खसरे का कहर! 650 बच्चों की मौत,जाने इसके शुरुआती लक्षण

punjabkesari.in Saturday, Jun 06, 2026 - 09:57 AM (IST)

नारी डेस्क: बांग्लादेश इस समय खसरे (Measles) के गंभीर प्रकोप से जूझ रहा है। हालात इतने चिंताजनक हो चुके हैं कि अब तक सैकड़ों बच्चों की जान जा चुकी है और हजारों बच्चे अस्पतालों में भर्ती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है। बांग्लादेश और भारत के बीच लंबी सीमा होने के कारण भारतीयों के मन में भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह संक्रमण भारत तक पहुंच सकता है।

बांग्लादेश में तेजी से फैल रहा है खसरा

इस साल की शुरुआत से ही बांग्लादेश में खसरे के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही थी, लेकिन मार्च 2026 के बाद संक्रमण ने बेहद तेजी से फैलना शुरू कर दिया। बकरीद के बाद लोगों की बड़े पैमाने पर आवाजाही ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। देश के अधिकांश जिलों में संक्रमण फैल चुका है और स्वास्थ्य सेवाओं पर भारी दबाव देखा जा रहा है। अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता भी बढ़ गई है।

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सबसे ज्यादा बच्चे हो रहे हैं प्रभावित

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बड़ी संख्या में बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। सबसे ज्यादा खतरा 5 साल से कम उम्र के बच्चों को बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिन बच्चों को खसरे का टीका नहीं लगा था, उनमें संक्रमण का खतरा और जटिलताएं अधिक देखने को मिली हैं। कम उम्र के बच्चों में यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है और कई मामलों में जानलेवा भी साबित होती है।

क्या है खसरा और कैसे फैलता है

खसरा एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो रुबियोला (Rubeola) वायरस के कारण होती है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान निकलने वाली सूक्ष्म बूंदों के जरिए फैलता है। यदि कोई व्यक्ति इन संक्रमित बूंदों के संपर्क में आता है या संक्रमित सतह को छूने के बाद अपनी आंख, नाक या मुंह को छूता है, तो उसके संक्रमित होने की संभावना बढ़ जाती है। यही वजह है कि खसरा बहुत तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।

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खसरे के शुरुआती लक्षण 

खसरे के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के एक से दो सप्ताह बाद दिखाई देते हैं। शुरुआत में मरीज को तेज बुखार, सूखी खांसी और नाक बहने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा आंखों में लालिमा, पानी आना और मुंह के अंदर छोटे सफेद धब्बे भी दिखाई दे सकते हैं। कुछ दिनों बाद चेहरे और गर्दन से शुरू होकर पूरे शरीर पर लाल चकत्ते या दाने निकलने लगते हैं।

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बांग्लादेश में हालात खराब 

विशेषज्ञों का मानना है कि खसरे के मामलों में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह टीकाकरण में कमी रही है। बड़ी संख्या में बच्चों को समय पर वैक्सीन नहीं लग पाई, जिसके कारण समुदाय में पर्याप्त सामूहिक प्रतिरक्षा (Herd Immunity) विकसित नहीं हो सकी। जब किसी आबादी के अधिकांश लोगों को टीका नहीं मिलता, तो वायरस को फैलने का मौका मिल जाता है और संक्रमण तेजी से फैलता है। यही स्थिति बांग्लादेश में देखने को मिल रही है।

क्या भारत को भी सतर्क रहने की जरूरत है

बांग्लादेश में बढ़ते मामलों को देखते हुए भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जा सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में व्यापक टीकाकरण कार्यक्रमों की वजह से खसरे के खिलाफ मजबूत सामूहिक प्रतिरक्षा मौजूद है। भारत में नियमित टीकाकरण अभियानों के माध्यम से बच्चों को खसरे सहित कई बीमारियों से बचाव के टीके लगाए जाते हैं। इसलिए देशभर में बड़े स्तर पर संक्रमण फैलने की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।

खसरे से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका

खसरे का कोई विशेष इलाज नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे बड़ा हथियार है। बच्चों को समय पर खसरे की वैक्सीन लगवाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही संक्रमण फैलने वाले क्षेत्रों में साफ-सफाई, भीड़भाड़ से बचाव और संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। बांग्लादेश में खसरे का बढ़ता प्रकोप यह याद दिलाता है कि टीकाकरण कितना जरूरी है। माता-पिता को बच्चों के वैक्सीनेशन शेड्यूल का पूरा ध्यान रखना चाहिए। समय पर लगाया गया एक टीका न केवल बच्चे को गंभीर बीमारी से बचा सकता है, बल्कि पूरे समाज को भी सुरक्षित रखने में मदद करता है।

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Content Editor

Priya Yadav

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