ये Black डिब्बे आपको सिर्फ बड़ी-बड़ी बीमारियां देंगे! संभलो और समझो

punjabkesari.in Monday, Oct 05, 2026 - 06:40 PM (IST)

नारी डेस्क:  बाहर से खाना मंगवाते समय आपने अक्सर देखा होगा कि इसे काले रंग के प्लास्टिक के डिब्बे में पैक करके दिया जाता है। देखने में ये डिब्बे आम प्लास्टिक जैसे ही लगते हैं, लेकिन इनके इस्तेमाल को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। खासकर जब इनमें गर्म या तैलीय खाना रखा जाता है, तो प्लास्टिक से कुछ रसायन खाने में पहुंचने की आशंका रहती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या काले प्लास्टिक के डिब्बे में रखा खाना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है? आइए समझते हैं कि इसे लेकर क्या चिंता जताई जाती है और खाने को पैक करने के लिए किन चीजों का इस्तेमाल करना बेहतर है।

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काला प्लास्टिक कैसे तैयार होता है?

काले प्लास्टिक को लेकर सबसे बड़ी चिंता इसके स्रोत और निर्माण प्रक्रिया को लेकर है। कुछ मामलों में काला प्लास्टिक अलग-अलग तरह के प्लास्टिक कचरे और इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट से तैयार किया जाता है। इसे पहचानना और अलग-अलग करना भी मुश्किल हो सकता है। कुछ काले प्लास्टिक उत्पादों में आग से बचाने वाले रसायन यानी फ्लेम रिटार्डेंट भी पाए गए हैं। इनमें कुछ ऐसे रसायन शामिल हो सकते हैं, जिनका लंबे समय तक संपर्क स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय माना जाता है।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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गर्म खाना रखने पर क्यों बढ़ जाती है चिंता?

अगर गर्म या तैलीय खाना सीधे काले प्लास्टिक के डिब्बे में रखा जाता है, तो गर्मी और तेल के कारण प्लास्टिक में मौजूद कुछ रसायनों के खाने में पहुंचने की संभावना बढ़ सकती है। यही वजह है कि प्लास्टिक के कंटेनर में खाना गर्म करना या उसे बार-बार इस्तेमाल करना अच्छा विकल्प नहीं माना जाता। इसके अलावा, कुछ प्लास्टिक उत्पादों में बीपीए और फ्थेलेट्स जैसे रसायन भी पाए जा सकते हैं। इन रसायनों को लेकर हार्मोन और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी संभावित चिंताएं सामने आई हैं। हालांकि, हर काले प्लास्टिक के डिब्बे में ये सभी रसायन मौजूद हों, ऐसा जरूरी नहीं है।

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रिसर्च में क्या सामने आया?

2024 में प्रकाशित एक अध्ययन में 200 से ज्यादा काले प्लास्टिक उत्पादों की जांच की गई थी। इसमें बड़ी संख्या में उत्पादों में फ्लेम रिटार्डेंट रसायनों की मौजूदगी की बात सामने आई। इस तरह की रिसर्च ने खाने के संपर्क में आने वाले काले प्लास्टिक उत्पादों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। हालांकि, किसी एक अध्ययन के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि काले प्लास्टिक में रखा खाना सीधे तौर पर कैंसर का कारण बनता है। स्वास्थ्य पर असर इस बात पर भी निर्भर करता है कि किस तरह का प्लास्टिक इस्तेमाल हुआ है, उसमें कौन से रसायन मौजूद हैं और व्यक्ति कितनी मात्रा और कितने समय तक उनके संपर्क में रहता है।

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बच्चों और गर्भवती महिलाओं को ज्यादा सावधानी क्यों?

बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्या वाले लोगों के मामले में अनावश्यक रासायनिक संपर्क से बचना ज्यादा बेहतर माना जाता है। इसलिए ऐसे लोगों के लिए गर्म खाना सीधे प्लास्टिक के कंटेनर में रखने से बचना एक आसान सावधानी हो सकती है।

खाने के लिए कौन-से बर्तन बेहतर हैं?

गर्म खाना रखने और गर्म करने के लिए काले प्लास्टिक की जगह ग्लास, स्टील या अन्य उपयुक्त खाद्य-सुरक्षित कंटेनर इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प हो सकता है। खासकर प्लास्टिक के डिब्बे में खाना गर्म करने से बचना चाहिए। अगर बाहर से खाना प्लास्टिक के डिब्बे में आया है, तो उसे लंबे समय तक उसी डिब्बे में रखने के बजाय घर पहुंचने के बाद ग्लास या स्टील के बर्तन में निकाल लेना बेहतर है।

ध्यान रखें: काले प्लास्टिक के हर डिब्बे को खतरनाक कहना सही नहीं है। प्लास्टिक की गुणवत्ता, उसमें इस्तेमाल सामग्री और खाद्य-सुरक्षा मानकों का पालन भी महत्वपूर्ण है। लेकिन गर्म और तैलीय खाना प्लास्टिक में लंबे समय तक रखने से बचना एक समझदारी भरी सावधानी है।

 
 
 
  


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Content Editor

Priya Yadav

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