैं जो याददाश्त कमजोर होने या ब्रेन फॉग की शिकायत करते हैं। उन्हें यह अंदाजा भी नहीं होता कि इसके पीछे दिल की कार्यक्षमता में कमी हो सकती है। रिसर्च से यह बात सामने आई है कि दिमाग की सेहत सीधे तौर पर दिल की सेहत से जुड़ी होती है।

दिमाग की नस फटने से 1 दिन पहले शरीर देता है ये संकेत, लापरवाही सबसे बड़ी गलती

ब्रेन फॉग क्यों बन सकता है हार्ट का संकेत?

एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर दिल ठीक से काम नहीं करता तो दिमाग तक पर्याप्त मात्रा में खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इसका असर सीधे सोचने-समझने की क्षमता, फोकस और मेमोरी पर पड़ता है। कई मरीजों में देखा गया है कि उन्हें न तो सीने में दर्द होता है और न ही सांस फूलती है, लेकिन जांच में ब्लड सर्कुलेशन से जुड़ी समस्या सामने आती है।

ये भी पढ़ें:  ये लक्षण दिखें तो है ब्रेन ट्यूमर का खतरा, भूलकर भी न करें नजरअंदाज

कम ब्लड फ्लो से कमजोर होती है मेमोरी

रिसर्च बताती है कि दिल की कार्यक्षमता में हल्की सी कमी भी दिमाग तक पहुंचने वाले ब्लड फ्लो को घटा सकती है। इससे याददाश्त कमजोर होने लगती है और दिमाग पहले जैसा तेज नहीं रहता। साल 2024 में प्रकाशित एक स्टडी में भी यह पाया गया कि हल्का कार्डियोवैस्कुलर इंपेयरमेंट दिमागी कार्यों को प्रभावित कर सकता है।

PunjabKesari

शुरुआती संकेतों को पहचानना क्यों जरूरी है?

डॉक्टरों का कहना है कि ब्रेन फॉग या मेमोरी लॉस को सिर्फ उम्र बढ़ने या तनाव का असर मानकर टालना खतरनाक हो सकता है। फंक्शनल मेडिसिन का उद्देश्य यही है कि किसी बड़ी बीमारी के रूप में सामने आने से पहले शरीर के छोटे संकेतों को पहचाना जाए।अगर समय रहते इन लक्षणों पर ध्यान दिया जाए और सही जांच करवाई जाए, तो दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है।
  

 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Priya Yadav

Related News

static