भगत सिंह से जुड़ा है हुसैनीवाला का गहरा नाता, एक गांव के बदले पाकिस्तान को दिए थे 12 गांव
punjabkesari.in Monday, Sep 28, 2026 - 01:28 PM (IST)
नारी डेस्क : पंजाब का हुसैनीवाला गांव भारत के इतिहास में एक खास जगह रखता है। फिरोजपुर के पास सतलुज नदी के किनारे स्थित इस जगह का संबंध शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु से है। यही वह स्थान है जहां 23 मार्च 1931 को तीनों क्रांतिकारियों के शवों का गुप्त रूप से अंतिम संस्कार किया गया था। आज यहां राष्ट्रीय शहीद स्मारक बना हुआ है और हर साल 23 मार्च को शहीदों की याद में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
12 गांव देकर हुसैनीवाला को वापस लिया
1947 के विभाजन के बाद हुसैनीवाला क्षेत्र पाकिस्तान के हिस्से में चला गया था। लेकिन शहीदों की समाधियों और उनके ऐतिहासिक महत्व के कारण यह जगह भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी। उपलब्ध सरकारी और ऐतिहासिक विवरणों के मुताबिक, 1962 में भारत ने फाजिल्का के सुलेमांकी हेडवर्क्स के पास के 12 गांव पाकिस्तान को देकर हुसैनीवाला क्षेत्र वापस लिया। इसलिए यह कहना अधिक सही होगा कि यह आदान-प्रदान 1947 में नहीं, बल्कि 1962 में हुआ था। हुसैनीवाला आज भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित है।

भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु से क्या है संबंध?
भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को 23 मार्च 1931 को लाहौर सेंट्रल जेल में फांसी दी गई थी। इसके बाद ब्रिटिश अधिकारियों ने उनके शवों को रात के समय हुसैनीवाला के पास सतलुज नदी के किनारे ले जाकर अंतिम संस्कार करने की कोशिश की। स्थानीय लोगों को इसकी जानकारी मिल गई और वे वहां पहुंच गए। इसके बाद ब्रिटिश अधिकारी वहां से चले गए और स्थानीय लोगों ने शहीदों के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की। यही स्थान आगे चलकर शहीदों की स्मृति से जुड़ गया।

आज भी हर साल जुटते हैं लोग
हुसैनीवाला में आज National Martyrs Memorial मौजूद है, जहां भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की स्मृति में श्रद्धांजलि दी जाती है। यहां 23 मार्च को शहीदी मेला भी आयोजित होता है। स्मारक भारत-पाकिस्तान सीमा के बेहद करीब है और यहां से पाकिस्तान की ओर स्थित गंडा सिंह वाला क्षेत्र भी नजर आता है। हुसैनीवाला में केवल भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की यादें ही नहीं जुड़ी हैं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े बटुकेश्वर दत्त और भगत सिंह की मां विद्यावती की स्मृति भी इस स्थान से जुड़ी हुई है। यही वजह है कि यह गांव पंजाब ही नहीं, बल्कि देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में भी विशेष महत्व रखता है।

