भारत में बच्चों को कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा, 10 में से लगभग 7 मामले यहां होते हैं दर्ज
punjabkesari.in Thursday, Jul 30, 2026 - 11:05 AM (IST)
नारी डेस्क: कई दशकों से बच्चों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं दुनिया भर में सबसे ज़्यादा नजरअंदाज की जाने वाली चुनौतियों में से एक रही हैं। बड़ों में होने वाली बीमारियों के उलट, बच्चों में होने वाला कैंसर न तो जीवनशैली से जुड़ा होता है और न ही उम्र बढ़ने से। अगर इसका पता जल्दी चल जाए, तो इसका इलाज बहुत अच्छे से हो सकता है। दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के आठ देशों में बच्चों में होने वाले कैंसर के 10 में से लगभग 7 मामले (70 फीसदी) भारत में दर्ज किए जाते हैं। 'द लैंसेट रीजनल हेल्थ–साउथईस्ट एशिया' में छपी एक नई स्टडी में भारत में बच्चों के कैंसर से जुड़ी भारी असमानताओं पर रोशनी डाली गई है।

14 साल से कम उम्र के बच्चे कैंसर की चपेट में
रिसर्च करने वालों ने पाया कि 2022 में दक्षिण एशिया में 14 साल तक की उम्र के लगभग 37,700 बच्चों में कैंसर का पता चला, जबकि 17,700 बच्चों की इस बीमारी से मौत हो गई। इनमें से भारत में अनुमानित 25,939 मामले सामने आए, जो SAARC क्षेत्र के कुल मामलों का 68% है। हालांकि इसका एक बड़ा कारण भारत की बच्चों की बड़ी आबादी हो सकती है, लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि देश में बीमारी का असल बोझ अनुमानों से भी ज़्यादा हो सकता है, क्योंकि कैंसर के अधूरे रजिस्ट्रेशन के कारण बीमारी का सही दायरा पता नहीं चल पाता है।
कैंसर का मुख्य कारण
भारत में बच्चों में कैंसर के मामले अधिक दिखने के पीछे सबसे बड़ा कारण देश की विशाल जनसांख्यिकी है। इसके अलावा, पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य सुविधाओं और जांच तकनीकों में सुधार के कारण अब ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में भी कैंसर की सटीक पहचान पहले से बेहतर हो रही है। जैविक रूप से देखा जाए तो बच्चों में होने वाला सबसे आम कैंसर ल्यूकेमिया (ब्लड कैंसर) मुख्य रूप से प्राकृतिक जीन म्यूटेशन और आनुवंशिक कारणों से होता है, जो किसी भी आबादी में स्वाभाविक रूप से हो सकता है। भारत में मामलों के मुकाबले मौतों का कारण प्रदूषण और खतरनाक रसायनों का प्रभाव है। अगर सही समय पर चल जाए तो इसका इलाज काफी हद तक संभव है, लेकिन भारत में कई बाधाएं इसके आड़े आती हैं, जैसे- ग्रामीण क्षेत्रों में कैंसर के इलाज की सुविधा न होना बड़ी समस्या है। परिवारों को दूर-दराज के शहरों में जाना पड़ता है। दवाओं और यात्रा के खर्च के कारण लोग कर्ज के बोझ में दब जाते हैं।

हजारों बच्चों की कैंसर से हो हुई मौत
2022 में 0 से 14 साल की उम्र के बच्चों में कैंसर के लगभग 37,700 नए मामले सामने आए और 17,700 बच्चों की मौत हुई।दक्षिण एशिया में दुनिया के लगभग एक-चौथाई बच्चे रहते हैं, फिर भी दुनिया भर में बच्चों में होने वाले कैंसर के अनुमानित मामलों में से केवल 15% मामले यहीं पाए जाते हैं। इससे यह संकेत नहीं मिलता कि बीमारी का वास्तविक बोझ कम है, बल्कि यह कई देशों में बीमारी का पता न चल पाने (अंडर-डायग्नोसिस), कैंसर के मामलों का अधूरा रजिस्ट्रेशन और जांच की सीमित क्षमता को दर्शाता है।

