इस मंदिर में गणेश जी को दूर- दूर से मिलता है Wedding Card, भगवान कृष्ण की शादी से है इसका Connection
punjabkesari.in Wednesday, May 20, 2026 - 10:06 AM (IST)
नारी डेस्क: भगवान गणेश को हर जगह प्रथम पूज्य माना जाता है, हिन्दू धर्म में शादी के कार्ड पर सबसे पहले भगवान गणेश की फोटो छपवाई जाती है। आज हम ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां शादी का कार्ड लेकर भक्त श्रीगणेश को निमंत्रण देने पहुंचते हैं। इस मंदिर को भारतवर्ष का ही नहीं विश्व का पहला गणेश मंदिर माना जाता है। यहां पर भगवान श्रीगणेश जी की प्रतिमा स्वयंभू प्रकट हुई थी।

यहां पूरे परिवार के साथ मौजूद हैं भगवान गणेश
हम बात कर रहे हैं त्रिनेत्र गणेश मंदिर भारत के राजस्थान में स्थित रणथंभौर किले के भीतर एक ऐतिहासिक और अत्यंत पूजनीय तीर्थ स्थल है। राज्य के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक के रूप में प्रसिद्ध, यह दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां भगवान गणेश को उनके पूरे परिवार के साथ तीन आंखों वाला दर्शाया गया है। यहां रोज करीब 10 किलो शादी के कार्ड पहुंचते हैं। मान्यता है कि इस गणेश मंदिर में आशीर्वाद लेना काफी फसला फूलता है।
यहां गणेश के मुख की होती है पूजा
याद हो कि कैटरीना कैफ और विक्की कौशल की शादी के दौरान यह खबरें सामने आई थी कि माधोपुर के लोगों द्वारा इस मंदिर का महत्व बताने पर कपल यहां जाना चाहता था। इसके बाद से ही मंदिर के खूब चर्चे होने लगे थे। भगवान गणेश इस मंदिर में दो पत्नी- रिद्दि और सिद्दि और दो पुत्र- शुभ और लाभ के साथ विराजमान हैं, यानी कि यहां पूरे परिवार के दर्शन हो जाएंगे। यहां सिर्फ गणेश के मुख की पूजा की जाती है। शरीर के अन्य अंग नहीं होने से ये प्रतिमा रहस्यमयी जान पड़ती है।

रोजाना आते हैं 15 से 20 किलो कार्ड
शादी या किसी भी शुभ कार्य से पहले दुनियाभर के लोग पहला कार्ड सबसे पहले मंदिर भिजवाते हैं। रोजाना मंदिर में 15 से 20 किलो डाक आती है। इसमें निमंत्रण पत्र और गणेश भगवान के नाम खत होते हैं। जो अलग-अलग भाषाओं में भी होते हैं। बड़ी बात यह है कि पुजारी सभी कार्ड गणेश जी को पढ़कर सुनाते हैं। बताया जाता है कि 10वीं सदी में रणथंभौर के राजा हमीर ने ये मंदिर बनवाया था। तभी से भगवान गणेश जी को प्रथम निमंत्रण देने का सिलसिला चल रहा है। एक और मान्यता के अनुसार द्वापर युग में भगवान कृष्ण का विवाह रूकमणी से हुआ था। इस विवाह में वे गणेशजी को बुलाना भूल गए। कृष्ण जी को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने गणेशजी को मनाया। तब से गणेशजी हर मंगल कार्य करने से पहले पूजे जाते हैं।

