भगवान जगन्नाथ आज जाएंगे मौसी के घर, जानें रथ यात्रा का पूरा शेड्यूल

punjabkesari.in Thursday, Jul 16, 2026 - 11:49 AM (IST)

नारी डेस्क : ओडिशा के पुरी में आज से विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 का शुभारंभ हो गया है। इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ भव्य रथों पर सवार होकर श्री जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर (मौसी के घर) के लिए प्रस्थान करेंगे। करीब 9 दिनों तक चलने वाले इस भव्य धार्मिक उत्सव में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु शामिल होकर महाप्रभु के दर्शन और रथ खींचने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।

तीन किलोमीटर की होगी दिव्य यात्रा

रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ अपने नंदीघोष रथ, भगवान बलभद्र तालध्वज रथ और देवी सुभद्रा दर्पदलन रथ पर विराजमान होकर लगभग 3 किलोमीटर की यात्रा तय करते हैं। भक्त पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ इन विशाल रथों को खींचते हैं। मान्यता है कि रथ खींचने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और भगवान की कृपा बनी रहती है।

PunjabKesari

कब से कब तक चलेगी रथ यात्रा?

16 जुलाई से रथ यात्रा का शुभारंभ होगा। इस दिन तीनों देवता गुंडिचा मंदिर (मौसी के घर) के लिए प्रस्थान करेंगे। वहां कुछ दिनों तक विश्राम करने के बाद 24 जुलाई को भगवान की वापसी यात्रा यानी बाहुदा यात्रा निकलेगी। इसके बाद 25 जुलाई को भगवान का स्वर्ण आभूषणों से भव्य श्रृंगार किया जाएगा और 27 जुलाई को महाप्रभु पुनः श्रीमंदिर के गर्भगृह में विराजमान होंगे।

यें भी पढ़ें : भगवान जगन्नाथ का लगाया भोग जिसे आम लोग नहीं खा सकते, बहा दिया जाता जमीन पर

 

जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 का पूरा शेड्यूल

16 जुलाई को रथ यात्रा: भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने-अपने रथों पर सवार होकर श्रीमंदिर से गुंडिचा मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे। पूरे पुरी में भक्ति, जयघोष और उत्सव का माहौल रहेगा।

20 जुलाई को  हेरा पंचमी: रथ यात्रा के पांचवें दिन माता लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ को खोजते हुए गुंडिचा मंदिर पहुंचती हैं। यह रस्म भगवान और माता लक्ष्मी के दिव्य मिलन का प्रतीक मानी जाती है।

24 जुलाई को बाहुदा यात्रा: इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की श्रीमंदिर वापसी यात्रा निकाली जाएगी। लाखों श्रद्धालु एक बार फिर रथ खींचकर भगवान को उनके धाम तक पहुंचाएंगे।

PunjabKesari

25 जुलाई सुना बेष (स्वर्ण वेश): रथ यात्रा का सबसे आकर्षक आयोजन सुना बेष होता है। इस दिन तीनों देवताओं को सोने के मुकुट, आभूषण और दिव्य स्वर्ण अलंकरणों से सजाया जाता है। इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

26 जुलाई को अधर पाना: इस विशेष अनुष्ठान में रथों पर विराजमान भगवान को एक पवित्र पेय अधर पाना अर्पित किया जाता है। यह रथ यात्रा की महत्वपूर्ण धार्मिक परंपराओं में से एक है।

27 जुलाई को नीलाद्रि बीजे: रथ यात्रा के अंतिम दिन भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा विधि-विधान के साथ पुनः श्री जगन्नाथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करते हैं। इसी के साथ नौ दिवसीय रथ यात्रा का समापन हो जाता है।

यें भी पढ़ें : भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा सबसे पहले सालबेग की मजार पर क्यों रुकती है?

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दी शुभकामनाएं

जगन्नाथ रथ यात्रा के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों और श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह पवित्र रथ यात्रा भारत की सदियों पुरानी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत की अद्भुत अभिव्यक्ति है। उन्होंने कामना की कि महाप्रभु जगन्नाथ सभी को उत्तम स्वास्थ्य, सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें।

PunjabKesari

क्या है रथ यात्रा का धार्मिक महत्व?

जगन्नाथ रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, समानता और भक्ति का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं और सभी को बिना किसी भेदभाव के दर्शन देते हैं। यही कारण है कि इसे दुनिया के सबसे बड़े और पवित्र धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Monika

Related News

static