छोटी उम्र में हो रही रसौलियां, इसके लक्षणों को शुरुआत में ही पकड़ लें महिलाएं

punjabkesari.in Tuesday, May 19, 2026 - 08:07 PM (IST)

नारी डेस्कः कुछ समस्याएं ऐसी हैं जो सिर्फ महिलाओं को हो सकती है जैसे यूट्रस में रसौली होना। रसौली जिसे आम भाषा में गर्भाश्य की गांठे या Uterine Fibroids भी कहा जाता है। ये कैंसर नहीं होता लेकिन इसके चलते महिलाओं को सेहत संबंधी अन्य कई परेशानियां होने लगती है। पीरियड्स के दौरान ज्यादा दर्द, ओवर ब्लीडिंग, पेट फूलना जैसी कई समस्याएं शुरू हो सकती है। पहले रसौली की समस्या 30 से 50 वर्ष की महिलाओं को होती थी लेकिन आजकल रसौली की समस्य कम उम्र में भी होने लगी है। 20 से लेकर 30 साल की महिलाएं भी इसकी शिकार हो रही है जिसका कोई एक कारण नहीं हो सकता ब्लकि बिगड़ी जीवनशैली और स्वास्थ्य संबंधी कारण मिलकर इसके जोखिम को बढ़ाते हैं।

रसौली की शिकायत सबसे ज्यादा कब होती है?

आमतौर पर 30–50 वर्ष की उम्र में अधिक देखी जाती है। खासकर 40 के आसपास इसका खतरा बढ़ जाता है। माहवारी शुरू होने के बाद और रजोनिवृत्ति (menopause) से पहले तक इसका होना ज्यादा आम है। रजोनिवृत्ति के बाद अक्सर ये छोटी होने लगती हैं क्योंकि शरीर में हार्मोन कम हो जाते हैं।
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रसौली होने के शुरुआती व आम लक्षण

माहवारी में बहुत ज्यादा रक्तस्राव।
पेट या कमर में दर्द।
पेट भारी या फूला लगना।
बार-बार या थोड़ा थोड़ा यूरिन आना।
कमजोरी या खून की कमी।
गर्भधारण करने में दिक्कत।

अब जानते हैं रसौली होने के मुख्य कारण

रसौली होने का मुख्यतः कई कारण हो सकते है लेकिन ज्यादातर जो वजह रसौली होने की बताई जाती है वो इस तरह है ...

हार्मोनल बैलेंस खराब होना

कम उम्र में ही पीरियड्स जल्दी शुरू होना (early puberty)
PCOS, थायरॉयड या हार्मोन गड़बड़ी।
लंबे समय तक एस्ट्रोजन हार्मोन बढ़ा रहना।
Fibroids की वृद्धि अक्सर एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन से जुड़ी होती है।
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मोटापा और फिजिकल एक्टिविटी ना करना

वजन बढ़ने से शरीर में एस्ट्रोजन ज्यादा बन सकता है। घंटों बैठकर काम, कम एक्सरसाइज और खराब नींद हार्मोन संतुलन बिगाड़ सकते हैं। इसके चलते भी महिलाओं को गांठों की समस्या हो सकती है। 

खान-पान में बदलाव

ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड, चीनी और रैड मीड खाने से और भोजन में 
फल, हरी सब्जियाँ और फाइबर की कमी होने से।

Vitamin D की कमी

अगर शरीर में विटामिन डी की कमी हो तो इसके चलते यूट्रस में असर दिखता है। सूजन (inflammation) और हार्मोन सिस्टम पर पड़ता है।

तनाव (Stress)

लगातार मानसिक तनाव शरीर के हार्मोन और menstrual cycle को प्रभावित कर सकता है। 

गर्भधारण करने में देरी

पहले महिलाओं में कम उम्र में pregnancy हो जाती थी और बच्चों की संख्या भी ज्यादा होती थी। शादी और pregnancy देर से होती है, बच्चे कम होते हैं,
जिससे लंबे समय तक मासिक चक्र चलते रहते हैं और हार्मोन exposure बढ़ सकता है।

परिवार में इतिहास (Genetics)

यदि परिवार में मां या बहन को fibroids रहे हो तो कम उम्र में होने की संभावना बढ़ जाती है लेकिन यह भी याद रखें कि हर रसौली खतरनाक नहीं होती। कई छोटी fibroids बिना इलाज के भी सालों तक स्थिर रहती हैं। लेकिन अगर बहुत ज्यादा bleeding, दर्द, कमजोरी, infertility,या पेट बढ़ना जैसी समस्या हो तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच जरूरी होती है।

नोटः एक फेक्टर ये भी है कि अब महिलाएं इस ओर सजग है। पहले कई महिलाओं को पता ही नहीं चलता था लेकिन अब Ultrasound आसानी से उपलब्ध है, लोग जल्दी जांच करा लेते हैं जिससे जल्दी पता चल जाता है इसलिए कम उम्र में diagnosis ज्यादा दिख रहा है।


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Content Writer

Vandana

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