कहीं कान की वजह से तो नहीं आपका बच्चा पढ़ाई में कमजाेर? पेरेंट्स ध्यान दें इस बात पर
punjabkesari.in Tuesday, Mar 03, 2026 - 12:47 PM (IST)
नारी डेस्क: हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इसमें दावा किया गया कि दुनिया भर में 9 करोड़ से अधिक बच्चे सुनने की क्षमता में कमी (Hearing Loss) से जूझ रहे हैं। यह सिर्फ स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और मानसिक विकास पर भी गहरा असर डालती है। हर बच्चा जो पढ़ाई में पीछे रह रहा है, वह “कमजोर” नहीं होता। कभी-कभी वजह उसकी सुनने की क्षमता भी हो सकती है।
क्या कहती है रिपोर्ट?
रिपोर्ट के अनुसार करोड़ों बच्चों में आंशिक या गंभीर सुनने की समस्या है। इनमें से कई मामलों की पहचान समय पर नहीं हो पाती। इससे बच्चे के बोलने और भाषा सीखने में देरी हो सकती है, सोचने-समझने की क्षमता पर असर पड़ सकता है और सामाजिक मेलजोल भी कम हो जाता है। फलस्वरूप इससे पढ़ाई में पिछड़ना, आगे चलकर कामकाजी अवसरों में कमी और आर्थिक रूप से पिछड़ना जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
पढ़ाई पर कैसे पड़ता है असर?
भाषा और बोलने में देरी: जब बच्चा साफ नहीं सुन पाता, तो शब्दों को सही तरीके से सीख नहीं पाता। इससे उसकी बोलने और भाषा समझने की क्षमता प्रभावित होती है।
क्लास में ध्यान की कमी: शिक्षक की आवाज ठीक से न सुन पाने पर बच्चा पढ़ाई में रुचि खो सकता है। अक्सर ऐसे बच्चों को “ध्यान नहीं देता” समझ लिया जाता है, जबकि असली वजह सुनने की समस्या हो सकती है।
आत्मविश्वास में कमी: बार-बार न समझ पाने से बच्चा झिझकने लगता है। वह सवाल पूछने से बचता है और सामाजिक रूप से अलग-थलग पड़ सकता है।

बच्चों में सुनने की समस्या के शुरुआती संकेत
-नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना
-टीवी या मोबाइल की आवाज बहुत तेज रखना
-बार-बार “क्या?” पूछना
-पढ़ाई में अचानक गिरावट
-कान में दर्द या बार-बार इंफेक्शन
माता-पिता के लिए जरूरी टिप्स
अगर ऊपर बताए गए संकेत दिखें, तो तुरंत हियरिंग टेस्ट कराएं। नवजात शिशु का जन्म के बाद हियरिंग स्क्रीनिंग करवाना जरूरी है। कान में इंफेक्शन को नजरअंदाज न करें। तेज आवाज (लाउड म्यूजिक, हेडफोन) से बच्चों को बचाएं।रिपोर्ट यह भी कहती है कि अगर सुनने की समस्या की पहचान शुरुआती अवस्था में हो जाए, तो इलाज या हियरिंग एड की मदद से बच्चा सामान्य पढ़ाई और जीवन जी सकता है। इसलिए समय पर जांच, सही इलाज और परिवार का सहयोग यही बच्चे के उज्ज्वल भविष्य की कुंजी है।


