भिंडी, मेथी और चावल से बना डाला वॉटर फिल्टर, दो बहनों के Idea ने सबको किया हैरान

punjabkesari.in Wednesday, Jun 10, 2026 - 03:41 PM (IST)

नारी डेस्क:  कहते हैं कि बड़े बदलाव हमेशा बड़ी लैब्स या करोड़ों रुपये की मशीनों से नहीं आते, कभी-कभी एक साधारण सोच भी दुनिया को नया रास्ता दिखा सकती है। नोएडा की दो जुड़वां बहनों ने इसी बात को सच साबित कर दिखाया है। जहां लोग साफ पानी के लिए महंगे वॉटर प्यूरीफायर पर हजारों रुपये खर्च करते हैं, वहीं इन दोनों छात्राओं ने भिंडी, मेथी और चावल जैसी आम चीजों की मदद से ऐसा वॉटर फिल्टर तैयार कर दिया, जिसकी कीमत महज 100 रुपये है। उनकी यह अनोखी खोज न सिर्फ विज्ञान और नवाचार का शानदार उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि अगर इरादे मजबूत हों तो कम उम्र में भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। आज उनकी सफलता लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

पानी की समस्या ने दिया अनोखा आइडिया

इस इनोवेशन की शुरुआत तब हुई जब दोनों बहनों ने एक रिपोर्ट पढ़ी, जिसमें दिल्ली और आसपास के इलाकों में भूजल प्रदूषण और जल स्तर में गिरावट की गंभीर स्थिति का जिक्र किया गया था। इस समस्या ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया कि आखिर आम लोगों को सस्ते और प्रभावी तरीके से साफ पानी कैसे उपलब्ध कराया जा सकता है। इसी सवाल का जवाब खोजते-खोजते उन्होंने कक्षा 11वीं से रिसर्च शुरू की और लगभग एक साल की मेहनत के बाद एक अनोखा वॉटर फिल्टरेशन सिस्टम तैयार कर लिया।

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Aqua Sattva नाम दिया अपने प्रोजेक्ट को

दोनों बहनों ने अपने स्टूडेंट स्टार्टअप "Hydra Nova" के तहत इस तकनीक को विकसित किया है, जिसे उन्होंने "Aqua Sattva" नाम दिया है। यह फिल्टर छोटे-छोटे पाउच के रूप में तैयार किया गया है, जो दिखने में टी-बैग जैसा नजर आता है। इसे पानी में इस्तेमाल करने के बाद उसमें मौजूद कई हानिकारक तत्वों को कम करने में मदद मिलती है।

कैसे काम करता है यह देसी फिल्टर

इस फिल्टर की सबसे बड़ी खासियत इसके प्राकृतिक तत्व हैं। भिंडी और मेथी में मौजूद प्राकृतिक पॉलीसेकेराइड्स पानी में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक कणों को अपनी ओर आकर्षित करके उन्हें फंसा लेते हैं। वहीं चावल के छिलकों से तैयार की गई बायोचार पानी में मौजूद खतरनाक PFAS रसायनों को सोखने का काम करती है। PFAS ऐसे रसायन हैं जिन्हें "फॉरएवर केमिकल्स" कहा जाता है, क्योंकि ये लंबे समय तक पर्यावरण और मानव शरीर में बने रह सकते हैं।

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लैब टेस्ट में मिले शानदार नतीजे

इस तकनीक का परीक्षण IIT दिल्ली की बायोमास लैब में विशेषज्ञों की निगरानी में किया गया। टेस्टिंग के दौरान Aqua Sattva ने पानी में मौजूद 20 प्रकार के PFAS कंपाउंड्स को लगभग 93 प्रतिशत तक कम करने में सफलता हासिल की। साथ ही माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा में भी उल्लेखनीय कमी देखी गई, जो आज के समय में एक बड़ी पर्यावरणीय चुनौती बन चुके हैं।

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महंगे RO सिस्टम को दे सकता है चुनौती

बाजार में उपलब्ध अधिकांश RO सिस्टम की कीमत 10,000 से 30,000 रुपये तक होती है। इसके अलावा उन्हें बिजली, मेंटेनेंस और नियमित सर्विसिंग की भी जरूरत पड़ती है। इसके विपरीत Aqua Sattva पूरी तरह कम लागत वाला समाधान है। 10 फिल्टर पाउच का एक पैकेट केवल 100 रुपये में उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई है। यही वजह है कि इस इनोवेशन को वॉटर प्यूरीफायर इंडस्ट्री के लिए एक संभावित चुनौती माना जा रहा है।

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पर्यावरण के लिए भी है फायदेमंद

आज जब प्लास्टिक और इलेक्ट्रॉनिक कचरा बड़ी समस्या बन चुके हैं, तब यह फिल्टर पर्यावरण के अनुकूल विकल्प के रूप में सामने आया है। भिंडी, मेथी और कृषि अवशेषों से तैयार होने के कारण यह पूरी तरह बायोडिग्रेडेबल है। इसके इस्तेमाल के बाद पर्यावरण पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता, जो इसे और भी खास बनाता है।

राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल चुकी है पहचान

नैना और नयनतारा के इस अनोखे प्रोजेक्ट को देश और विदेश में कई मंचों पर सराहना मिल चुकी है। अपनी कम उम्र में उन्होंने यह साबित कर दिया है कि सही सोच और मेहनत से बड़ी समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है। दोनों बहनों ने अपनी तकनीक के पेटेंट के लिए भी आवेदन कर दिया है और भविष्य में इसे बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचाने की तैयारी कर रही हैं। नैना और नयनतारा की कहानी सिर्फ एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह इस बात का उदाहरण भी है कि अगर युवा किसी समस्या को गंभीरता से समझें और उसके समाधान के लिए काम करें, तो वे समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

महज 100 रुपये में तैयार यह देसी वॉटर फिल्टर आज लाखों लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आया है।

 


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Content Editor

Priya Yadav

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