Overthinking और Anxiety से दिमाग हो गया है परेशान? ये 8 तरीके मन को देंगे सुकून

punjabkesari.in Saturday, Oct 10, 2026 - 01:08 PM (IST)

 नारी डेस्क:  आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में दिमाग को शांत रखना आसान नहीं रह गया है। कभी ऑफिस का काम परेशान करता है, तो कभी घर की जिम्मेदारियां और भविष्य की चिंता मन में चलती रहती है। कई बार ऐसा होता है कि कोई बात खत्म हो चुकी होती है, लेकिन हमारा दिमाग उसी के बारे में बार-बार सोचता रहता है। इसे ओवरथिंकिंग (Overthinking) कहा जाता है। धीरे-धीरे यही आदत बेचैनी, तनाव और नींद से जुड़ी परेशानियों को बढ़ा सकती है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है कि रात को बिस्तर पर लेटने के बाद दिमाग में विचारों की भीड़ लग जाती है या छोटी-छोटी बातें भी आपको परेशान करने लगती हैं, तो अपनी दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी है। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान आदतें अपनाकर तनाव को संभालने और मन को शांत रखने में मदद मिल सकती है।

आयुर्वेद में अच्छी दिनचर्या, संतुलित खानपान, योग, ध्यान और शरीर को आराम देने वाली गतिविधियों को महत्व दिया गया है। हालांकि, इन तरीकों से हर व्यक्ति को एक जैसा फायदा हो, यह जरूरी नहीं है। आइए जानते हैं ऐसे 8 आसान तरीके, जिन्हें अपनाकर आप अपनी मानसिक सेहत का बेहतर ख्याल रख सकते हैं।

सुबह की शुरुआत सही दिनचर्या के साथ करें

सुबह उठने के बाद सबसे पहले मोबाइल देखने की आदत आपके दिमाग को दिन की शुरुआत में ही कई तरह की सूचनाओं और चिंताओं से भर सकती है। इसलिए कोशिश करें कि उठते ही फोन चेक करने के बजाय खुद को थोड़ा समय दें। सुबह उठकर अपनी प्यास के अनुसार पानी पिएं, कुछ देर शांत बैठें और हल्की स्ट्रेचिंग करें। आयुर्वेद में नियमित दिनचर्या यानी दिनचर्या का पालन करने पर जोर दिया गया है। रोजाना लगभग एक ही समय पर उठना, खाना खाना और सोने की कोशिश करना शरीर की प्राकृतिक लय को बनाए रखने में मदद कर सकता है। जब दिन का एक सामान्य रूटीन बना रहता है, तो कामों को संभालना आसान हो सकता है। इससे तनाव कम करने और मन को व्यवस्थित रखने में मदद मिल सकती है।

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गहरी सांस लें और मेडिटेशन करें

जब दिमाग में एक साथ कई विचार चल रहे हों, तो कुछ मिनट रुककर अपनी सांसों पर ध्यान देना मददगार हो सकता है। तनाव के समय कई लोगों की सांसें तेज या उथली हो जाती हैं। ऐसे में धीरे-धीरे सांस लेना शरीर को आराम देने में मदद कर सकता है। इसके लिए किसी शांत जगह पर आराम से बैठ जाएं। नाक से धीरे-धीरे सांस लें और फिर बिना जोर लगाए धीरे-धीरे सांस छोड़ें। शुरुआत में इसे 3 से 5 मिनट तक कर सकते हैं। इसके अलावा, अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास भी किया जा सकता है। ध्यान रखें कि सांस रोकने या बहुत जोर से प्राणायाम करने की जरूरत नहीं है। अगर चक्कर आएं या असहज महसूस हो, तो अभ्यास रोक दें। रोजाना कुछ मिनट मेडिटेशन करने से अपने विचारों को पहचानने और उन पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय शांत होकर सोचने की आदत विकसित हो सकती है।

खानपान का रखें ध्यान, कैफीन कम करें

हमारी खाने-पीने की आदतों का असर शारीरिक सेहत के साथ-साथ नींद और ऊर्जा पर भी पड़ता है। अगर आप दिनभर खाना छोड़ते रहते हैं, बहुत ज्यादा चाय-कॉफी पीते हैं या रात में देर से भारी भोजन करते हैं, तो बेचैनी और नींद की परेशानी बढ़ सकती है। आयुर्वेद में ताजा, गर्म और आसानी से पचने वाले भोजन को महत्व दिया जाता है। आप अपनी डाइट में दाल, दलिया, खिचड़ी, मौसमी सब्जियां, फल और पर्याप्त मात्रा में पानी शामिल कर सकते हैं। शाम के बाद ज्यादा चाय, कॉफी या एनर्जी ड्रिंक लेने से बचें, क्योंकि कैफीन कुछ लोगों में घबराहट बढ़ा सकता है और नींद में बाधा डाल सकता है। तुलसी या कैमोमाइल की चाय जैसे पेय कुछ लोगों को आराम महसूस करा सकते हैं, लेकिन इन्हें एंग्जायटी का इलाज नहीं समझना चाहिए। किसी भी हर्बल उत्पाद या ब्राह्मी जैसी आयुर्वेदिक औषधि का नियमित सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है, क्योंकि इनके दवाओं के साथ दुष्प्रभाव या प्रतिक्रिया हो सकती है।

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तेल से मालिश करके शरीर को दें आराम

