गैस से फूला रहता है बच्चे का पेट? जानें सही कारण और आसान उपाय

punjabkesari.in Monday, Mar 16, 2026 - 12:31 PM (IST)

नारी डेस्क : छोटे बच्चों, खासकर नवजात शिशुओं में पेट में गैस और मरोड़ की समस्या बहुत आम होती है। इस वजह से कई बार बच्चा अचानक रोने लगता है या शरीर को ऐंठने लगता है, जिससे माता-पिता घबरा जाते हैं। दरअसल, यह स्थिति अक्सर शिशुओं में होने वाली एक सामान्य समस्या होती है, जिसे मेडिकल भाषा में Infant Colic कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म के बाद शुरुआती हफ्तों में बच्चे का पाचन तंत्र पूरी तरह विकसित नहीं होता। इसी कारण गैस बनने या पेट में हलचल होने पर बच्चा असहज महसूस करता है और रोकर अपनी प्रतिक्रिया देता है।

नवजात शिशुओं में गैस क्यों बनती है?

बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग 15–20 दिन की उम्र से बच्चों को पेट में गैस की समस्या महसूस होने लगती है। इस समय बच्चा अपने शरीर में हो रहे नए बदलावों को समझ नहीं पाता। जब पेट में गैस मूव करती है या बच्चा गैस पास करता है, तो उसे यह एक नई शारीरिक अनुभूति लगती है। इसी वजह से वह रोने लगता है या शरीर को मोड़ने लगता है। आमतौर पर यह समस्या 45 दिनों के आसपास ज्यादा दिखाई देती है और लगभग 3 महीने की उम्र तक धीरे-धीरे कम होने लगती है।

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कोलिक को समझना क्यों जरूरी है?

Infant Colic किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। यह सिर्फ बच्चे के पाचन तंत्र के विकास का एक हिस्सा होता है।
जब बच्चा 15–20 दिन का होता है, तो उसका शरीर पाचन क्रियाओं के प्रति संवेदनशील होने लगता है।
गैस पास करते समय बच्चा असहज महसूस कर सकता है।
समय के साथ उसका शरीर इन बदलावों के अनुसार खुद को ढालने लगता है।
इसलिए कई मामलों में दवाइयों के बावजूद बच्चा गैस या पॉटी पास करते समय रो सकता है, क्योंकि वह उस दबाव को महसूस कर रहा होता है।

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मसाज और एक्सरसाइज से मिल सकती है राहत

अगर बच्चे को गैस की वजह से ज्यादा परेशानी हो रही है, तो कुछ आसान घरेलू उपाय मदद कर सकते हैं।

हल्की पेट की मसाज करें: बच्चे की नाभि के आसपास हल्के हाथों से गोल-गोल घुमाते हुए मसाज करने से गैस निकलने में मदद मिल सकती है।

साइकिलिंग एक्सरसाइज: बच्चे को पीठ के बल लिटाकर उसके पैरों को साइकिल चलाने की तरह धीरे-धीरे हिलाएं। इससे पेट में फंसी गैस बाहर निकलने में मदद मिलती है।

बच्चे को सही तरीके से डकार दिलाएं: दूध पिलाने के बाद बच्चे को कंधे पर रखकर हल्के से थपथपाने से डकार निकलती है और गैस बनने की संभावना कम होती है।

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कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है?

हालांकि गैस और कोलिक की समस्या सामान्य होती है, लेकिन कुछ स्थितियों में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है। बच्चा लगातार बहुत तेज रो रहा हो दूध पीना बंद कर दे, पेट बहुत ज्यादा फूला हुआ लगे और बच्चे को बुखार या उल्टी हो तो ऐसे मामलों में तुरंत किसी बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार दवाइयां देना सही नहीं माना जाता।

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धैर्य और सही देखभाल है सबसे जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, नवजात बच्चों में गैस की समस्या में दवाइयों से ज्यादा माता-पिता का धैर्य और सही देखभाल जरूरी होती है। हल्की मसाज, सही फीडिंग और पैरों की एक्सरसाइज से बच्चे को काफी राहत मिल सकती है। अच्छी बात यह है कि जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसका पाचन तंत्र मजबूत हो जाता है और यह समस्या धीरे-धीरे अपने आप खत्म होने लगती है।
नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा साझा की गई सामान्य जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी समस्या की स्थिति में अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
 


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Monika

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