ज्यादा गुस्सा करने से भी आ जाता है Heart Attack, सिर्फ 90 सेकंड के चमत्कार से बदलें अपना मूड !
punjabkesari.in Thursday, Jul 09, 2026 - 12:27 PM (IST)
नारी डेस्क: गुस्सा न करें, सेहतमंद रहें। कई रिसर्च से पता चलता है कि जो लोग अक्सर गुस्सा करते हैं और उसे ठीक से संभाल नहीं पाते, उन्हें हार्ट अटैक समेत दिल की बीमारियों का खतरा ज़्यादा होता है। 'यूरोपियन हार्ट जर्नल' में 2014 में हुई एक स्टडी में पाया गया कि गुस्सा फूटने के बाद के दो घंटों में हार्ट अटैक का खतरा लगभग पांच गुना ज्यादा था और स्ट्रोक का खतरा तीन गुना बढ़ गया था। स्टडी से यह भी पता चला कि गुस्सा जितना ज़्यादा तेज या बार-बार आता है, दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा उतना ही ज़्यादा होता है।
इन दोनों के बीच क्या है संबंध
गुस्से से कैटेकोलामाइन (catecholamines) नाम के स्ट्रेस हार्मोन का उत्पादन बढ़ जाता है। ये हार्मोन ब्लड प्रेशर बढ़ाते हैं और धमनियों में रुकावट पैदा करने वाले प्लाक (plaque) के बनने में भूमिका निभाते हैं, जिससे कई सालों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज (coronary artery disease) हो सकती है। डॉक्टर कहते हैं- " गुस्से के दौरान कैटेकोलामाइन (catecholamines) का अचानक बढ़ना हार्ट अटैक, जानलेवा हार्ट रिदम और दिल की मांसपेशियों के तेज़ी से कमजोर होने का कारण बन सकता है इस स्थिति को स्ट्रेस कार्डियोमायोपैथी या 'ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम' कहा जाता है, जो मुख्य रूप से महिलाओं में होता है।"
गुस्से को काबू करने के तरीके
जिस स्थिति से आपको गुस्सा आ रहा हो, उससे थोड़ी देर के लिए अलग हो जाने से आपको उस पर ज़्यादा समझदारी से सोचने में मदद मिल सकती है। 10 तक गिनती करें या वहां से चले जाएँ। यह आसान कदम आपको तुरंत प्रतिक्रिया देने की आदत को तोड़ने में मदद कर सकता है। अग्र्रेसिव (आक्रामक) होने के बजाय असर्टिव (अपनी बात मज़बूती और शांति से कहने वाला) बनें। आप चिल्लाए बिना, उंगली उठाए बिना, धमकी दिए बिना और मुक्का दिखाए बिना भी अपनी बात रख सकते हैं और अपनी भावनाएं बता सकते हैं। भावनाओं का ऐसा बढ़ा-चढ़ाकर इजहार करना अपनी बात कहने या अपनी बात मनवाने के लिए जरूरी नहीं है। इससे सामने वाला व्यक्ति सिर्फ बचाव की मुद्रा में आ जाता है या उसे भी गुस्सा आ जाता है।
रिलैक्सेशन के तरीके सीखें
गुस्से के पल में गहरी सांस लेने जैसे तरीके आपकी मदद कर सकते हैं। आम तौर पर शांत रहने के लिए मेडिटेशन, योग और माइंडफुलनेस ट्रेनिंग भी मददगार हो सकती है। दिल से जुड़े जोखिम के कारकों को कम करें। विटस्टीन कहते हैं कि अगर आपको जल्दी गुस्सा आता है, तो ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल जैसे बड़े जोखिम कारकों को कंट्रोल करने पर काम करना भी अच्छा विचार है। अपने डॉक्टर से बात करें। हाई कोलेस्ट्रॉल जैसे दिल से जुड़े जोखिम कारकों को कंट्रोल करने के अलावा, अगर आपको दिल की बीमारी रही है और गुस्सा कंट्रोल करने में परेशानी होती है, तो कुछ सबूत बताते हैं कि बीटा-ब्लॉकर्स (beta-blockers) हार्ट अटैक के जोखिम को कम कर सकते हैं। आपके डॉक्टर आपको गुस्सा कंट्रोल करने की क्लास या थेरेपी के बारे में भी बता सकते हैं ताकि आप दूसरे तरीके सीख सकें।
नोट: किसी भी मेडिकल कंडीशन का खुद से इलाज करने की बजाय अपने डॉक्टर की सलाह लें।

