कैंसर की दवाओं को 70% तक सस्ती करने की तैयारी, हर साल मरीजों को होगी 2,500 करोड़ रुपये की बचत

punjabkesari.in Friday, Oct 09, 2026 - 02:22 PM (IST)

नारी डेस्क: सरकार ने नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं की सप्लाई और बिक्री पर लगने वाले मार्जिन (मुनाफ़े) पर सीमा तय करने को मंजूरी दे दी है। ये मार्जिन अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के 30% तक सीमित होंगे। इस कदम से दवाओं की कीमतों में 70% तक की कमी आने और कैंसर के मरीज़ों को सालाना ₹2,500 करोड़ बचाने में मदद मिलने की उम्मीद है, जिससे उनकी जेब से होने वाला खर्च काफी कम हो जाएगा।
 

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कीमतों को लेकर सरकार सख्त

एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार शेड्यूल्ड लिस्ट में शामिल ज़रूरी कैंसर दवाओं पर पहले से ही सरकार द्वारा तय सख्त अधिकतम कीमतें लागू हैं। नया फ़ैसला नॉन-शेड्यूल्ड कैंसर दवाओं (जो उस लिस्ट से बाहर हैं) पर भी कीमत सुरक्षा लागू करता है, इसके तहत मरीज़ों तक पहुंचने से पहले जोड़े जाने वाले मार्जिन को सीमित किया जाएगा। इस बीच, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ हेल्थ सर्विसेज़ (DGHS) के तहत एक एक्सपर्ट कमेटी उन दवाओं की लिस्ट को अंतिम रूप देगी जिन्हें इसमें शामिल किया जाएगा। इसके बाद नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) फ़ैसला लेगी और नोटिफिकेशन जारी करेगी।


भारत में कैंसर का इलाज है महंगा

भारत में कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, यहां प्रति लाख आबादी में लगभग 60 लोग कैंसर से प्रभावित हैं। इलाज का मरीज़ों और उनके परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है, जिन्हें अक्सर अपनी जेब से बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है। NPPA के मार्केट डेटा के विश्लेषण से पता चला है कि नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं पर औसतन लगभग 170% का प्राइस मार्क-अप (कीमत में बढ़ोतरी) होता है, जो कुछ मामलों में 700% या उससे ज़्यादा तक पहुंच जाता है। आसान शब्दों में, मरीज़ तक पहुंचने से पहले सप्लाई चेन से गुज़रते हुए दवा की कीमत तेज़ी से बढ़ती है। दवा की कीमत इस बात पर भी काफी निर्भर करती है कि उसे रिटेल फ़ार्मेसी, हॉस्पिटल फ़ार्मेसी या ऑनलाइन फ़ार्मेसी से खरीदा गया है। महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक जैसे राज्यों के अधिकारियों के साथ-साथ मरीज़ों और सिविल सोसाइटी ने भी दवाओं की बहुत ज़्यादा कीमतों को लेकर गंभीर चिंता जताई है।

मुनाफ़ाखोरी पर लगेगी रोक 

 इन चिंताओं को सार्वजनिक मंचों पर भी उठाया गया है, खासकर बिक्री के लिए खरीदी गई दवाओं की कीमत और ग्राहकों से ली जाने वाली MRP के बीच बड़े अंतर को लेकर। इतने ज़्यादा मार्जिन, खासकर कैंसर की महंगी दवाओं पर, मरीज़ों के इलाज का खर्च काफी बढ़ा देते हैं। नई सीमा (कैप) से बहुत ज़्यादा मुनाफ़ाखोरी पर रोक लगेगी, बाज़ार में गलत कीमत तय करने के तरीकों को ठीक किया जा सकेगा और मरीज़ों के लिए सही कीमत सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। सरकार के पिछले कदम से पता चलता है कि इन मार्जिन को सीमित करने से मरीज़ों को कितनी बड़ी राहत मिल सकती है है।
 

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ग्राहकों को मिलेगी राहत

इससे पहले फरवरी 2019 में, सरकार के निर्देश पर, NPPA ने ड्रग्स (प्राइसेस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013 के पैराग्राफ 19 के तहत 42 चुनिंदा नॉन-शेड्यूल्ड एंटी-कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन की सीमा तय की थी। उस फैसले से MRP में 91% तक की कमी आई थी, जिससे 526 ब्रांडों में सालाना ₹984 करोड़ की बचत हुई थी। इससे कैंसर के मरीज़ों पर आर्थिक बोझ काफी कम हुआ और उनके जीवन में आसानी आई। उस अनुभव के आधार पर और सप्लाई चेन में पहचानी गई कीमत संबंधी समस्याओं को दूर करते हुए, सरकार ने अब व्यापक सीमा को मंज़ूरी दी है। सालाना ₹2,500 करोड़ की अनुमानित बचत से कैंसर का इलाज करा रहे मरीज़ों को और राहत मिलेगी।  इससे मरीज़ों को कम कीमतों का काफी फ़ायदा मिलेगा और साथ ही उन्हें ज़रूरी दवाएं लगातार मिलती रहेंगी।
 


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vasudha

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