एक्ट्रेस Dia Mirza ने PM मोदी से पूछे तीखे सवाल, 47 दिन की चुप्पी पर कह डाली ये बड़ी बात!
punjabkesari.in Saturday, Jul 25, 2026 - 01:01 PM (IST)
नारी डेस्क: छात्रों के विरोध प्रदर्शन और पेपर लीक विवाद को लेकर देशभर में बहस जारी है। इस बीच बॉलीवुड अभिनेत्री दीया मिर्जा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कई सवाल उठाए हैं। जहां कई सेलिब्रिटीज ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी, वहीं दीया ने सीधे तौर पर सरकार की प्रतिक्रिया में हुई देरी और छात्रों की परेशानियों को लेकर अपनी चिंता जाहिर की।
पीएम मोदी के बयान पर दीया मिर्जा ने जताई निराशा
दीया मिर्जा ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके बयान में प्रभावित छात्रों और परिवारों के प्रति संवेदनशीलता की कमी नजर आई। अभिनेत्री ने सवाल उठाया कि उन परिवारों के लिए कुछ क्यों नहीं कहा गया, जिन्होंने इस पूरे विवाद के कारण अपने बच्चों को खोया है। उन्होंने यह भी पूछा कि उन छात्रों के संघर्ष का जिक्र क्यों नहीं किया गया, जो अपने अधिकारों के लिए हफ्तों तक प्रदर्शन करते रहे और भूख हड़ताल पर बैठे।
BREAKING
— Amar Singh Chouhan (@amar_4inc) July 24, 2026
Dia Mirza just clapped back at Modi’s 47-day late video on the paper leak protests:
“You spoke after 47 days… not one word of empathy for the parents who lost their kids. You have said nothing.”
This is what actual spine looks like 🔥 pic.twitter.com/oKofYBJSDX
"आपको कुछ कहने में 47 दिन लग गए"
दीया मिर्जा ने प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया में हुई देरी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर बोलने में 47 दिन लग गए और जब बयान आया, तो उसमें ऐसी कोई बात नहीं थी जो परेशान छात्रों और उनके परिवारों को राहत दे सके। अभिनेत्री ने अपनी पोस्ट में लिखा कि लाखों छात्रों और अभिभावकों के दर्द को समझना जरूरी है और केवल बयान देना ही काफी नहीं है, बल्कि उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
छात्रों और अभिभावकों के दर्द का किया जिक्र
दीया ने अपनी प्रतिक्रिया में उन माता-पिता का भी जिक्र किया, जिन्होंने अपने बच्चों को खोया। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे परिवारों के दर्द और संघर्ष के प्रति सहानुभूति क्यों नहीं दिखाई गई। इसके अलावा उन्होंने उन छात्रों की हिम्मत की भी सराहना की, जो अपनी मांगों को लेकर लंबे समय तक आंदोलन करते रहे। दीया का कहना था कि युवाओं की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।
ये भी पढ़ें: 'इंडियाज गॉट लेटेंट' विवाद के बाद बुरी तरह टूट गई थीं अपूर्वा , सूफी ने बचाई थी जान
सोशल मीडिया पर दीया की हुई तारीफ
दीया मिर्जा के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उनकी खुलकर तारीफ की। कुछ यूजर्स ने कहा कि जहां कई लोग सिर्फ औपचारिक बयान दे रहे हैं, वहीं दीया ने सीधे सवाल उठाने की हिम्मत दिखाई। कई लोगों ने उनकी बात को छात्रों और अभिभावकों की भावनाओं से जुड़ा हुआ बताया और कहा कि ऐसे मुद्दों पर खुलकर चर्चा होना जरूरी है।
पीएम मोदी ने वीडियो संदेश जारी कर कही थी ये बात
गौरतलब है कि पेपर लीक विवाद और छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश जारी किया था। उन्होंने कहा था कि पेपर लीक जैसी घटनाएं गंभीर हैं और इससे लाखों छात्रों और उनके परिवारों को नुकसान पहुंचता है। प्रधानमंत्री ने भरोसा दिलाया था कि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार की प्राथमिकता छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखना है, ताकि उनका शैक्षणिक वर्ष प्रभावित न हो।
सरकार ने सख्त कार्रवाई का दिया आश्वासन
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में बताया था कि पेपर लीक मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए काम कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने छात्रों से धैर्य बनाए रखने की अपील की और कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
सोनम वांगचुक ने खत्म की भूख हड़ताल
इस बीच क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने भी छात्रों की मांगों को लेकर जारी अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी। उन्होंने केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात के बाद यह फैसला लिया। वांगचुक ने परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर जवाबदेही तय करने और छात्रों के हितों की रक्षा की मांग को लेकर आंदोलन में हिस्सा लिया था। प्रधानमंत्री के आश्वासन के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया।
छात्रों की मांगों को लेकर जारी है बहस
पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों की चिंताएं लगातार चर्चा का विषय बनी हुई हैं। जहां सरकार ने सुधार और सख्त कदम उठाने का भरोसा दिया है, वहीं कई लोग अब भी पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। इसी मुद्दे पर दीया मिर्जा की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर छात्रों के अधिकारों और परीक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है।

