हाई कोलेस्ट्रॉल से परेशान लोगों के लिए राहत! अब इंजेक्शन नहीं, गोली से होगा इलाज

punjabkesari.in Tuesday, Jul 21, 2026 - 12:29 PM (IST)

 नारी डेस्क: दिल की बीमारियों के सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक हाई LDL यानी 'बैड' कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए अब इलाज का एक नया विकल्प सामने आया है। अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने दुनिया की पहली ओरल PCSK9 इनहिबिटर दवा लिपफेंड्रा (Lipfendra) को मंजूरी दे दी है। अब तक इस श्रेणी की दवाएं केवल इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध थीं, लेकिन अब मरीजों के पास गोली के रूप में भी इलाज का विकल्प होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे खासतौर पर उन मरीजों को राहत मिलेगी, जिन्हें बार-बार इंजेक्शन लगवाने में परेशानी होती है।

क्या होता है हाई कोलेस्ट्रॉल और क्यों है खतरनाक

कोलेस्ट्रॉल शरीर में पाया जाने वाला एक वसायुक्त (फैटी) पदार्थ है, जिसकी सीमित मात्रा शरीर के लिए जरूरी होती है। लेकिन जब LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है, तो यह धीरे-धीरे धमनियों की दीवारों पर जमा होने लगता है। समय के साथ यह जमाव रक्त प्रवाह को बाधित कर सकता है, जिससे हृदय तक ऑक्सीजन युक्त रक्त की आपूर्ति कम होने लगती है। यदि रुकावट गंभीर हो जाए, तो हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी जानलेवा स्थितियां पैदा हो सकती हैं।

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क्या है Lipfendra और कैसे करती है काम

लिपफेंड्रा (Lipfendra) PCSK9 इनहिबिटर वर्ग की पहली ऐसी दवा है, जिसे टैबलेट के रूप में लिया जा सकेगा। यह दवा शरीर में LDL कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करती है। इसे दिन में एक बार लिया जाता है और डॉक्टर इसे आमतौर पर स्वस्थ खानपान, नियमित व्यायाम और पहले से चल रही कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली दवाओं के साथ लेने की सलाह दे सकते हैं। यह दवा विशेष रूप से उन मरीजों के लिए उपयोगी मानी जा रही है, जिनका बैड कोलेस्ट्रॉल सामान्य दवाओं से नियंत्रित नहीं हो पाता या जिन्हें हेटेरोजाइगस फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया (HeFH) जैसी आनुवंशिक बीमारी होती है, जिसमें LDL कोलेस्ट्रॉल असामान्य रूप से बढ़ा रहता है।

क्लीनिकल ट्रायल में मिले उत्साहजनक नतीजे

कंपनी के अनुसार, इस दवा का परीक्षण 3,207 वयस्क मरीजों पर किया गया। ट्रायल में पाया गया कि जब मरीजों ने अपनी मौजूदा दवाओं के साथ लिपफेंड्रा का सेवन किया, तो 24 सप्ताह के भीतर LDL कोलेस्ट्रॉल में 56 से 59 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई। यह प्रभाव इंजेक्शन के रूप में दी जाने वाली PCSK9 दवाओं के बराबर पाया गया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह दवा स्टैटिन जैसी मौजूदा दवाओं का विकल्प नहीं है। इसे मुख्य रूप से उन मरीजों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा, जिनमें अन्य उपचारों के बावजूद कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित नहीं हो पा रहा है।

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इंजेक्शन से बचना चाहते हैं मरीजों के लिए राहत

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. अंबुज रॉय के अनुसार, अब तक PCSK9 इनहिबिटर केवल हर दो या चार सप्ताह में लगने वाले इंजेक्शन के रूप में उपलब्ध थे। नई ओरल दवा उन मरीजों के लिए बेहतर विकल्प बन सकती है, जो इंजेक्शन लेने से बचना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि इस दवा का उपयोग संभवतः चौथी पंक्ति (Fourth-line Therapy) के इलाज के रूप में किया जाएगा। यानी पहले स्टैटिन, फिर एजेटिमाइब और बेम्पेडोइक एसिड जैसी दवाओं से पर्याप्त लाभ नहीं मिलने पर डॉक्टर इस दवा पर विचार कर सकते हैं।

क्या यह दवा पूरी तरह स्टैटिन की जगह ले लेगी

विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल ऐसा नहीं माना जा सकता। स्टैटिन अभी भी हाई कोलेस्ट्रॉल के इलाज की पहली पसंद बनी रहेंगी। साथ ही, अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि लिपफेंड्रा के लंबे समय तक इस्तेमाल से हृदय रोगों और मृत्यु दर पर क्या प्रभाव पड़ेगा। इस पर आगे और शोध की आवश्यकता है।

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भारतीय मरीजों के लिए क्या कहते हैं दिशा-निर्देश

भारतीय कार्डियोलॉजी गाइडलाइंस के अनुसार, जिन लोगों में हृदय रोग का जोखिम अधिक है, उनमें LDL कोलेस्ट्रॉल का स्तर 70 mg/dL से कम रखा जाना चाहिए। वहीं, बहुत अधिक जोखिम वाले मरीजों के लिए यह लक्ष्य 55 mg/dL से भी कम माना जाता है।

भारत में कब तक उपलब्ध हो सकती है यह दवा

हालांकि FDA से मंजूरी मिलने के बाद भी यह दवा तुरंत भारत में उपलब्ध नहीं होगी। किसी भी विदेशी दवा को भारतीय बाजार में आने से पहले केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) से नियामकीय मंजूरी लेनी होती है। जरूरत पड़ने पर भारतीय नियमों के अनुसार अतिरिक्त क्लीनिकल ट्रायल भी कराए जा सकते हैं। इंडियन फार्मास्युटिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सुभाष मंडल के अनुसार, विदेश में मंजूरी मिलने का मतलब यह नहीं है कि दवा भारत में स्वतः उपलब्ध हो जाएगी। सभी कानूनी और नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही इसे बाजार में उतारा जा सकेगा।

क्या मरीज विदेश से यह दवा मंगा सकते हैं

विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य तौर पर कोई भी व्यक्ति अपने परिचितों या रिश्तेदारों के माध्यम से ऐसी दवा सीधे भारत नहीं मंगा सकता। हालांकि कुछ विशेष चिकित्सा परिस्थितियों में मरीज CDSCO के निर्धारित नियमों के तहत सीमित मात्रा में व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयात की अनुमति मांग सकते हैं।
  
 

 


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Content Editor

Priya Yadav

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