बच्चों को कभी-कभी बोर होने दीजिए, ही समय उन्हें बनाता है सबसे अलग- नोवाक जोकोविच
punjabkesari.in Tuesday, Jul 28, 2026 - 12:02 PM (IST)
नारी डेस्क: आज के दौर में यदि कोई बच्चा यह कह दे कि "मैं बोर हो रहा हूं", तो अधिकांश घरों में उसका समाधान मोबाइल, टैबलेट या टीवी की स्क्रीन बन जाता है। लेकिन दुनिया के महानतम टेनिस खिलाड़ियों में शुमार नोवाक जोकोविच का मानना है कि यही आदत बच्चों की कल्पनाशक्ति, स्वतंत्र सोच और रचनात्मक विकास को सबसे अधिक प्रभावित कर रही है। उनका कहना है कि बच्चों को हर समय व्यस्त रखने के बजाय उन्हें कभी-कभी बोर होने देना चाहिए, क्योंकि यही समय उनके मानसिक विकास के लिए सबसे अधिक उपयोगी साबित होता है।
बेटे की एक बात से समझाया बड़ा जीवन-पाठ
हाल ही में 'ऑन पर्पस' पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान जोकोविच ने अपने परिवार का एक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि एक दिन उनके 10 वर्षीय बेटे ने उनसे कहा कि वह बोर हो रहा है। सामान्य तौर पर जहां अधिकांश अभिभावक ऐसे समय बच्चों के हाथ में मोबाइल या कोई डिजिटल डिवाइस थमा देते हैं, वहीं जोकोविच ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने बेटे से कहा कि "कभी-कभी बोर होना भी जरूरी होता है।" जोकोविच के मुताबिक, बोरियत कोई नकारात्मक स्थिति नहीं है, बल्कि यह वह समय होता है जब दिमाग नए विचारों पर काम करता है। उन्होंने इसे दिमाग की "वर्कशॉप" बताया, जहां कल्पनाएं जन्म लेती हैं और नई सोच विकसित होती है।

खाली समय से विकसित होती है रचनात्मक सोच
जोकोविच का मानना है कि जब बच्चों के हर खाली पल को मोबाइल, वीडियो या गेम से भर दिया जाता है, तब उन्हें अपने विचारों के साथ अकेले रहने का अवसर नहीं मिल पाता। यही कारण है कि उनकी कल्पनाशक्ति और समस्याओं को स्वयं हल करने की क्षमता धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। उनके अनुसार, जब बच्चे बिना किसी स्क्रीन के कुछ समय अकेले बिताते हैं, तब वे अपने नए खेल खुद बनाते हैं, नई कहानियां सोचते हैं, अलग-अलग कल्पनाएं करते हैं और छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान अपने तरीके से खोजने का प्रयास करते हैं। यही प्रक्रिया आगे चलकर रचनात्मकता, आत्मनिर्भर सोच और बेहतर निर्णय लेने की क्षमता की मजबूत नींव रखती है।
भारतीय विशेषज्ञ भी दे रहे हैं यही सलाह
जोकोविच की यह सोच भारत के बाल रोग विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों की सलाह से भी मेल खाती है। विशेषज्ञ लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। उनके अनुसार अत्यधिक मोबाइल और डिजिटल उपकरणों का उपयोग बच्चों की भाषा सीखने की क्षमता, एकाग्रता, नींद की गुणवत्ता, भावनात्मक संतुलन और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित करता है। लंबे समय तक स्क्रीन के संपर्क में रहने वाले बच्चों में वास्तविक दुनिया के अनुभवों की कमी भी देखने को मिलती है।
ये भी पढ़ें: बच्चा हर वक्त मांगता है मोबाइल? इन आसान तरीकों से धीरे-धीरे कम करें स्क्रीन टाइम की आदत
विशेषज्ञों का कहना है कि बचपन में सबसे प्रभावी सीख आमने-सामने की बातचीत, परिवार के साथ समय बिताने, खुले मैदान में खेलने, प्रकृति के बीच रहने और वास्तविक जीवन के अनुभवों से मिलती है। यही अनुभव बच्चों को अपने विचार व्यवस्थित करने, कल्पनाशक्ति विकसित करने और स्वयं के साथ सहज रहना सिखाते हैं। परिणामस्वरूप उनमें आत्मविश्वास, धैर्य और सही समय पर सही निर्णय लेने जैसी महत्वपूर्ण जीवन-कौशल मजबूत होती हैं।

सैम ऑल्टमैन ने भी साझा किया अपना अनुभव
सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि बड़े लोगों के लिए भी सोशल मीडिया का आकर्षण कितना प्रभावशाली हो सकता है, इसका उदाहरण ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैम ऑल्टमैन ने भी दिया है। ऑल्टमैन ने स्वीकार किया कि जब उनकी कंपनी एआई वीडियो टूल सोरा विकसित कर रही थी, तब उन्होंने उपयोगकर्ताओं के व्यवहार को समझने के उद्देश्य से शोध के लिए टिकटॉक डाउनलोड किया था। शुरुआत में उनका इरादा केवल कुछ मिनट तक ऐप का इस्तेमाल करने का था, लेकिन देखते ही देखते कुछ मिनटों की स्क्रॉलिंग कई घंटों में बदल गई। उन्होंने बताया कि यह अनुभव किसी लत जैसा महसूस हुआ और इससे बाहर निकलना आसान नहीं था। काफी प्रयास के बाद ही वह इस आदत से दूरी बना सके। उनका यह अनुभव इस बात की ओर संकेत करता है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि उपयोगकर्ता लंबे समय तक उनमें उलझे रहें।
बच्चों के विकास के लिए संतुलन है सबसे जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक से पूरी तरह दूरी बनाना संभव नहीं है और न ही इसकी आवश्यकता है। लेकिन बच्चों के जीवन में स्क्रीन और वास्तविक दुनिया के अनुभवों के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। यदि बच्चों को कुछ समय बिना किसी डिजिटल उपकरण के अपने विचारों के साथ रहने, खेलने, प्रकृति को महसूस करने और नई चीजें खोजने का अवसर दिया जाए, तो यही समय उनके व्यक्तित्व, रचनात्मकता और मानसिक मजबूती के विकास में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

