नेपाल में बाढ़ के बाद अब Dead Bodies के लिए हो रही लड़ाई, एक शव पर तीन परिवारों ने किया दावा

punjabkesari.in Tuesday, Sep 01, 2026 - 04:44 PM (IST)

नारी डेस्क: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद लापता लोगों की तलाश के बीच पोखरा के एक सरकारी अस्पताल में रखे शव नंबर 1003 की पहचान को लेकर तीन परिवार असमंजस में हैं। तीनों परिवारों का दावा है कि शव उनके उस परिजन का है, जो बाढ़ के बाद से लापता है। एक परिवार ने उसे बर्दिया के जलविद्युत परियोजना कर्मी गोपाल दहित का शव बताया है, जबकि दूसरे का कहना है कि वह रूपनदेही के पर्यटक गाइड दामोदर बस्याल का शव है। रविवार को एक तीसरे परिवार ने भी इस शव पर दावा किया था, लेकिन बाद में वह पीछे हट गया।

PunjabKesari
डीएनए जांच से खुलेगा राज

 'नेपाल न्यूज' ने सोमवार को खबर में बताया कि दहित और बस्याल के परिवारों के बीच शव की पहचान को लेकर अब भी विवाद बना हुआ है। मामले का निपटारा अब डीएनए जांच से होगा। यह मामला उस मुश्किल को सामने लाता है, जिसका सामना बाढ़ में लापता लोगों के परिवार और अधिकारी कर रहे हैं। बाढ़ में बहकर दूर-दराज के इलाकों में पहुंचे शवों को अस्पतालों में लाया जा रहा है, जहां तस्वीरों, शारीरिक बनावट और मृतकों के पास मिली निजी वस्तुओं के आधार पर उनकी पहचान करने की कोशिश की जा रही है। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के कारण सैकड़ों लोगों की जान चली गई। पोखरा स्थित पोखरा 'एकेडमी ऑफ हेल्थ साइंसेज' में रखा शव नंबर 1003 भी इन्हीं मृतकों में से एक है। अब उसकी शिनाख्त के लिए डीएनए जांच कराई जाएगी। 


कई शवों की हुई पहचान

 खबर के अनुसार, पोखरा में लापता लोगों के परिजन अस्पताल पहुंचकर अज्ञात शवों की तस्वीरें देख रहे हैं।  गोरखा, तनहूं, धादिंग और नवलपरासी पूर्व जिलों से मिले 102 शवों को पोखरा लाया गया है। पोखरा राजधानी काठमांडू से करीब 280 किलोमीटर दूर है। सोमवार तक इनमें से 16 शवों की शिनाख्त हो चुकी थी और उन्हें उनके परिजनों को सौंप दिया गया, जबकि 87 शवों का पोस्टमार्टम जलविद्युत परियोजना में काम करने के लिए रसुवा गए गोपाल के बाढ़ के बाद लापता होने के उपरांत दहित परिवार ने उसकी तलाश शुरू की।उनकी बहन मांजी थारू और परिवार के अन्य सदस्य बर्दिया से गैंडाकोट पहुंचे। वहां उन्हें बरामद शवों की तस्वीरें दिखाई गईं और उन्होंने शव नंबर 1003 की पहचान गोपाल के रूप में की। इसके बाद परिवार गोपाल के शव को घर ले जाने के लिए पोखरा पहुंचा। लेकिन इससे पहले कि वे शव ले जा पाते, बस्याल के परिजन भी वहां पहुंच गए और उन्होंने दावा किया कि यह उनके परिवार के सदस्य का शव है। 

PunjabKesari
डीएनए के नतीजे आने में लगेगा डेढ़ महीना

अखबार के अनुसार, बस्याल के परिवार का कहना था कि शव की कई शारीरिक विशेषताएं उनके लापता परिजन से मेल खाती हैं। वहीं, दहित परिवार ने कहा कि शव के दांत, माथा, होंठ, हाथ, छाती और चेहरे की बनावट गोपाल की शारीरिक विशेषताओं से मेल खाती है। दोनों परिवार इस पर सहमत हुए कि विवाद सुलझाने के लिए डीएनए जांच जरूरी है। बड़ी संख्या में नमूनों की जांच के कारण परिणाम आने में एक से डेढ़ महीने तक लग सकते हैं। ऐसा ही एक मामला एक पांच वर्षीय बच्चे की पहचान से जुड़ा है। 'काठमांडू पोस्ट' की खबर में बताया गया कि नुवाकोट जिले के बिदुर निवासी राज कुमार तामांग ने नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर बरामद शवों की तस्वीरें देखकर अपने बेटे प्रिंस की पहचान उसके स्कूल की टाई, गले के हार और कान की बाली से की। प्रिंस स्कूल की वर्दी में घर से निकला था और त्रिशूली नदी में बाढ़ आने के बाद लापता हो गया था। उसका शव नवलपरासी जिले में नारायणी नदी से बरामद हुआ, जो बाढ़ प्रभावित क्षेत्र से काफी दूर नीचे की ओर स्थित है।  खबर के अनुसार, उसकी टाई पर बिदुर के उत्तरगया माध्यमिक विद्यालय का नाम लिखा था, जहां प्रिंस केजी का छात्र था।


बुरी तरह सड़ गए हैं शव

बरामद सैकड़ों शवों में से सोमवार तक केवल कुछ ही की पहचान हो सकी थी। अधिकारियों का कहना है कि लंबे समय तक बाढ़ के पानी में पड़े रहने के कारण कई शव बुरी तरह सड़ गए हैं, क्षत-विक्षत हो गए हैं या उनकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो गया है। काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में सोमवार तक 94 शव लाए गए, जिनमें से केवल नौ की पहचान हो सकी है और उन्हें परिजनों को सौंपा गया है। चितवन जिले में 272 शव बरामद किए गए। 'रेडियो नेपाल' की खबर में सोमवार को बताया गया कि इनमें से केवल 12 की पहचान हो सकी है। अधिकारियों ने डीएनए नमूने और पहचान से जुड़ी अन्य जानकारियां सुरक्षित रखने के बाद 199 अज्ञात शवों को दफना दिया था। 
 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

vasudha

Related News

static