साइबर अपराधियों के निशाने पर भारतीय, देश में हुए 26.5 करोड़ से अधिक साइबर हमले

punjabkesari.in Thursday, Aug 13, 2026 - 11:26 AM (IST)

नारी डेस्क: भारत का तेजी से बढ़ता डिजिटल इकोसिस्टम साइबर खतरों की बढ़ती हुई जटिल लहर का सामना कर रहा है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, मूल्यांकन अवधि के दौरान भारत में 26.5 करोड़ से अधिक साइबर हमले के प्रयास और 36.9 करोड़ मैलवेयर का पता चला है। भारतीय साइबर सुरक्षा कंपनी लिज़ियान्थस टेक द्वारा जारी की गई 'साइबर शिक्षित भारत: साइबर-प्रतिरोधी भारत का निर्माण' शीर्षक वाली यह रिपोर्ट देश में विकसित हो रहे साइबर खतरों के परिदृश्य की चिंताजनक तस्वीर पेश करती है और भारत के डिजिटल परिवर्तन की गति बढ़ने के साथ-साथ व्यवसायों, नागरिकों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और सरकारी प्रणालियों के सामने बढ़ते जोखिमों को उजागर करती है।


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4 साल में 52 लाख से ज्यादा हुए साइबर हमले

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (सीईआरटी-इन) को 2022 से जून 2026 तक केंद्र और राज्य सरकारों से जुड़ी कुल 52.68 लाख से अधिक साइबर हमलों की जानकारी मिली। ये हमले पैसे और डाटा चोरी, फिरौती मांगने, जासूसी, सिस्टम को ठप करने और देश के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने को किए जा रहे हैं। वर्ष 2022 में 1.92 लाख हमले हुए थे, जो 2025 में 18.21 लाख तक पहुंच गए हैं। वहीं 2026 में जून तक 10.75 लाख घटनाएं दर्ज की गई। एआई और साइबर विशेषज्ञ बताते हैं कि सुरक्षा आकलनों के अनुसार भारत के विरुद्ध राज्य समर्थित गतिविधियों में से 60 प्रतिशत से अधिक साइबर हमले चीन और पाकिस्तान की तरफ से किए जाते हैं।


तेज से बढ़े रैंसमवेयर हमले 

साइबल रिसर्च एंड इंटेलिजेंस लैब्स (CRIL) की रिपोर्ट में बताया गया है कि जनवरी, 2026 और जून, 2026 के बीच भारत में 77 रैंसमवेयर हमले हुए, इसी वजह से भारत पूरी दुनिया में हैकर्स के निशाने पर आने वाला 9वां सबसे बड़ा देश बन गया। रिपोर्ट में संकेत दिए गए हैं कि खतरों बढ़ रहे और ज्यादा जटिल होते जा रहे हैं। जिसमें सरकार से जुड़े हैकिंग ग्रुप्स अहम भूमिका निभा रहे हैं। बता दें कि रैंसमवेयर एक खतरनाक कंप्यूटर वायरस या सॉफ्टवेयर होता है, जिसे हैकर्स आपके कंप्यूटर, मोबाइल या पूरे नेटवर्क में चुपके से इंस्टॉल करा देते हैं।
 

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प्रभावित हो रहा कामकाज

साइबर हमलों से देश की अर्थव्यवस्था से लेकर वित्तीय संस्थानों को नुकसान होता है। इसमें काफी हमले ऐसे होते हैं, जिनका पता नहीं लग पाता है।  वर्ष 2024 में देश के करीब 300 छोटे (सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण) बैंकों पर एक बड़ा रैनसमवेयर साइबर हमला हुआ, जिससे बैंकों का डिजिटल और पेमेंट कामकाज लगभग 48 से 72 घंटे तक ठप रहा था। बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के लिए सीएसआईआरटी-फिन प्रतिक्रिया दल का गठन किया। देशभर में साइबर हमलों से बचाव के लिए एकीकृत और समन्वित व्यवस्था बनाने की योजना के तहत राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा समन्वयक (एनसीएससी) अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल सुनिश्चित करता है।
 


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vasudha

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