10 में से 4 युवा फैटी लिवर के शिकार, फिर भी क्यों नहीं पहचान पाते बीमारी

punjabkesari.in Wednesday, Sep 02, 2026 - 04:37 PM (IST)

 नारी डेस्क: भारत में फैटी लिवर की समस्या अब सिर्फ उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं रह गई है। युवाओं के साथ-साथ बच्चों में भी इसके मामले बढ़ते जा रहे हैं। चिंता की बात यह है कि बहुत से लोगों को लंबे समय तक पता ही नहीं चलता कि उनके लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा हो रहा है। हाल ही में भारतीय आबादी को लेकर सामने आए एक अध्ययन में बताया गया कि करीब 38.6 प्रतिशत युवा और 35.4 प्रतिशत बच्चे फैटी लिवर की समस्या से जूझ रहे हैं। यानी लगभग 10 में से 4 युवाओं में यह समस्या देखी जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, बीमारी के बढ़ने की एक बड़ी वजह यह भी है कि शुरुआती दौर में इसके लक्षण इतने स्पष्ट नहीं होते कि व्यक्ति आसानी से इसे पहचान सके।

फैटी लिवर को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी

एम्स के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी और ह्यूमन न्यूट्रिशन विभाग के प्रमुख डॉ. प्रमोद गर्ग के मुताबिक, आज बड़ी संख्या में युवाओं के लिवर में अतिरिक्त फैट जमा हो रहा है। पहले फैटी लिवर को ज्यादातर वयस्कों से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब बच्चों में भी इसके मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। समस्या सिर्फ लिवर में फैट जमा होने तक सीमित नहीं रहती। कुछ लोगों में समय के साथ यह लिवर में सूजन और फाइब्रोसिस जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। इसलिए इसे सामान्य या छोटी समस्या मानकर नजरअंदाज करना सही नहीं है।

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आखिर युवाओं में क्यों बढ़ रहा है फैटी लिवर

फैटी लिवर के बढ़ते मामलों के पीछे बदलती जीवनशैली को एक महत्वपूर्ण वजह माना जा रहा है। शारीरिक गतिविधि कम होना, असंतुलित खानपान, बढ़ता वजन और मेटाबॉलिक समस्याएं इसके जोखिम को बढ़ा सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी स्थितियों वाले लोगों में फैटी लिवर का खतरा अधिक हो सकता है। आज की लाइफस्टाइल में इन समस्याओं का बढ़ना भी फैटी लिवर के बढ़ते मामलों से जुड़ा हुआ है।

सबसे बड़ी दिक्कत है कि बीमारी चुपचाप बढ़ती है

फैटी लिवर की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि शुरुआती चरण में कई लोगों में कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देता। व्यक्ति सामान्य तरीके से अपनी जिंदगी जीता रहता है और उसे अंदाजा भी नहीं होता कि लिवर में बदलाव शुरू हो चुके हैं। कई बार थकान या शरीर में भारीपन जैसी सामान्य शिकायतों को लोग काम का दबाव या वजन बढ़ने से जोड़कर छोड़ देते हैं। इसी वजह से बीमारी की पहचान देर से हो सकती है।

डायबिटीज और हाई बीपी वालों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत

जिन लोगों को टाइप-2 डायबिटीज, मोटापा या हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हैं, उन्हें लिवर की सेहत को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये स्थितियां फैटी लिवर और आगे चलकर लिवर से जुड़ी जटिलताओं के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। एक अध्ययन में टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित कुछ मरीजों में लिवर फाइब्रोसिस भी पाया गया है। ऐसे में मेटाबॉलिक बीमारियों को नियंत्रित रखना सिर्फ शुगर या ब्लड प्रेशर के लिए ही नहीं, बल्कि लिवर की सेहत के लिए भी जरूरी है।

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फैटी लिवर के साथ बढ़ रही हैं दूसरी बीमारियां

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में मेटाबॉलिक बीमारियों के साथ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और दूसरी पाचन संबंधी समस्याएं भी बड़ी चुनौती बन रही हैं। कोलोरेक्टल कैंसर, हेलिकोबैक्टर पाइलोरी संक्रमण और आंत से जुड़ी अन्य बीमारियों के मामलों पर भी लगातार ध्यान देने की जरूरत है। उदाहरण के तौर पर, उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 2022 में भारत में कोलोरेक्टल कैंसर के 40,439 नए मामले दर्ज किए गए थे और 24,433 मौतें हुई थीं। हालांकि, इन बीमारियों को फैटी लिवर का सीधा परिणाम मानना सही नहीं होगा। ये अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जिनके अपने जोखिम कारक होते हैं।

किन संकेतों को नजरअंदाज न करें

फैटी लिवर कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के रहता है, इसलिए सिर्फ लक्षणों के आधार पर इसे पहचानना मुश्किल हो सकता है। लगातार थकान, कमजोरी या बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन में बदलाव जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वहीं, मल में खून आना, आंत की आदतों में अचानक बदलाव या बिना वजह वजन कम होना खास तौर पर गंभीर संकेत हो सकते हैं। हालांकि ये लक्षण सिर्फ फैटी लिवर के नहीं हैं और कई दूसरी बीमारियों में भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसे लक्षण होने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

समय पर जांच से बच सकती है परेशानी

 फैटी लिवर की पहचान समय रहते की जाए तो जीवनशैली में बदलाव और उचित इलाज के जरिए स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सकता है। वजन को नियंत्रित रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और संतुलित भोजन लेना इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एम्स के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. गोविंद मखारिया भी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं के शुरुआती संकेतों को गंभीरता से लेने की जरूरत पर जोर देते हैं। उनके मुताबिक, लक्षणों को समय पर पहचानना और सही जांच कराना बेहद जरूरी है।

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लिवर की सेहत के लिए लाइफस्टाइल पर दें ध्यान

फैटी लिवर का बढ़ना आज की बदलती जीवनशैली से जुड़ी बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। खासकर युवाओं और बच्चों में इसके बढ़ते मामलों को देखते हुए सिर्फ बीमारी का इलाज ही नहीं, बल्कि इसकी रोकथाम पर भी ध्यान देना जरूरी है। अगर वजन बढ़ रहा है, डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है या डॉक्टर ने लिवर से जुड़ी कोई समस्या बताई है, तो नियमित स्वास्थ्य जांच कराना बेहतर है। किसी भी तरह के लक्षण या रिपोर्ट में बदलाव को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर डॉक्टर से सलाह लेना बीमारी को गंभीर होने से रोकने में मदद कर सकता है।
  
 


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Content Editor

Priya Yadav

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