नेपाल बाढ़ का सच आया सामने! भूकंप नहीं, ग्लेशियर के ढहने से मची तबाही

punjabkesari.in Thursday, Aug 27, 2026 - 01:11 PM (IST)

नारी डेस्क : नेपाल-चीन सीमा के पास आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। अब तक कम से कम 165 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। सड़कें, पुल, घर और दूसरी अहम संरचनाएं बाढ़ और मलबे की चपेट में आकर तबाह हो गई हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। शुरुआती रिपोर्टों में इस आपदा को भूकंप से जोड़कर देखा गया था, लेकिन बाद में सैटेलाइट तस्वीरों और वैज्ञानिक विश्लेषण से सामने आया कि ग्लेशियर का एक बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे गिरा, जिसके बाद बर्फ, चट्टानों और मलबे का विशाल बहाव नदी में पहुंचा। इसी घटनाक्रम ने कुछ ही समय में विनाशकारी बाढ़ का रूप ले लिया।

5200 मीटर की ऊंचाई से 1200 मीटर नीचे गिरा ग्लेशियर

विशेषज्ञों के शुरुआती विश्लेषण के मुताबिक लैंगटांग क्षेत्र में करीब 5200 मीटर की ऊंचाई पर ग्लेशियर का निचला हिस्सा टूट गया और लगभग 1200 मीटर नीचे घाटी में जा गिरा। इस दौरान बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा नीचे आया। ग्लेशियर से आया यह मलबा ल्हेंडे नदी के प्रवाह में जमा हो गया और कुछ समय के लिए नदी का रास्ता अवरुद्ध हो गया। इससे एक अस्थायी प्राकृतिक बांध जैसा बन गया। जब यह अवरोध टूटा तो पानी, बर्फ, चट्टान और कीचड़ का तेज बहाव नदी के साथ नीचे की ओर दौड़ पड़ा।

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ल्हेंडे से भोटेकोशी और फिर त्रिशूली तक पहुंचा पानी

इस घटना का असर सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं रहा। मलबे और पानी का तेज बहाव ल्हेंडे नदी से भोटेकोशी नदी में पहुंचा और फिर आगे जाकर त्रिशूली नदी तक पहुंच गया। इसके बाद निचले इलाकों में अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई। रिपोर्टों के मुताबिक कुछ स्थानों पर नदी का जलस्तर बेहद कम समय में कई मीटर तक बढ़ गया। तेज बहाव अपने साथ भारी मात्रा में मिट्टी, चट्टान और मलबा लेकर आया, जिससे रास्ते में आने वाले घर, पुल और सड़कें बुरी तरह प्रभावित हुईं।

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क्या भूकंप की वजह से टूटा ग्लेशियर?

आपदा के शुरुआती घंटों में क्षेत्र में दर्ज एक भूकंपीय गतिविधि को बाढ़ की वजह माना गया था। लेकिन बाद के विश्लेषण में तस्वीर बदल गई। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के आकलन के मुताबिक दर्ज किया गया भूकंपीय संकेत खुद ग्लेशियर/भूस्खलन की घटना से पैदा हुआ हो सकता है, न कि जरूरी तौर पर किसी अलग भूकंप से। हालांकि, इस घटना की पूरी वैज्ञानिक वजह को लेकर जांच अभी जारी है। चीन की ओर से भी अलग दावा सामने आया है। चीन के नेपाल स्थित दूतावास ने कहा है कि नेपाली पक्ष में भूकंप या भूकंप जैसी ग्लेशियर घटना के बाद हिमस्खलन और भूस्खलन हुआ, जिससे सीमा के दोनों ओर नुकसान हुआ। इसलिए फिलहाल यह कहना ज्यादा सही होगा कि बाढ़ का तत्काल ट्रिगर ग्लेशियर से जुड़ा बर्फ-चट्टान भूस्खलन और उसके बाद बना मलबे का तेज बहाव था, जबकि इसे शुरू करने वाले सटीक कारणों की जांच अभी चल रही है।

सैटेलाइट तस्वीरों ने खोला तबाही का राज

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने Planet Labs की सैटेलाइट तस्वीरों के शुरुआती विश्लेषण का हवाला देते हुए बताया कि नेपाल-चीन सीमा पर रसुवागढ़ी बॉर्डर क्रॉसिंग से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में बर्फ और चट्टानों के खिसकने के बाद ल्हेंडे नदी में ग्लेशियर से जुड़ी बाढ़ आई। सैटेलाइट तस्वीरों में घटना से पहले और बाद के हालात की तुलना से पता चला कि ग्लेशियर और चट्टानों के बड़े पैमाने पर खिसकने के बाद नदी में मलबा जमा हुआ और फिर पानी का तेज बहाव नीचे की ओर बढ़ा।

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क्यों इतनी तेजी से बढ़ा बाढ़ का खतरा?

ग्लेशियर का हिस्सा टूटने के बाद बड़ी मात्रा में बर्फ और चट्टान घाटी में गिरी। इससे नदी का रास्ता कुछ समय के लिए बाधित हुआ और पानी जमा होने लगा। जब यह प्राकृतिक अवरोध टूटा, तो जमा पानी और मलबा एक साथ बेहद तेज रफ्तार से नीचे की ओर बहा। इसी वजह से लोगों को संभलने या सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का ज्यादा समय नहीं मिला। पहाड़ी इलाकों में नदी का बहाव पहले से तेज होने के कारण इस तरह की फ्लैश फ्लड बेहद विनाशकारी साबित हो सकती है।

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राहत और बचाव अभियान जारी

इस भीषण आपदा के बाद नेपाल और चीन दोनों ओर राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है। कई इलाकों में सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। हेलीकॉप्टरों और अन्य माध्यमों से लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की जा रही है।


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Monika

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