जानें कितना Cholesterol लेवल दिल के लिए बन सकता है मुसीबत?
punjabkesari.in Friday, Jul 03, 2026 - 11:38 AM (IST)
नारी डेस्क : कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए जरूरी फैट है, लेकिन जब इसका स्तर सामान्य सीमा से ऊपर पहुंच जाता है, तो यह दिल की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, हाई कोलेस्ट्रॉल अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ता है, इसलिए इसे 'साइलेंट रिस्क फैक्टर' भी कहा जाता है। समय-समय पर लिपिड प्रोफाइल टेस्ट और सही जीवनशैली अपनाकर हार्ट डिजीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
शरीर के लिए क्यों जरूरी है कोलेस्ट्रॉल?
कोलेस्ट्रॉल शरीर की कोशिकाओं के निर्माण, हार्मोन बनाने और विटामिन D के उत्पादन में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन जब इसका स्तर जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है, तो अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल धमनियों की दीवारों पर जमा होने लगता है। इससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है और हार्ट अटैक व स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि डॉक्टर नियमित रूप से लिपिड प्रोफाइल जांच कराने की सलाह देते हैं।

सिर्फ टोटल कोलेस्ट्रॉल नहीं, इन वैल्यू पर भी रखें नजर
कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार, केवल टोटल कोलेस्ट्रॉल देखना पर्याप्त नहीं है। यह समझना भी जरूरी है कि शरीर में LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल), HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल) और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर कितना है।
LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल): धमनियों में फैट जमा करता है और हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ाता है।
HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल): अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को धमनियों से हटाकर दिल की सुरक्षा करने में मदद करता है।
ट्राइग्लिसराइड्स: इसका स्तर बढ़ने पर हृदय रोग का जोखिम और बढ़ सकता है।
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कोलेस्ट्रॉल लेवल कितना होना चाहिए?
कार्डियोलॉजिस्ट के अनुसार स्वस्थ व्यक्ति के लिए सामान्य स्तर इस प्रकार माना जाता है।
टोटल कोलेस्ट्रॉल: 200 mg/dL से कम
LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल): 100 mg/dL से कम
HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल)
पुरुषों में 40 mg/dL या उससे अधिक
महिलाओं में 50 mg/dL या उससे अधिक
ट्राइग्लिसराइड्स: 150 mg/dL से कम
जिन लोगों को पहले से हार्ट डिजीज, डायबिटीज या स्ट्रोक का खतरा है, उनके लिए LDL का लक्ष्य इससे भी कम रखा जा सकता है।

हाई कोलेस्ट्रॉल दिल को कैसे नुकसान पहुंचाता है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, जब LDL और ट्राइग्लिसराइड्स लंबे समय तक बढ़े रहते हैं, तो धमनियों में प्लाक बनने लगता है। इससे धमनियां संकरी हो जाती हैं और हृदय तक पर्याप्त मात्रा में खून नहीं पहुंच पाता। समय के साथ यह स्थिति हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य हृदय संबंधी बीमारियों का कारण बन सकती है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हाई कोलेस्ट्रॉल के शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।
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किन लोगों को ज्यादा खतरा होता है?
इन लोगों में हाई कोलेस्ट्रॉल और हार्ट डिजीज का जोखिम अधिक हो सकता है
डायबिटीज के मरीज
हाई ब्लड प्रेशर वाले लोग
मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति
जिनके परिवार में हार्ट डिजीज की हिस्ट्री हो
धूम्रपान करने वाले लोग
शारीरिक रूप से कम सक्रिय रहने वाले
तला-भुना, जंक और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन करने वाले।

कब डॉक्टर से मिलना चाहिए?
अगर आपकी लिपिड प्रोफाइल रिपोर्ट में LDL या ट्राइग्लिसराइड्स लगातार बढ़े हुए हैं, या आपको सीने में दर्द, सांस फूलना, जल्दी थकान या अन्य हृदय संबंधी लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो तुरंत कार्डियोलॉजिस्ट से सलाह लें। समय पर जांच और सही इलाज से हार्ट डिजीज के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
दिल को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार और सक्रिय जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है। अपनी डाइट में फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, ओट्स, मेवे और हेल्दी फैट वाले खाद्य पदार्थ शामिल करें। वहीं तली-भुनी चीजें, ट्रांस फैट, प्रोसेस्ड फूड, मीठे पेय और अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखें। इसके साथ नियमित व्यायाम, स्वस्थ वजन बनाए रखना और धूम्रपान से दूरी बनाना भी हृदय को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद करता है।

