मुन्ना भाई MBBS का सबसे इमोश्नल सीन....एक दूसरे को गले लगाकर सच में रोए थे संजय दत्त और सुनील दत्त

punjabkesari.in Monday, May 25, 2026 - 06:32 PM (IST)

नारी डेस्क: हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता सुनील दत्त की पुण्यतिथि पर आज पूरा देश उन्हें याद कर रहा है। उन्होंने अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के बीच खास पहचान बनाई। साल 2003 पूरे दत्त परिवार के दिलों में एक खास जगह रखता है, क्योंकि इसी साल फ़िल्म 'मुन्ना भाई M.B.B.S.' के ज़रिए बड़े पर्दे पर पिता-बेटे की जोड़ी का सबसे यादगार परफ़ॉर्मेंस देखने को मिला था। राजू हिरानी के निर्देशन में बनी इस फल्म में, दिवंगत दिग्गज अभिनेता सुनील दत्त और उनके बेटे संजय दत्त ने पिता-बेटे की जोड़ी का किरदार निभाया था। 

PunjabKesari
 फ़िल्म का आखिरी सीन, जिसमें पिता-बेटे की जोड़ी के बीच एक बेहद खूबसूरत पल दिखाया गया था, उसे आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे दिल को छू लेने वाले दृश्यों में से एक के तौर पर याद किया जाता है। एक इंटरव्यू में संजय दत्त ने उस सीन को याद करते हुए बताया था कि-  "वह बहुत ही इमोशनल पल था। जब इस सीन की शूटिंग हो रही थी, तो हम दोनों की आंखों में सचमुच आंसू थे। यह बहुत ही कमाल का था। यह बहुत ही सच्चा था यह एक्टिंग नहीं थी। यह पापा थे जो मुझे गले लगा रहे थे और मैं खुद को रोक नहीं पाया और अगर आप फिल्म देखेंगे तो पाएंगे कि वे भी खुद को रोक नहीं पाए।"

PunjabKesari
संजय दत्त ने यह भी माना था कि  पहली बार अपने पिता के साथ एक्टिंग करते हुए वे बहुत ज़्यादा घबराए हुए थे। पर्दे पर पिता की डांट और फिर दोनों का आपस में सुलह कर लेना, उनकी निजी ज़िंदगी के संघर्षों और गहरे प्यार की ही एक झलक थी।सुनील दत्त का जन्म 06 जून 1929 को पंजाब के झेलम जिले के खुर्दी गांव में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। उनके पिता रघुनाथ दत्त दीवान बड़े जमींदार थे। जब सुनील दत्त मात्र पांच वर्ष के थे, तभी उनके पिता का निधन हो गया। वर्ष 1947 में देश विभाजन के दौरान हुए दंगों के बाद उनका परिवार पूर्वी पंजाब के यमुनानगर आ गया, जो अब हरियाणा में है। कुछ समय उन्होंने लखनऊ में भी बिताया और वहीं पढ़ाई की। बाद में उन्होंने मुंबई के जय हिंद कॉलेज में दाखिला लिया। । वर्ष 1955 से 1957 तक उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए काफी संघर्ष किया। इस दौरान उन्होंने कुंदन, राजधानी, किस्मत का खेल और पायल जैसी कई फिल्मों में काम किया, लेकिन उन्हें विशेष सफलता नहीं मिली।

PunjabKesari
वर्ष 1963 में प्रदर्शित फिल्म ये रास्ते हैं प्यार के से उन्होंने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा। वर्ष 1964 में प्रदर्शित यादें उनके निर्देशन में बनी पहली फिल्म थी। वर्ष 1967 उनके करियर का अहम साल साबित हुआ, जब मिलन, मेहरबान और हमराज़ जैसी सफल फिल्में प्रदर्शित हुईं। वर्ष 1972 में उन्होंने अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म रेशमा और शेरा का निर्माण और निर्देशन किया, लेकिन यह फिल्म टिकट खिड़की पर सफल नहीं हो सकी। वर्ष 2005 में उन्हें दादा साहब फाल्के रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लगभग 100 फिल्मों में अभिनय करने वाले सुनील दत्त ने 25 मई 2005 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

vasudha

Related News

static