भक्त ने भेंट की तिरुपति बालाजी को 1 करोड़ की तलवार, जानिए इस मंदिर की खासियत

2021-07-21T18:50:30.197

भारत में बहुत से ऐसे मंदिर है जहां पर सालभर भक्तों की भीड़ रहती है। इनमें से एक है हैदराबाद के आंध्र प्रदेश का तिरुमाला तिरुपति बालाजी मंदिर। इस मंदिर में भगवान वेंकटेश्वर अपनी पत्नी के साथ विराजमान है। वहीं यह मंदिर कई रहस्यों से भरा हुआ है। यहां पर भक्त अपनी श्रद्धा से पैसे, सोना, चांदी आदि भेंट करते हैं। ऐसे हैदराबाद के एक श्रद्धालु ने भगवान वेंकटेश्वर को सोने व चांदी की तलवार भेंट की है। चलिए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...

PunjabKesari

भगवान वेंकटेश्वर को अर्पित की सोने की तलवार

सोमवार को आंध्र प्रदेश के तिरुमाला तिरुपति बालाजी मंदिर में एक कारोबारी श्रद्धालु श्रीनिवास ने भगवान को सूर्यकटारी चढ़ाई है। मंदिर के अधिकारी ने बताया है कि दो किलोग्राम सोने और तीन किलो चांदी से बनी यह तलवार लगभग 5 किलोग्राम है। बात इसकी कीमत की करें तो यह 1 करोड़ 8 लाख रुपए बताई जा रही है। इस तलवार को श्रीनिवास ने अपनी पत्नी के साथ मंदिर के अधिकारियों को सौंपा है। कहा जा रहा है कि वे पिछले 1 वर्ष से इस तलवार को भेंट करना चाह रहे थे। मगर कोरोना के कारण इसमें देरी हो रही थी। सोने व चांदी से तैयार यह तलवार ‘नंदका’ (‘सूर्य कटारी’) भगवान बालाजी के पास पहले से मौजूद तलवार की तरह दिखती है। अधिकारी द्वारा बताया गया है कि मंदिर के अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी ए वेंकट धर्म रेड्डी ने इस तलवार को हासिल किया है।

PunjabKesari

चलिए जानते हैं मंदिर से जुड़ी कुछ खास बातें...


कई रहस्यों से भरा तिरूपति बालाजी मंदिर

यह मंदिर पर्वत की वेंकटाद्रि नामक 7वीं चोटी पर स्थापित है जो श्री स्वामी पुष्करणी नामक तालाब के किनारे पर बसा है। इसलिए तिरूपति बालाजी को भगवान वेंकटेश्वर के नाम पूजा जाता है। भारत में तिरूपति बालाजी का मंदिर सबसे अमीर माना जाता है। कहा जाता है कि यहां पर हर किसी की मुरादें पूरी होती है। इसके साथ ही मन्नत पूरी होकर पर भक्त यहां पर बाल दान करते हैं।

PunjabKesari


मूर्ति से समुद्री लहरों की आवाज का आना

यहां के स्थानीय लोगों का मानना है कि भगवान की मूर्ति से समुद्र की लहरों की आवाज आती है। शायद इसलिए मूर्ति हमेशा नम रहती है। इसके साथ ही  मंदिर के मुख्य द्वार के दरवाजे के दायीं ओर एक छड़ी पड़ी है। कहा जाता है कि बाल्‍यावस्‍था में इस छड़ी से भगवान तिरूपति बालाजी की पिटाई की गई थी। इसके कारण उनकी ठुड्डी पर चोट लगने का घाव है। ऐसे में तब से आज तक शुक्रवार को उनकी ठुड्डी पर हर चंदन का लेप लगाता है।

PunjabKesari


भगवान की मूर्ति का रहस्यमयी

माना जाता है कि तिरूपति बालाजी की दिव्य काली मूर्ति जमीन से प्रकट हुई है। इसके साथ वेंकटाचल पर्वत को भी भगवान का स्वरूप कहा जाता है। इसके साथ ही मूर्ति पर लगे बाल असली है और वे कभी भी उलझते नहीं है। मान्‍यता है कि ऐसा इसलिए क्योंकि यहां भगवान वेंकटेश्‍वर खुद विराजमान है।

PunjabKesari

भगवान की मूर्ति को आता है पसीना

भगवान तिरूपति बालाजी की मूर्ति एक विशेष प्रकार के चिकने पत्‍थर की बनी होने पर पूरी तरह से जीवित सी लगती है। मंदिर का वातावरण भी पूरी तरह से ठंडा है। इसके बावजूद भी लोगों का मानना है कि भगवान को बहुत गर्मी लगती है। इसके कारण उन्हें पसीना आने से उनकी पीठ एकदम नम हो जाती है।

PunjabKesari

अनोखे तरीके से होता है भगवान का श्रृंगार

तिरूपति बालाजी का श्रृंगार बेहद ही अनोखे तरीके होता है। असल में, भगवान की मूर्ति को प्रतिदिन नीचे धोती और ऊपर साड़ी पहनाई जाती है। इसके पीछे मान्‍यता है कि बालाजी में देवी लक्ष्‍मी का रूप समाहित है। कहते हैं हर गुरुवार को बालाजी को स्नान करवाने के लिए उनका पूरा श्रृंगार उतारकर उन्हें चंदन का लेप होता है। इसके बाद चंदन लेप हटाने पर उनके हृदय पर लगे चंदन में देवी लक्ष्मी की छवि दिखाई देती है।

PunjabKesari


मंदिर में रोजाना बनाते हैं तीन लाख लड्डू

कहा जाता है कि मंदिर में रोजाना 3 लाख देसी के लड्डू बनते हैं। इसके साथ इन लड्डूओं को वहां के कारीगर 300 साल पुरानी पारंपरिक विधि का इस्तेमाल करते हैं।

 

PunjabKesari


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

neetu

Recommended News

static