संगीत जगत को बड़ा झटका, मशहूर लोक गायिका तीजन बाई का लंबी बीमारी के बाद निधन
punjabkesari.in Sunday, Jul 05, 2026 - 11:58 AM (IST)
नारी डेस्क: छत्तीसगढ़ की लोक कला और पंडवानी गायन को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाने वाली प्रख्यात लोक गायिका तीजन बाई का निधन हो गया। उन्होंने 70 वर्ष की उम्र में रायपुर स्थित एम्स (AIIMS) में अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही कला और संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उनके प्रशंसकों, कलाकारों और सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
लंबे समय से थीं अस्वस्थ
परिजनों और सूत्रों के अनुसार, तीजन बाई पिछले काफी समय से बीमार चल रही थीं और उनका इलाज रायपुर के एम्स में चल रहा था। डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी था, लेकिन स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका। सोमवार तड़के करीब 3:15 बजे उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली। तीजन बाई ने अपनी अद्भुत गायकी और दमदार प्रस्तुति से छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक कला पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। उनकी प्रस्तुतियों ने देश ही नहीं, विदेशों में भी भारतीय लोक संस्कृति का परचम लहराया। अपनी विशिष्ट शैली और प्रभावशाली आवाज के दम पर उन्होंने लाखों लोगों को लोक संगीत से जोड़ा।
महज 13 साल की उम्र में शुरू हुआ था सफर
तीजन बाई का जन्म छत्तीसगढ़ के भिलाई के निकट गनियारी गांव में हुआ था। बताया जाता है कि उन्होंने महज 13 वर्ष की उम्र में पहली बार सार्वजनिक मंच पर पंडवानी गायन किया था। उस प्रस्तुति के लिए उन्हें 10 रुपये का पारिश्रमिक मिला था। उस दौर में यह राशि उनके लिए सम्मान और प्रोत्साहन दोनों का प्रतीक थी। यहीं से शुरू हुआ उनका सफर आगे चलकर देश और दुनिया तक पहुंचा।
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परंपराओं को तोड़कर बनाई अपनी अलग पहचान
उस समय पंडवानी गायन में महिलाओं के लिए केवल बैठकर वेदामति शैली में प्रस्तुति देने की परंपरा थी। लेकिन तीजन बाई ने इस परंपरा को चुनौती दी और खड़े होकर कापालिक शैली में पंडवानी प्रस्तुत करना शुरू किया। उनकी ऊर्जावान प्रस्तुति, अभिनय और सशक्त आवाज ने इस लोक कला को एक नया आयाम दिया। यही उनकी सबसे बड़ी पहचान बनी और उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए नई राह तैयार की।
देश के सर्वोच्च सम्मानों से हुईं सम्मानित
भारतीय लोक कला में उनके असाधारण योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा। वर्ष 1988 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। इसके बाद वर्ष 2003 में पद्म भूषण और वर्ष 2019 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत किया गया। इसके अलावा उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कई अन्य पुरस्कार और सम्मान भी प्राप्त हुए, जिन्होंने उनके योगदान को नई पहचान दी। तीजन बाई का निधन भारतीय लोक संगीत और सांस्कृतिक जगत के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है। उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय लोक कला के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में समर्पित किया। उनकी गायकी, मंच प्रस्तुति और कला के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे। भले ही वह आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज और उनकी कला हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगी।

