बच्चा गुस्से में मारता या काटता है, बिना डांटे इन 8 तरीकों से सुधारें उसकी ये आदतें

punjabkesari.in Monday, Nov 02, 2026 - 06:46 PM (IST)

नारी डेस्क : छोटे बच्चों का गुस्सा कई बार माता-पिता के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। कभी मनपसंद खिलौना न मिलने पर बच्चा दूसरे को मारने लगता है, तो कभी अपनी बात मनवाने के लिए काटने या चीजें फेंकने लगता है। ऐसी स्थिति में अक्सर माता-पिता भी अपना आपा खो बैठते हैं और बच्चे को डांटने या सजा देने लगते हैं। लेकिन क्या ऐसा करना वाकई सही है? दरअसल, छोटी उम्र में बच्चों के लिए अपनी भावनाओं को समझना और उन्हें शब्दों में व्यक्त करना आसान नहीं होता। ऐसे में वे कई बार गुस्से, निराशा या अपनी बात समझाने के लिए मारने और काटने जैसे व्यवहार करने लगते हैं। छोटे बच्चों में आत्म-नियंत्रण की क्षमता अभी विकसित हो रही होती है। इसलिए उन्हें डांटने के बजाय प्यार, धैर्य और सही मार्गदर्शन के साथ व्यवहार करना सिखाना जरूरी है। आइए जानते हैं ऐसे 8 तरीके, जिनकी मदद से आप बच्चे की इस आदत को सुधार सकते हैं।

बच्चे के सामने खुद शांत रहें

जब बच्चा गुस्से में मारने या काटने लगे, तो सबसे पहले माता-पिता को खुद शांत रहना चाहिए। अगर आप भी चिल्लाने, मारने या गुस्सा दिखाने लगेंगे, तो बच्चा यही सीख सकता है कि नाराजगी जाहिर करने का तरीका दूसरों को चोट पहुंचाना है। ऐसी स्थिति में बच्चे के पास जाकर शांत लेकिन दृढ़ आवाज में कहें- 'मैं तुम्हें गुस्सा होने से नहीं रोक रहा, लेकिन किसी को मारना या काटना सही नहीं है।' उसे अपनी भावनाएं शब्दों में बताना सिखाएं, जैसे- 'मुझे गुस्सा आ रहा है' या 'मुझे यह पसंद नहीं आया।'

PunjabKesari

डांटने और धमकी देने से बचें

बच्चे के गलत व्यवहार पर उसे डराना या धमकी देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। 'अब चुप हो जाओ, नहीं तो सजा मिलेगी' या 'ऐसा किया तो तुमसे बात नहीं करूंगी' जैसी बातें बच्चे को डरा सकती हैं, लेकिन इससे वह अपनी भावनाओं को संभालना नहीं सीखता। इसके बजाय उसे स्पष्ट रूप से बताएं कि उसका व्यवहार गलत है और अगली बार वह अपनी परेशानी किस तरह जाहिर कर सकता है। ध्यान रखें कि अनुशासन का मतलब बच्चे को डराना नहीं, बल्कि उसे सही और गलत का अंतर समझाना है।

घर के नियम पहले से समझाएं

बच्चों को सही व्यवहार सिखाने के लिए घर में कुछ आसान और स्पष्ट नियम बनाएं। जैसे- किसी को मारना नहीं है, काटना नहीं है, खिलौने छीनने नहीं हैं और अपनी बारी का इंतजार करना है। इन नियमों को केवल गलती होने पर ही न बताएं, बल्कि सामान्य समय में भी बच्चे को समझाते रहें। माता-पिता और परिवार के दूसरे सदस्य भी इन नियमों का पालन करें, ताकि बच्चा सभी को एक जैसा व्यवहार करते देख सके।

यें भी पढ़ें : कैंसर का दुश्मन है ये फल! सिर्फ दो महीने मिलता है, जानिए इसके गजब के फायदे

अच्छे व्यवहार की तारीफ करना न भूलें

माता-पिता अक्सर बच्चे की गलती पर तुरंत ध्यान देते हैं, लेकिन उसके अच्छे व्यवहार की तारीफ करना भूल जाते हैं। बच्चे को जब भी गुस्सा आने पर मारने के बजाय अपनी बात कहते देखें या किसी के साथ खिलौना शेयर करते हुए देखें, तो उसकी सराहना जरूर करें। आप कह सकते हैं- 'तुमने गुस्सा होने पर भी बहुत अच्छे से अपनी बात बताई।' इस तरह की सकारात्मक प्रतिक्रिया बच्चे को समझाती है कि सही व्यवहार करने पर भी उसे माता-पिता का ध्यान और प्रोत्साहन मिलता है।

