Fatty Liver को न समझें मामूली बीमारी, समय रहते नहीं संभले तो हो सकता है कैंसर
punjabkesari.in Tuesday, Jun 09, 2026 - 11:41 AM (IST)
नारी डेस्क: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, गलत खानपान और बढ़ते तनाव के बीच फैटी लिवर एक ऐसी समस्या बनकर उभर रही है, जो चुपचाप शरीर को नुकसान पहुंचा रही है। पहले इसे एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या माना जाता था, लेकिन अब डॉक्टर चेतावनी दे रहे हैं कि इसे नजरअंदाज करना गंभीर परिणामों का कारण बन सकता है। कई मामलों में यही समस्या आगे चलकर लिवर सिरोसिस, लिवर फेलियर और यहां तक कि लिवर कैंसर तक का रूप ले सकती है।
बढ़ रहे हैं फैटी लिवर के मामले
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में तेजी से बढ़ता मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, जंक फूड का बढ़ता चलन, शारीरिक गतिविधियों की कमी और खराब नींद की आदतें फैटी लिवर के प्रमुख कारण बन रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह बीमारी शुरुआती चरण में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाती, इसलिए ज्यादातर लोग इसके बारे में तब जान पाते हैं जब जांच के दौरान अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में इसका जिक्र आता है।

लिवर पर जमा होने लगता है अतिरिक्त फैट
फैटी लिवर तब विकसित होता है जब लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा वसा जमा होने लगती है। लिवर शरीर का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है, जो भोजन को ऊर्जा में बदलने, शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालने और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने का काम करता है। जब इस अंग में फैट जमा होने लगता है, तो इसके कामकाज पर असर पड़ना शुरू हो जाता है, जिसका प्रभाव पूरे शरीर की सेहत पर पड़ सकता है।
शहरी भारत में हर तीसरा व्यक्ति प्रभावित
एक रिसर्च के अनुसार, शहरी भारत में लगभग हर तीन में से एक व्यक्ति किसी न किसी स्तर पर फैटी लिवर की समस्या से जूझ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ सकती है, क्योंकि मोटापा और डायबिटीज के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि डॉक्टर अब इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती मान रहे हैं।

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क्या वजन घटाकर फैटी लिवर ठीक किया जा सकता है
इस सवाल का जवाब काफी हद तक "हां" है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी किस स्टेज में है। विशेषज्ञों का कहना है कि लिवर में खुद को रिपेयर करने की अद्भुत क्षमता होती है। अगर फैटी लिवर शुरुआती चरण में है और स्थायी नुकसान नहीं हुआ है, तो वजन कम करके इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। अध्ययनों में पाया गया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने कुल वजन का केवल 5 प्रतिशत भी कम कर ले, तो लिवर में जमा अतिरिक्त फैट कम होने लगता है। वहीं 7 से 10 प्रतिशत तक वजन कम करने पर लिवर की सूजन में भी सुधार देखा गया है। कुछ मामलों में शुरुआती फाइब्रोसिस की स्थिति भी बेहतर हो सकती है।

जल्दबाजी में वजन घटाना भी हो सकता है नुकसानदायक
डॉक्टर क्रैश डाइट या तेजी से वजन कम करने वाले तरीकों से बचने की सलाह देते हैं। स्वस्थ तरीके से वजन कम करना ही सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है। इसके लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है।
फैटी लिवर को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि फैटी लिवर का समय पर इलाज और नियंत्रण नहीं किया जाए, तो यह धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकता है। शुरुआत में साधारण फैट जमा होने की समस्या आगे चलकर लिवर में सूजन, फाइब्रोसिस, सिरोसिस और लिवर फेलियर का कारण बन सकती है। कुछ मरीजों में यह लिवर कैंसर तक का रूप ले सकता है। कई बार मरीज तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, जब स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी होती है कि लिवर ट्रांसप्लांट के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता।
किन बातों का रखें विशेष ध्यान
फैटी लिवर से बचाव के लिए रोजाना कम से कम 30 मिनट शारीरिक गतिविधि करें, प्रोसेस्ड और तली-भुनी चीजों का सेवन कम करें, पर्याप्त पानी पिएं, तनाव को नियंत्रित रखें और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराते रहें। अगर आपकी रिपोर्ट में फैटी लिवर का जिक्र आया है, तो उसे हल्के में लेने की गलती बिल्कुल न करें। फैटी लिवर एक ऐसी बीमारी है जिसे शुरुआती अवस्था में रोका और सुधारा जा सकता है, लेकिन लापरवाही इसे गंभीर और जानलेवा बना सकती है। इसलिए समय रहते सावधानी बरतना ही सबसे बड़ा इलाज है।

