छोटी दिवाली पर क्यों की जाती है हनुमान जी की पूजा? जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यताएं
punjabkesari.in Tuesday, Nov 03, 2026 - 10:28 AM (IST)
नारी डेस्क: दिवाली का त्योहार आते ही घरों में साफ-सफाई, सजावट और पूजा-पाठ की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। धनतेरस से शुरू होने वाला पांच दिनों का यह पर्व छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी के साथ आगे बढ़ता है। इस दिन जहां घरों में दीपक जलाने और यमराज की पूजा करने का विधान है, वहीं कई जगहों पर भगवान हनुमान की विशेष पूजा-अर्चना भी की जाती है। यही वजह है कि छोटी दिवाली को हनुमान पूजा के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि दिवाली से ठीक एक दिन पहले बजरंगबली की पूजा क्यों की जाती है? इसके पीछे कई धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। आइए जानते हैं छोटी दिवाली पर हनुमान जी की पूजा का महत्व और इससे जुड़ी खास बातें।
कब है दिवाली 2026
द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में दिवाली का त्योहार 8 नवंबर को मनाया जाएगा। पांच दिनों तक चलने वाले इस पर्व की शुरुआत 6 नवंबर को धनतेरस के साथ होगी। इसके बाद 7 नवंबर को छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी और हनुमान पूजा का पर्व मनाया जाएगा। 8 नवंबर को दीपावली का मुख्य त्योहार होगा। इसके बाद 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा और 11 नवंबर को भाई दूज मनाई जाएगी।

छोटी दिवाली पर क्यों की जाती है हनुमान जी की पूजा
छोटी दिवाली के दिन हनुमान जी की पूजा करने के पीछे अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। भक्तों का मानना है कि इस दिन बजरंगबली की पूजा करने से जीवन के डर, परेशानियों और नकारात्मकता से छुटकारा मिलता है। आइए जानते हैं इसके पीछे की प्रमुख मान्यताओं के बारे में।
नकारात्मक शक्तियों से मिलती है मुक्ति
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी दिवाली को काली चौदस भी कहा जाता है। इस दिन नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव दूर करने के लिए विशेष पूजा-पाठ किया जाता है। भगवान हनुमान को संकटमोचन और बुरी शक्तियों का नाश करने वाला माना जाता है। मान्यता है कि बजरंगबली की सच्चे मन से पूजा करने पर व्यक्ति को भय, बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है। यही कारण है कि छोटी दिवाली पर हनुमान जी के मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
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कुछ जगहों पर मनाया जाता है हनुमान जन्मोत्सव
आमतौर पर हनुमान जन्मोत्सव चैत्र महीने की पूर्णिमा को मनाया जाता है। लेकिन देश के कुछ हिस्सों में छोटी दिवाली के दिन भी हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है। गुजरात और अयोध्या के प्रसिद्ध हनुमानगढ़ी मंदिर में इस दिन को विशेष रूप से हनुमान जी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। इसी मान्यता के चलते छोटी दिवाली पर बजरंगबली की पूजा का खास महत्व माना जाता है।

भगवान श्रीराम ने दिया था हनुमान जी को विशेष वरदान
हनुमान जी की पूजा से जुड़ी एक पौराणिक मान्यता भगवान श्रीराम से भी जुड़ी है। कथा के अनुसार, जब भगवान श्रीराम 14 वर्षों का वनवास पूरा करके और रावण का वध करने के बाद माता सीता तथा लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे, तो पूरी नगरी में खुशी का माहौल था। उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उत्सव मनाया। इसी खुशी में दीपावली मनाने की परंपरा शुरू हुई। कहा जाता है कि भगवान श्रीराम हनुमान जी की निष्ठा, भक्ति और समर्पण से बेहद प्रसन्न थे। हनुमान जी ने हर मुश्किल समय में प्रभु श्रीराम का साथ दिया था। उनकी इसी भक्ति से प्रसन्न होकर श्रीराम ने उन्हें विशेष वरदान दिया कि जहां भी उनकी पूजा होगी, वहां हनुमान जी का स्मरण और पूजन भी किया जाएगा। इसी मान्यता के चलते दिवाली के आसपास हनुमान जी की पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है।
छोटी दिवाली पर हनुमान जी की पूजा का क्या है महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी दिवाली पर हनुमान जी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मकता आती है। बजरंगबली को संकटों को दूर करने वाला देवता माना जाता है। इसलिए भक्त इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करते हैं तथा हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर सुख-शांति की कामना करते हैं।