PunjabKesari

बच्चों के झगड़े में सही समय पर दखल दें

जब बच्चे साथ खेलते हैं, तो खिलौनों या अपनी बारी को लेकर उनके बीच छोटी-मोटी बहस होना सामान्य है। ऐसी स्थिति में उन्हें अपनी बात कहने और समस्या सुलझाने का मौका दें। लेकिन अगर बहस मारपीट या काटने तक पहुंच जाए, तो तुरंत बीच में आएं। दोनों बच्चों को अलग करें और पहले यह सुनिश्चित करें कि किसी को चोट तो नहीं लगी है। जब वे शांत हो जाएं, तब उन्हें समझाएं कि नाराजगी होने पर भी किसी को चोट पहुंचाना सही नहीं है। साथ ही, उन्हें बारी-बारी से अपनी बात रखने का मौका दें।

बच्चे को 'ना' कहना और अपनी बात रखना सिखाएं

कई बार बच्चे इसलिए मारने या काटने लगते हैं क्योंकि उन्हें अपनी परेशानी बताने के लिए सही शब्द नहीं मिलते। ऐसे में उन्हें छोटी-छोटी बातें बोलना सिखाएं, जैसे- 'मुझे यह नहीं चाहिए', 'मेरा खिलौना वापस दो' या 'मुझे ऐसा मत करो।' उन्हें यह भी बताएं कि अगर कोई उनकी बात नहीं सुनता या उन्हें परेशान करता है, तो वे वहां से हटकर किसी बड़े की मदद ले सकते हैं। इससे बच्चे धीरे-धीरे अपनी सीमाएं समझना और बिना मारपीट के अपनी बात रखना सीखते हैं।

यें भी पढ़ें : हार्ट अटैक की असली वजह: मीट-तेल नहीं, बल्कि 5 गलत आदतें जो नाइट्रिक ऑक्साइड घटाती हैं

गुस्से के समय बच्चे का ध्यान दूसरी ओर लगाएं

अगर आपको लगे कि बच्चा गुस्से में आ रहा है या किसी को मारने वाला है, तो समय रहते उसका ध्यान दूसरी गतिविधि की ओर मोड़ सकते हैं। उसे ड्राइंग करने, कहानी सुनने, ब्लॉक्स से खेलने या किसी पसंदीदा गतिविधि में शामिल करें। इससे उसका ध्यान तनाव वाली स्थिति से हट सकता है। हालांकि, केवल ध्यान भटकाना ही काफी नहीं है। बच्चे के शांत होने पर उसे यह समझाना भी जरूरी है कि उसे गुस्सा क्यों आया और अगली बार वह क्या कर सकता है।

PunjabKesari

धैर्य रखें और अपने नियमों पर कायम रहें

बच्चों का व्यवहार एक दिन में नहीं बदलता। इसलिए माता-पिता को धैर्य रखना चाहिए और हर बार एक जैसा सकारात्मक व्यवहार अपनाना चाहिए। अगर आपने तय किया है कि घर में किसी को मारना या काटना स्वीकार्य नहीं है, तो इस नियम पर कायम रहें। कभी बच्चे की हरकत पर हंसना और कभी उसी बात पर बहुत गुस्सा करना उसे भ्रमित कर सकता है। बच्चे को बार-बार प्यार से समझाएं और सही व्यवहार करने का मौका दें।

कब डॉक्टर या चाइल्ड एक्सपर्ट से सलाह लें?

छोटी उम्र में कभी-कभी मारना या काटना भावनाओं को व्यक्त करने और आत्म-नियंत्रण सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। लेकिन अगर बच्चा लगातार दूसरों को चोट पहुंचाता है, उसका व्यवहार बहुत ज्यादा आक्रामक हो रहा है, स्कूल या घर में परेशानी बढ़ रही है या माता-पिता की कोशिशों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। डॉक्टर बच्चे की उम्र, विकास और व्यवहार को समझकर सही मार्गदर्शन दे सकते हैं।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Monika

Related News

static