Inspiring: अनाथ बच्चों की ''गीतू मां'', 12 साल से कर रहीं 28 कैंसर पेशेंट की सेवा

8/13/2020 1:23:16 PM

मां एकमात्र ऐसी इंसान है जो अपने बच्चों के लिए हर मुसीबत से टक्कर ले लेती है। एक ऐसी ही उदाहरण पेश की है गीता श्रीधर ने। प्राइमरी स्कूल में बतौर टीचर काम करने वाली गीता श्रीधर ने अपनी जिंदगी लोगों की सेवा में न्योछावर कर दी। मुंबई में रहने वाली गीता बच्चों को पढ़ाती थी लेकिन इस दौरान गीता के पिता की तबीयत बिगड़ने लगी और उनका काफी समय अपने पिता की देखभाल में ही बीता लेकिन बीमारी के कारण पिता की मौत हो गई। 

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पिता की मौत के बाद गीता लोगों की सेवा में लग गई और एक डॉक्टर के साथ पुणे के एक अनाथ आश्रम में गईं। गीता श्रीधर ने वहां कैंसर से जूझ रहे बच्चों की सेवा करने की सोची। इन बच्चों के बेहतर इलाज के लिए आर्थिक सहायता की तो जरूरत थी ही लेकिन इससे ज्यादा सही देखभाल की जरूरत थी। इसी कारण से गीता ने इन बच्चों की देखभाल करने की सोची और वह अपने साथ 28 बच्चों को लेकर मुंबई गईं और एक फ्लैट में बच्चों को ठहराया। 

मां की तरह रखती हैं बच्चों का ख्याल

कैंसर से पीड़ित होने के कारण बच्चों को तेज और हैवी डोज मिलती हैं वहीं साथ ही बच्चों को कीमोथेरेपी भी चलती है। जिन 28 बच्चों को आश्रम से गीता अपने साथ लेकर आई उनकी देखभाल के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। गीता ने इन बच्चों को मां से भी बढ़कर प्यार दिया इतना ही नहीं गीता ने इनके इलाज के लिए अपनी सारी जमा पूंजी  इलाज के लिए लगा दी। वहीं इस ऐसे कठिन समय में गीता के कईं दोस्त भी मदद के लिए आगे आए।

24 घंटे करती है देखभाल 

इतना ही नहीं गीता 24 घंटे इन बच्चों की पूरी देखभाल का इंतजाम करती हैं ताकि उन्हें किसी भी चीज की कमी न हो वहीं गीता खुद बच्चों को रोज मिलने भी जाती है और उनके साथ बहुत सी एक्टिविटीज भी करती हैं। 

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गीता से बनी 'गीतू मां' 

गीता ने इन बच्चों का हर मुश्किल में साथ दिया और गीता की वजह से इन बच्चों को कभी मां के प्यार की कमी महसूस न हुई और इसी वजह से गीता श्रीधर उन बच्चों के लिए मां बन गई और आज वही बच्चे उन्हें गीतू मां के नाम से पुकारते हैं। 

12 साल से कर रही सेवा 

गीता इन बच्चों की सेवा पिछले कुछ दिनों या महीनों से नहीं कर रही बल्कि उन्हें 12 साल हो गए हैं बच्चों की सेवा करते हुए। 

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कैंसर पेशेंट्स के लिए खाने का करती हैं प्रबंध 

इतना ही नहीं गीता इसके साथ कईं सोशल वर्क भी करती हैं और वह टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के कैंसर पेशेंट्स के लिए खाने का पूरा इंतजाम करती हैं। 

रह चुकी हैं मास्टर शेफ का हिस्सा 

गीता श्रीधर एक अच्छी कुक हैं। इसी वजह से उन्होंने मास्टर शेफ में भी हिस्सा लिया। इतना ही नहीं वह एक फूड बैंक भी चलाती हैं और इसके अंतर्गत वे हर संडे को गरीबों को खाना खिलाती हैं।

परिवार का मिला सपोर्ट

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गीता श्रीधर के अनुसार एक महिला के लिए यह सारे काम एक साथ संभालना आसान नहीं हैं लेकिन उनके परिवार वालों ने उन्हें कभी नहीं रोका और हमेशा उनका हर मोड़ पर साथ दिया। 

हम गीता श्रीधर के इस ज्जबे को सलाम करते हैं। 


Edited By

Janvi Bithal

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