जानें कब है हनुमान जन्मोत्सव और कैसे पड़ा बजरंगबली का नाम हनुमान
punjabkesari.in Thursday, Nov 05, 2026 - 06:16 PM (IST)
नारी डेस्क : सात नवंबर, शनिवार की रात अयोध्या की प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी में भगवान हनुमान का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। बजरंगबली के जन्म से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं। हनुमान चालीसा में भी उनके बाल रूप का वर्णन मिलता है, जब उन्होंने सूर्य को मीठा फल समझकर उसे निगलने के लिए आकाश में छलांग लगा दी थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस घटना के बाद इंद्रदेव ने बाल हनुमान पर अपना वज्र चला दिया था, जिससे उनकी ठोड़ी पर चोट लगी और इसी वजह से उनका नाम हनुमान पड़ा? रामायण के प्रसंगों में इस कथा का विस्तार से वर्णन मिलता है। आइए जानते हैं बजरंगबली के जन्म और उनके नाम से जुड़ी यह रोचक कथा।
अप्सरा पुंजिकस्थला कैसे बनीं माता अंजना?
कथा के अनुसार, पुंजिकस्थला नाम की एक श्रेष्ठ अप्सरा को शाप के कारण वानरी रूप में जन्म लेना पड़ा। वे आगे चलकर वानरराज केसरी की पत्नी अंजना कहलाईं। एक बार माता अंजना मनुष्य रूप धारण करके पर्वत की चोटी पर विचरण कर रही थीं। उसी समय वायु देव ने उन्हें देखा और वरदान दिया कि उनका पुत्र अत्यंत बलशाली, बुद्धिमान और वेगवान होगा। उसकी छलांग लगाने की शक्ति वायु देव के समान होगी।

कैसे हुआ बाल हनुमान का जन्म?
कुछ समय बाद एक गुफा में माता अंजना के घर बाल हनुमान का जन्म हुआ। एक दिन उन्होंने आकाश में चमकते हुए सूर्य को देखा। उन्हें सूर्य लाल रंग का मीठा फल दिखाई दिया। उसे पाने की इच्छा में बाल हनुमान ने आकाश की ओर लंबी छलांग लगा दी और सूर्य की तरफ तेजी से बढ़ने लगे। कथा के अनुसार, अपने पुत्र को सूर्य की तेज गर्मी से बचाने के लिए वायु देव भी उनके साथ आकाश में चले गए। उन्होंने अपने शीतल स्पर्श से बाल हनुमान को सूर्य के ताप से बचाया। सूर्य देव ने भी यह समझकर उन पर अपनी तेज किरणों का प्रभाव नहीं पड़ने दिया कि वे एक मासूम बालक हैं और उन्हें अपनी शक्ति का ज्ञान नहीं है।
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इंद्रदेव ने बाल हनुमान पर क्यों चलाया वज्र?
इसी दौरान इंद्रदेव ने बाल हनुमान को सूर्य की ओर बढ़ते देखा। उन्हें रोकने के लिए इंद्रदेव ने अपने वज्र से प्रहार कर दिया। वज्र लगते ही बाल हनुमान पर्वत की चोटी पर गिर पड़े और उनकी ठोड़ी यानी हनु पर चोट लग गई। इसी घटना के बाद उनका नाम 'हनुमान' पड़ा, ऐसी मान्यता प्रचलित है। अपने पुत्र को घायल देखकर वायु देव अत्यंत क्रोधित हो गए। उन्होंने तीनों लोकों में वायु का संचार रोक दिया। सांस लेने में परेशानी होने से देवता, मनुष्य और सभी जीव व्याकुल हो उठे। तब ब्रह्मा जी अन्य देवताओं के साथ वहां पहुंचे। उन्होंने बाल हनुमान को स्पर्श किया, जिसके बाद वे फिर से स्वस्थ और जीवित हो उठे। यह देखकर सभी देवताओं ने राहत की सांस ली।

देवताओं ने बाल हनुमान को दिए कई वरदान
बाल हनुमान के ठीक होने पर देवताओं ने उन्हें अनेक वरदान दिए। ब्रह्मा जी ने वरदान दिया कि युद्ध में कोई भी अस्त्र-शस्त्र उनका वध नहीं कर सकेगा। अन्य देवताओं ने भी उन्हें अपार बल, बुद्धि, साहस और दिव्य शक्तियों का आशीर्वाद दिया। एक वरदान के अनुसार, बाल हनुमान अपनी शक्तियों को कुछ समय के लिए भूल जाएंगे और जब कोई उन्हें उनके बल और पराक्रम का स्मरण कराएगा, तब उन्हें अपनी शक्ति का एहसास होगा।
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जामवंत जी ने समुद्र किनारे दिलाया शक्तियों का एहसास
बाद में जब माता सीता की खोज में निकली वानर सेना समुद्र के किनारे पहुंची, तो विशाल समुद्र को देखकर सभी निराश हो गए। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि इसे पार करके लंका कैसे पहुंचा जाए। उस समय जामवंत जी ने शांत बैठे हनुमान जी को उनकी असली शक्ति का स्मरण कराया। उन्होंने हनुमान जी को बताया कि वे वानरराज केसरी के पुत्र और वायु देव के समान पराक्रमी हैं। जामवंत जी के प्रेरणादायक शब्द सुनकर हनुमान जी को अपनी शक्तियों का एहसास हुआ। उन्होंने विशाल रूप धारण किया और समुद्र लांघकर माता सीता की खोज में लंका जाने का संकल्प लिया। इस तरह जामवंत जी के स्मरण कराने पर बजरंगबली ने अपनी अद्भुत शक्ति पहचानी और असंभव दिखने वाले कार्य को संभव कर दिखाया। यही कथा हमें सिखाती है कि कभी-कभी अपनी क्षमता पहचानने के लिए सही मार्गदर्शन और आत्मविश्वास की जरूरत होती है।

