प्रेगनेंसी के शुरुआती दिनों में इंफेक्शन से बढ़ सकता है बच्चे में ऑटिज्म!

punjabkesari.in Thursday, Apr 02, 2026 - 12:34 PM (IST)

नारी डेस्क:  प्रेगनेंसी महिलाओं के जीवन का सबसे संवेदनशील समय होता है। इस दौरान मां का स्वास्थ्य सीधे बच्चे के विकास को प्रभावित करता है। हाल के अध्ययनों और एक्सपर्ट्स की राय के अनुसार, प्रेगनेंसी के शुरुआती महीनों में अगर महिला को इंफेक्शन होता है, तो यह बच्चे में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के जोखिम को बढ़ा सकता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।

 ऑटिज्म और न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर

ऑटिज्म एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जो बच्चे के दिमाग के विकास, सामाजिक जुड़ाव, सीखने और बोलने की क्षमता को प्रभावित करता है। ऑटिज्म के लक्षण आमतौर पर जीवन के पहले 2–3 साल में दिखाई देने लगते हैं। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि ऑटिज्म का कोई एक कारण नहीं है, बल्कि यह जेनेटिक और एनवायरनमेंटल फैक्टर्स के मेल से होता है।

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 शुरुआती प्रेगनेंसी में इंफेक्शन का असर

गर्भावस्था के पहले तीन महीनों में भ्रूण का मस्तिष्क सबसे तेजी से विकसित होता है। इस दौरान अगर मां को कोई इंफेक्शन होता है, जैसे कि वायरल इंफेक्शन (जुकाम, फ्लू, टोक्सोप्लाज्मोसिस), बैक्टीरियल इंफेक्शन या यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI), तो इससे बच्चे के मस्तिष्क के विकास पर असर पड़ सकता है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि इंफेक्शन के दौरान मां के शरीर में बनने वाले इम्यून रिस्पॉन्स और सूजन (inflammation) से भ्रूण के न्यूरॉन्स के निर्माण में गड़बड़ी आ सकती है। कुछ स्टडीज़ में पाया गया है कि गर्भावस्था में फ्लू या अन्य वायरल इंफेक्शन के कारण बच्चे में ऑटिज्म का जोखिम थोड़ा बढ़ सकता है।

 कौन से इंफेक्शन ज्यादा रिस्क बढ़ाते हैं

फ्लू और रेस्पिरेटरी इंफेक्शन – शुरुआती महीनों में फ्लू होने पर कुछ बच्चों में न्यूरोडेवलपमेंटल समस्या का खतरा बढ़ सकता है।

टोप्लाज्मोसिस – यह एक परजीवी संक्रमण है, जो कच्चे मांस या संक्रमित बिल्ली के मल से फैल सकता है।

साइटोमेगालोवायरस (CMV) और रेडियोवायरस – ये वायरल इंफेक्शन भी भ्रूण के मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकते हैं।

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हालांकि, एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि हर इंफेक्शन का मतलब ऑटिज्म नहीं होता। जोखिम बढ़ सकता है, लेकिन यह निश्चित नहीं है।

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 एक्सपर्ट की सलाह

टीकाकरण और वैक्सीनेशन – प्रेग्नेंसी से पहले फ्लू और अन्य जरूरी वैक्सीन्स लगवाना मददगार होता है।

संतुलित आहार और सप्लीमेंट्स – फोलिक एसिड, आयरन और विटामिन सप्लीमेंट्स बच्चे के न्यूरल ट्यूब और मस्तिष्क के विकास में मदद करते हैं।

इंफेक्शन से बचाव – हाथ धोना, साफ-सफाई रखना और बीमार लोगों से दूरी बनाना।

डॉक्टर की सलाह पर दवा लेना – प्रेग्नेंसी के दौरान किसी भी दवा का सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए।

सक्रिय मॉनिटरिंग – अगर कोई इंफेक्शन हो जाए तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना और जरूरी टेस्ट करवाना।

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प्रेगनेंसी के शुरुआती महीनों में इंफेक्शन से बच्चे में ऑटिज्म का खतरा थोड़ा बढ़ सकता है, लेकिन यह निश्चित नहीं है। सही समय पर सावधानी, टीकाकरण, संतुलित आहार और डॉक्टर की निगरानी से इस जोखिम को काफी कम किया जा सकता है। माता-पिता की जागरूकता और समय पर हस्तक्षेप बच्चे के सुरक्षित और स्वस्थ विकास में बहुत मदद करता है।
 


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Content Editor

Priya Yadav

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