पढ़ी-लिखी महिलाएं भी पति की मार क्यों सहती हैं? जानें घरेलू हिंसा से बचने के उपाय

punjabkesari.in Friday, Nov 28, 2025 - 04:37 PM (IST)

नारी डेस्क : भारत ही नहीं, दुनिया के कई विकसित देशों में भी एक सच आज भी कड़वा है पति द्वारा पत्नी पर हाथ उठाना। दुख की बात यह है कि यह हिंसा सिर्फ कम पढ़ी-लिखी महिलाओं तक सीमित नहीं है; शहरों में रहने वाली पढ़ी-लिखी, आत्मनिर्भर और नौकरी करने वाली महिलाएं भी चुपचाप यह अत्याचार सहती रहती हैं। परिवार की इज्जत, समाज का डर और बच्चों की जिम्मेदारी ये तीन वजहें अक्सर महिलाओं को खामोश रहने पर मजबूर कर देती हैं।

पति पत्नी पर हाथ क्यों उठाते हैं?

घर के माहौल में पैदा होने वाली सोच का इसमें सबसे बड़ा योगदान है। जब बच्चे अपनी मां को पिता के हाथों पीटते देखते हैं, तो उनके दिमाग में यह धारणा बस जाती है कि शादी के बाद पत्नी पर हाथ उठाना "सामान्य" है। यही वजह है कि पढ़ी-लिखे परिवारों में भी घरेलू हिंसा कम नहीं होती।

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आर्थिक निर्भरता

जो महिलाएं आर्थिक रूप से पति पर निर्भर होती हैं, वे अक्सर यह सोचकर हिंसा सहती रहती हैं कि अगर पति ने छोड़ दिया, तो वे आगे कैसे जियेंगी? कई बार मायके में भी उन्हें सहारा नहीं मिलता। बेटी को “ससुराल में ही रहो” कहकर मजबूर कर दिया जाता है। ऐसे में महिलाएं हर ज्यादती सहने लगती हैं।

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बच्चों के भविष्य की चिंता

बहुत सी कामकाजी महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं, फिर भी वे बच्चों के भविष्य और मानसिक स्थिरता के डर से पति से अलग होने का निर्णय नहीं ले पातीं। वे मार खाकर भी सिर्फ बच्चों के लिए रिश्ता निभाती रहती हैं।

समाज और बदनामी का डर

गांव और छोटे शहरों में तलाक को आज भी कलंक माना जाता है। “लोग क्या कहेंगे?” यह एक वाक्य महिलाओं की जिंदगी बर्बाद कर देता है। पढ़ी-लिखी और आत्मनिर्भर महिलाएं भी अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा खोने के डर से चुपचाप हिंसा सहती रहती हैं।

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घरेलू हिंसा से कैसे बचें?

महिलाओं को समझना होगा कि मारपीट वाला घर बच्चों के भविष्य को संवारता नहीं, बल्कि उसे बर्बाद करता है। ऐसे माहौल में पलने वाले बच्चे भावनात्मक रूप से कमजोर और डरपोक हो जाते हैं।

चुप न रहें आवाज उठाएं

पति के हिंसक व्यवहार को “समस्या छोटी है” कहकर अनदेखा न करें।
जरूरत पड़ने पर किसी भरोसेमंद परिजन या दोस्त को बताएं।

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कानूनी मदद लें

भारत में घरेलू हिंसा से बचाने के लिए कई कानून मौजूद हैं।
महिलाएं पुलिस, महिला हेल्पलाइन या महिला कल्याण केंद्र से संपर्क कर सकती हैं। (1091 महिला हेल्पलाइन)

आर्थिक रूप से खुद को मजबूत बनाएं

जितनी अधिक आर्थिक स्वतंत्रता होंगी, उतनी ही आसानी से महिलाएं अत्याचार के खिलाफ खड़ी हो पाएंगी।

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माता-पिता अपनी बेटी को अकेला न छोड़ें

अगर बेटी ससुराल में हिंसा झेल रही है, तो उसे “सहन करो” न कहें।
उसकी सुरक्षा को प्राथमिकता दें, और उसे सहारा दें।
 


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Content Editor

Monika

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