आयुर्वेद में अभ्यंग यानी तेल से मालिश को दिनचर्या का एक हिस्सा माना जाता है। हल्के हाथों से पैरों, हाथों या सिर की मालिश करने से कुछ लोगों को आराम महसूस होता है। यह दिनभर की थकान कम करने और सोने से पहले मन को शांत करने का एक आसान तरीका हो सकता है। आप चाहें तो नहाने से पहले शरीर पर हल्के हाथों से तेल लगा सकते हैं या रात में पैरों की हल्की मालिश कर सकते हैं। इसके लिए ऐसा तेल चुनें, जिससे त्वचा पर जलन या एलर्जी न हो। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि तेल की मालिश ओवरथिंकिंग या एंग्जायटी का प्रमाणित इलाज नहीं है। इसे आराम पाने की एक सहायक आदत के तौर पर अपनाया जा सकता है।

मोबाइल से दूरी बनाएं और डिजिटल ब्रेक लें

कई बार हम बिना किसी खास काम के बार-बार मोबाइल उठाते हैं। सोशल मीडिया पर दूसरों की जिंदगी देखना, लगातार आने वाले मैसेज और खबरें पढ़ना दिमाग को थका सकते हैं। खासकर रात में देर तक स्क्रीन देखने से नींद आने में परेशानी हो सकती है। अगर आपको बार-बार बेचैनी होती है, तो दिन में कुछ समय फोन से दूर रहने की कोशिश करें। खाना खाते समय मोबाइल अलग रखें और सोने से लगभग 30 से 60 मिनट पहले स्क्रीन का इस्तेमाल कम कर दें। इस दौरान आप किताब पढ़ सकते हैं, हल्का संगीत सुन सकते हैं या परिवार के साथ समय बिता सकते हैं। सोशल मीडिया पर बिताया जाने वाला समय धीरे-धीरे कम करने से भी दिनचर्या पर बेहतर नियंत्रण महसूस हो सकता है।

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प्रकृति के बीच समय बिताएं और टहलने जाएं

जब मन परेशान होता है, तो कई बार अकेले कमरे में बैठे रहने के बजाय बाहर निकलना अच्छा विकल्प हो सकता है। पार्क में टहलना, पेड़-पौधों के बीच समय बिताना या सुबह की ताजी हवा में कुछ देर चलना मन को हल्का महसूस कराने में मदद कर सकता है। रोजाना 15 से 30 मिनट अपनी क्षमता के अनुसार पैदल चलने की कोशिश करें। अगर शुरुआत में इतना समय निकालना मुश्किल है, तो 5 से 10 मिनट की वॉक से शुरू कर सकते हैं। शारीरिक गतिविधि तनाव को संभालने, मूड बेहतर करने और नींद में मदद कर सकती है। इसके लिए महंगे उपकरण या जिम जाना जरूरी नहीं है। नियमित रूप से चलना भी एक अच्छी शुरुआत है।

नींद का समय तय करें

अगर आप रात को बिस्तर पर लेटने के बाद घंटों तक सोचते रहते हैं और सुबह उठने पर भी थकान महसूस होती है, तो अपनी नींद की आदतों पर ध्यान दें। नींद की कमी से चिड़चिड़ापन, ध्यान लगाने में परेशानी और तनाव को संभालने में मुश्किल हो सकती है। इसलिए हर दिन लगभग एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करें। सोने से पहले बहुत ज्यादा कैफीन लेने, देर रात भारी भोजन करने और लंबे समय तक मोबाइल चलाने से बचें। कमरे में आरामदायक माहौल बनाएं और सोने से पहले कुछ मिनट धीमी सांस लेने या हल्की किताब पढ़ने जैसी आदत अपनाएं। वयस्कों को आमतौर पर रात में 7 से 9 घंटे की नींद की जरूरत होती है। अगर पर्याप्त समय सोने के बावजूद लगातार थकान रहती है या नींद नहीं आती, तो डॉक्टर से सलाह लें।

अपने विचारों को लिखें और हर बात का जवाब ढूंढना छोड़ें

ओवरथिंकिंग में अक्सर एक ही सवाल बार-बार दिमाग में घूमता रहता है। कभी पुरानी बातों का पछतावा होता है, तो कभी भविष्य में कुछ गलत होने का डर सताता है। ऐसे में विचारों को मन में दबाकर रखने के बजाय उन्हें कागज पर लिखना मददगार हो सकता है। रोजाना 5 से 10 मिनट निकालकर लिखें कि आपको किस बात की चिंता है। फिर खुद से पूछें कि क्या इस समस्या का कोई समाधान अभी निकाला जा सकता है या यह ऐसी बात है, जिसे फिलहाल बदला नहीं जा सकता। अगर समाधान मौजूद है, तो उसके लिए एक छोटा कदम तय करें। अगर अभी कुछ करना संभव नहीं है, तो खुद को याद दिलाएं कि हर सवाल का जवाब तुरंत मिलना जरूरी नहीं है। अपनी किसी भरोसेमंद दोस्त या परिवार के सदस्य से बात करना भी मन का बोझ हल्का करने में मदद कर सकता है। हर परेशानी को अकेले संभालना जरूरी नहीं है।

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कब डॉक्टर की मदद लेना जरूरी है

कभी-कभार चिंता होना सामान्य है, लेकिन अगर बेचैनी लगातार बनी रहती है, नींद और रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगते हैं या मन में बार-बार डर और घबराहट होती है, तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में मनोवैज्ञानिक, मनोचिकित्सक या दूसरे योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है। एंग्जायटी के लिए काउंसलिंग, कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से दवाएं भी मदद कर सकती हैं। यह भी जरूरी है कि ओवरथिंकिंग को केवल वात दोष के असंतुलन का नतीजा न मानें। मानसिक परेशानी के कई कारण हो सकते हैं और सही मदद का चुनाव व्यक्ति की स्थिति के अनुसार किया जाना चाहिए।
 

 


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Content Editor

Priya Yadav

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