वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में आरती के दौरान घंटी क्यों नहीं बजती? जानें रहस्य

punjabkesari.in Saturday, Feb 14, 2026 - 06:05 PM (IST)

नारी डेस्क : उत्तर प्रदेश के वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर की परंपराएं पूरे भारत में सबसे अलग और भावनात्मक मानी जाती हैं। देश के लगभग हर मंदिर में आरती के समय घंटी बजती है, लेकिन बांके बिहारी मंदिर में यह परंपरा नहीं निभाई जाती। इसके पीछे न तो कोई शास्त्रीय नियम है और न ही कठोर विधि बल्कि इसकी जड़ें गहरे प्रेम भाव में हैं।

देवता नहीं, लाला के रूप में पूजा

वृंदावन में भगवान श्रीकृष्ण को देवता नहीं, बल्कि लाला (छोटा बच्चा) मानकर पूजा जाता है। यहां भक्ति का आधार नियम नहीं, बल्कि अपनापन है। इसी सोच के कारण पूजा-पाठ की हर क्रिया बच्चे की भावनाओं के अनुरूप की जाती है।

PunjabKesari

इंद्रेश महाराज ने बताया कारण

वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश महाराज के अनुसार, बांके बिहारी जी को जगाया नहीं जाता, बल्कि उनसे प्यार से निवेदन किया जाता है। लाला उठो… जय हो लाला की। यही कारण है कि जहां अन्य मंदिरों में भगवान ब्रह्म मुहूर्त में जागते हैं, वहीं बांके बिहारी जी लगभग सुबह 8 बजे दर्शन देते हैं। मान्यता है कि जैसे छोटे बच्चे देर से सोते और देर से उठते हैं, वैसे ही लाला भी।

यें भी पढ़ें : फैटी लिवर की दुश्मन हैं ये 5 हरी सब्जियां, खाते ही घटने लगेगा फैट और सूजन

घंटी क्यों नहीं बजती?

इंद्रेश महाराज बताते हैं कि घंटी की तेज आवाज से लाला डर सकते हैं। अगर भगवान को डर लगे, तो यह प्रेम में कमी मानी जाती है। इसलिए आरती के समय घंटी नहीं बजाई जाती, बल्कि मृदुल स्वर में भजन और कीर्तन किया जाता है। यही वजह है कि बांके बिहारी मंदिर दुनिया का शायद इकलौता मंदिर है, जहां आरती बिना घंटियों के होती है।

PunjabKesari

वृंदावन की दिनचर्या भी है प्रेम से भरी

दोपहर में मंदिर बंद हो जाते हैं, क्योंकि मान्यता है कि ठाकुर जी गो-चरण के लिए गए हैं। शाम को लौटने पर सबसे पहले उनके गालों और हाथों पर इत्र लगाया जाता है, जैसे कोई मां अपने बच्चे को संवारती है।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

A post shared by 𝐒𝐚𝐲𝐚𝐧 𝐂𝐡𝐚𝐤𝐫𝐚𝐛𝐨𝐫𝐭𝐲 (@sanatan_sakha)

यें भी पढ़ें : शनिदेव का वाहन जानें कैसे बन गया कौवा, क्यों हैं उनके लिए सबसे खास?

विधि नहीं, भावना है पूजा का आधार

वृंदावन में धर्म से ज्यादा प्रेम को महत्व दिया जाता है। यहां भगवान की पूजा विधि आधारित नहीं, बल्कि भावना से भरी होती है। उनकी नींद, डर, खुशी सब कुछ मानवीय भावनाओं के अनुरूप माना जाता है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Monika

Related News

static