ईरान-इजराइल युद्ध के कारण अगले महीने से महंगा आएगा सिलेंडर!
punjabkesari.in Thursday, Mar 05, 2026 - 01:06 PM (IST)
नारी डेस्क: मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच युद्ध की खबरें सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक सीमित नहीं हैं। इस जंग का असर अब सीधे भारत की रसोई और बजट पर पड़ने लगा है। अगर आप सोच रहे हैं कि यह भारत तक कैसे पहुंचेगा, तो जान लें कि LPG और गैस की कीमतें जल्द ही बढ़ सकती हैं। ईरान और अमेरिका-इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने Strait of Hormuz को बंद करने की घोषणा की है। यह सिर्फ समुद्री रास्ता नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा की लाइफलाइन है। भारत अपनी LPG जरूरतों का 80-85 प्रतिशत अरब देशों से मंगवाता है, और यह पूरा माल इसी जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। इसका मतलब साफ है कि अगर सप्लाई रुके, तो देश में गैस की किल्लत और सिलेंडर के दाम में भारी वृद्धि देखी जा सकती है।
कतर ने रोका उत्पादन, संकट और बढ़ा
दुनिया के पांचवें सबसे बड़े LNG उत्पादक देश कतर ने ईरानी ड्रोन हमलों के बाद अपने सबसे बड़े एक्सपोर्ट सेंटर पर उत्पादन रोक दिया है। इसके असर से यूरोप में गैस की कीमतें 50 प्रतिशत तक बढ़ गईं। भारत अपनी 60% LNG जरूरत इसी रास्ते से पूरी करता है, ऐसे में आने वाले समय में चुनौती बढ़ सकती है।

पेट्रोल और डीजल की स्थिति
कच्चे तेल को लेकर फिलहाल भारत में पैनिक जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन खतरा अभी भी बना हुआ है। भारत के पास अभी 70-80 दिनों का तेल रिजर्व मौजूद है। सऊदी अरब से बड़ी मात्रा में तेल खरीदने के बाद, अब भारत रूस और अमेरिका जैसे देशों से आयात बढ़ाने पर विचार कर रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जल्द ही कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के आंकड़े को छू सकता है।
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सरकार का एक्शन मोड
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। सरकार नए विकल्प तलाश रही है ताकि युद्ध लंबा खिंचने पर भी देश की ऊर्जा सप्लाई प्रभावित न हो।
आम आदमी के लिए क्या करें
अफवाहों से बचें: अभी किल्लत शुरू नहीं हुई है, इसलिए पैनिक बुकिंग न करें।
ऊर्जा की बचत: आने वाले समय में दाम बढ़ सकते हैं, इसलिए गैस और ईंधन का समझदारी से इस्तेमाल करें।

अपडेट रहें: वैश्विक घटनाओं पर नजर रखें, क्योंकि मिडिल ईस्ट की हर हलचल आपके बजट से जुड़ी है।
युद्ध सीमाओं पर हो रहा है, लेकिन इसका आर्थिक असर हर घर तक पहुंच सकता है। भारत के लिए एनर्जी आत्मनिर्भरता और नए विकल्पों की तलाश अब अनिवार्य हो गई है। घरेलू गैस और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव से बचने के लिए सरकार और आम आदमी दोनों को सजग रहना होगा।

