बच्चे हफ्ते में सिर्फ 25 मिनट खेल रहे बाहर! जानें क्यों घरों में सिमटता जा रहा बचपन
punjabkesari.in Thursday, Aug 20, 2026 - 07:03 PM (IST)
नारी डेस्क : आज के समय में बच्चों का बचपन पहले की तुलना में तेजी से बदल रहा है। जहां पिछली पीढ़ी के बच्चे घंटों पार्क, मैदान और गलियों में खेलते थे, वहीं अब बच्चे घर के अंदर स्क्रीन के सामने ज्यादा समय बिता रहे हैं। एक हालिया अध्ययन में दावा किया गया है कि कुछ बच्चे पूरे सप्ताह में महज 25 मिनट ही बाहर खेल पा रहे हैं। अध्ययन में यह भी सामने आया कि कई माता-पिता अपने बच्चों को कम उम्र में अकेले बाहर खेलने की अनुमति नहीं देते। इसकी वजह से बच्चों को खुली हवा, शारीरिक गतिविधि और बाहर की दुनिया से मिलने वाले मानसिक जुड़ाव का उतना अनुभव नहीं मिल पा रहा है, जितना पिछली पीढ़ियों को बचपन में मिलता था।
11 साल की उम्र से पहले अकेले बाहर खेलने की अनुमति नहीं
एक्सेटर विश्वविद्यालय से जुड़े विशेषज्ञों के अध्ययन में 5 से 11 वर्ष की उम्र के करीब 2,000 माता-पिता और देखभाल करने वालों को शामिल किया गया। अध्ययन के मुताबिक, करीब 56 फीसदी अभिभावकों ने माना कि वे अपने बच्चों को उस उम्र से काफी देर बाद अकेले बाहर खेलने की अनुमति देते हैं, जिस उम्र में वे खुद बचपन में बाहर खेला करते थे। पिछली पीढ़ी के बच्चे घंटों पार्कों और गलियों में खेलते थे, लेकिन आज के बच्चों के खेलने का समय काफी कम हो गया है। अध्ययन में बाहर खेलने के समय को लेकर सामने आया आंकड़ा इसी बदलाव की ओर इशारा करता है।

बच्चों के बाहर न खेलने की क्या वजह है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चों के घर के अंदर ज्यादा समय बिताने के पीछे कई कारण हैं। इनमें प्रमुख हैं
खेलने के लिए सुरक्षित जगहों की कमी : कई इलाकों में बच्चों के खेलने के लिए पर्याप्त मैदान या सुरक्षित खुले स्थान उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में माता-पिता भी बच्चों को बाहर भेजने में संकोच करते हैं।
पार्कों में कई तरह की पाबंदियां: कुछ पार्कों में घास पर चलने, गेंद खेलने या दूसरे खेलों को लेकर प्रतिबंध लगाए जाते हैं। इससे बच्चों के लिए उपलब्ध खेल गतिविधियां सीमित हो जाती हैं।
स्मार्टफोन और वीडियो गेम का बढ़ता इस्तेमाल: मोबाइल फोन, टीवी, टैबलेट और वीडियो गेम बच्चों के खाली समय का बड़ा हिस्सा ले रहे हैं। स्क्रीन पर मनोरंजन आसानी से उपलब्ध होने के कारण बच्चे बाहर जाकर खेलने की बजाय घर में रहना पसंद करने लगते हैं।
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बाहर खेलना बच्चों के लिए क्यों जरूरी है?
विशेषज्ञों के अनुसार, आउटडोर प्ले बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। बाहर खेलने से बच्चों को दौड़ने, कूदने और सक्रिय रहने का मौका मिलता है, जिससे उनकी शारीरिक फिटनेस बेहतर हो सकती है। इसके अलावा, पार्क या मैदान में दूसरे बच्चों के साथ खेलने से उनमें सामाजिक कौशल, बातचीत, सहयोग और समस्या सुलझाने की क्षमता विकसित होने में मदद मिल सकती है। खुले वातावरण में समय बिताना मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि और बाहर खेलना तनाव और बेचैनी को कम करने में मदद कर सकता है।

माता-पिता बच्चों को आउटडोर प्ले के लिए कैसे प्रोत्साहित करें?
बच्चों को बाहर खेलने के लिए मजबूर करने के बजाय इसे उनकी रोजमर्रा की दिनचर्या का मजेदार हिस्सा बनाया जा सकता है।
रोजाना कुछ समय आउटडोर खेल के लिए तय करें।
संभव हो तो बच्चों के साथ पार्क या मैदान में जाएं।
उम्र के हिसाब से सुरक्षित खेल चुनें।
खेलने के समय मोबाइल और दूसरे स्क्रीन डिवाइस से दूरी रखें।
बच्चों को क्रिकेट, फुटबॉल, साइकिलिंग, दौड़ या दूसरे सक्रिय खेलों के लिए प्रोत्साहित करें।
आसपास सुरक्षित जगह उपलब्ध हो तो बच्चों को उनकी उम्र और परिस्थिति के अनुसार स्वतंत्र रूप से खेलने का अवसर दें।
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स्क्रीन टाइम और आउटडोर प्ले के बीच बनाएं संतुलन
आज के डिजिटल दौर में बच्चों को पूरी तरह स्क्रीन से दूर रखना हमेशा संभव नहीं है। हालांकि, यह जरूरी है कि स्क्रीन टाइम और फिजिकल एक्टिविटी के बीच संतुलन बना रहे। बच्चों के लिए बाहर खेलना सिर्फ मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह उनके शारीरिक विकास, सामाजिक अनुभव और मानसिक स्वास्थ्य का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए माता-पिता और स्कूलों को मिलकर बच्चों के लिए सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध खेल के स्थान और समय सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए। बचपन सिर्फ स्क्रीन पर बिताने के लिए नहीं है। मैदान, पार्क और खुली हवा भी बच्चों के स्वस्थ विकास का अहम हिस्सा हैं।

