भाई- बहन के साथ वापस लौट रहे हैं भगवान जगन्नाथ, वापसी यात्रा देखने लाखों भक्त पहुंचे पुरी
punjabkesari.in Friday, Jul 24, 2026 - 04:28 PM (IST)
नारी डेस्क: ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की वापसी की रथयात्रा 'बहुड़ा यात्रा' शुक्रवार को भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हो गई और इस यात्रा में शामिल होने के लिए लाखों श्रद्धालु पुरी में उमड़ पड़े। 'बहुड़ा यात्रा' इस वार्षिक रथयात्रा का दूसरा चरण है जिसमें भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा गुंडिचा मंदिर से 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर लौटते हैं। गुंडिचा मंदिर यहां से लगभग 2.6 किलोमीटर दूर है। अनुष्ठानों की शुरुआत सेवादारों द्वारा पारंपरिक 'गोटी पहंडी' (एक कतार में शोभायात्रा) के जरिए भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को मंदिर के बाहर खड़े रथों तक ले जाने के साथ हुई।

शास्त्रों में बहुड़ा यात्रा के दर्शन को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि इस दौरान भगवान के रथ के दर्शन करने और श्रद्धापूर्वक रथ खींचने वाले भक्त को सौ यज्ञों के समान पुण्य प्राप्त होता है तथा मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। बहुड़ा यात्रा के बाद भगवान की प्रतिमाएं तुरंत गर्भगृह में स्थापित नहीं की जातीं। पहले रथों पर उनका प्रसिद्ध ‘सुना बेष’ (स्वर्ण श्रृंगार) किया जाता है। इसके बाद ‘अधर पाना’ और अंत में ‘नीलाद्री बीजे’ की परंपरा संपन्न होती है, जिसके साथ भगवान पुनः श्रीमंदिर के रत्न सिंहासन पर विराजमान होते हैं। इसी धार्मिक प्रक्रिया के साथ नौ दिवसीय जगन्नाथ रथ यात्रा महोत्सव का विधिवत समापन माना जाता है।
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''जय जगन्नाथ'' और ''हरिबोल'' के जयघोष के बीच भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को एक-एक करके उनके संबंधित रथों में विराजमान कराया गया। तीनों रथ - भगवान बलभद्र का 'तालध्वज', देवी सुभद्रा का 'दर्पदलन' और भगवान जगन्नाथ के 'नंदीघोष' को बाद में श्रद्धालु जगन्नाथ मंदिर तक खींचकर ले जाएंगे। भगवान जगन्नाथ के दिव्य चक्र 'चक्रराज सुदर्शन' को सबसे पहले श्री गुंडिचा मंदिर से बाहर लाया गया और देवी सुभद्रा के 'दर्पदलन' रथ पर रखा गया। इसके बाद भगवान बलभद्र को लाया गया, जबकि देवी सुभद्रा को विशेष 'शून्य पहंडी' शोभायात्रा में उनके रथ तक ले जाया गया। इस शोभायात्रा में सेवादारों द्वारा ले जाते समय देवी का मुख आकाश की ओर होता है। शोभायात्रा के अंत में भगवान जगन्नाथ को उनके 'नंदीघोष' रथ तक ले जाया जाता है।

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के कार्यक्रम के अनुसार, पुरी के गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब अपराह्न ढाई बजे से अपराह्न साढ़े तीन बजे के बीच 'छेरा पहनरा' (रथों की सफाई) की विधि करेंगे जिसके बाद श्रद्धालु शाम चार बजे रथ खींचना शुरू करेंगे। उत्सव का आयोजन कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच किया जा रहा है क्योंकि पिछली रथ यात्रा के दौरान भीड़ बढ़ने से दो लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे।

