आंख फड़कना शुभ और अशुभ नहीं ये है इस बीमारियों का Warning Sign
punjabkesari.in Monday, Jan 12, 2026 - 07:41 PM (IST)
नारी डेस्क: आंख फड़कने काे अकसर लोग शुभ और अशुभ संकेत मान बैठते हैं। आंखों का फड़कना हमेशा शुभ या मामूली नहीं होता। कई बार यह शरीर की तरफ से दिया गया अलार्म होता है। अगर यह बार-बार हो रहा है या लंबे समय तक बना रहता है, तो इसे गलती से भी इग्नोर नहीं करना चाहिए। समय रहते कारण पहचान लिया जाए, तो बड़ी बीमारी से बचा जा सकता है।
आंखों का फड़कना क्या है?
आंखों की पलक का बिना कंट्रोल के बार-बार हिलना या कांपना आई ट्विचिंग (Eye Twitching) कहलाता है। यह कुछ सेकंड से लेकर कई दिनों तक रह सकता है।
इन घातक बीमारियों का संकेत हो सकता है
नर्व से जुड़ी समस्या: लगातार आंख फड़कना फेशियल नर्व डिसऑर्डर या नर्व डैमेज का संकेत हो सकता है। गंभीर मामलों में यह बेल्स पाल्सी या न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जुड़ा हो सकता है।
ब्रेन से जुड़ी बीमारी: अगर आंख फड़कने के साथ चेहरे का एक हिस्सा सुन्न हो, बोलने में दिक्कत सिरदर्द या चक्कर आए तो यह ब्रेन स्ट्रोक या ब्रेन ट्यूमरका शुरुआती संकेत भी हो सकता है।
आंखों की गंभीर समस्या: ड्राई आई, आंखों में इंफेक्शन, कॉर्निया डैमेज या ग्लूकोमा जैसी बीमारियों में भी आंखों का फड़कना देखा जाता है।
विटामिन और मिनरल की कमी: शरीर में मैग्नीशियम, पोटैशियम या विटामिन B12 की कमी होने पर नसों पर असर पड़ता है, जिससे आंख फड़कने लगती है।
ज्यादा स्ट्रेस और नींद की कमी: लगातार तनाव, एंग्जायटी और नींद पूरी न होना नर्वस सिस्टम को कमजोर करता है। यह भी आंख फड़कने का बड़ा कारण है।
ज्यादा कैफीन और स्क्रीन टाइम: जरूरत से ज्यादा चाय-कॉफी पीना और घंटों मोबाइल-लैपटॉप देखना आंखों की मांसपेशियों को थका देता है, जिससे फड़कन शुरू हो जाती है।
कब तुरंत डॉक्टर को दिखाएं?
अगर आंखों का फड़कन हफ्तों तक रहे,आंख बंद होने लगे, चेहरे की मांसपेशियां भी हिलें, नजर धुंधली हो, दर्द या सूजन हो तो बिना देर किए आई स्पेशलिस्ट या न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें। इसके लिए बेहजर है कि पूरी नींद लें, स्क्रीन टाइम कम करें, आंखों को बार-बार आराम दें, कैफीन कम करें, हेल्दी डाइट लें (हरी सब्जियां, ड्राई फ्रूट्स)। जरूरत हो तो डॉक्टर से सप्लीमेंट लें।

