रात में आता है ज्यादा पसीना, सेक्स की नहीं रहती इच्छा ? तो ये है वक्त से पहले Periods बंद होने की चेतावनी
punjabkesari.in Wednesday, Jul 01, 2026 - 06:43 PM (IST)
नारी डेस्क: पहले कुछ बीमारियाें की उम्र तय होती थी, जैसे माना जाता था हार्ट अटैक या घुटनो की बीमारी 50 के बाद ही होती थी लेकिन अब यह बुजुर्गों से ज्यादा युवाओं के लिए खतरा बनती जा रही है। मेनोपॉज को लेकर भी कुछ ऐसा ही हो गया है। इसे अक्सर एक स्वाभाविक पड़ाव माना जाता है जो महिलाओं में 40 के दशक के आखिर या 50 के दशक की शुरुआत में होता है। अब कुछ महिलाएं उम्मीद से कहीं पहले मेनोपॉज़ का अनुभव कर रही हैं जो की चिंता का विषय है। डॉक्टरों ने समय से पहले मेनोपॉज होने के कारणों के बारे में बताया है।
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क्या है प्रीमैच्योर मेनोपॉज
डॉक्टर बताते हैं- "प्रीमैच्योर मेनोपॉज का मतलब है 40-45 साल की उम्र से पहले मेनोपॉज़ का होना। कभी-कभी ऐसी स्थिति 'प्रीमैच्योर ओवेरियन इनसफिशिएंसी' (समय से पहले अंडाशय का काम करना बंद कर देना) से जुड़ी हो सकती है। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें अंडाशय (ओवरी) उम्मीद से पहले ही अपना सामान्य काम करना बंद कर देते हैं। चूंकि मेनोपॉज़ को आमतौर पर उम्र के बाद के पड़ाव में होने वाला बदलाव माना जाता है, इसलिए कई महिलाओं को हैरानी होती है कि अंडाशय में ऐसे बदलाव 30 की उम्र में भी हो सकते हैं, जब मेनोपॉज़ से जुड़े लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
ये है प्रीमैच्योर मेनोपॉज के लक्षण
डॉक्टर के अनुसार समय से पहले मेनोपॉज (पीरियड्स का समय से पहले बंद होना) की एक चुनौती यह है कि इसके लक्षणों को आसानी से पहचाना नहीं जा पाता। मासिक धर्म चक्र में बदलाव अक्सर इसके शुरुआती लक्षणों में से एक होते हैं। पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं, कम बार आ सकते हैं या पूरी तरह बंद हो सकते हैं। महिलाओं को हॉट फ्लैशेस (अचानक गर्मी महसूस होना), रात में पसीना आना, नींद न आना, वजाइना में सूखापन, सेक्स की इच्छा में कमी, मूड में उतार-चढ़ाव और ध्यान लगाने में परेशानी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। चूंकि ये लक्षण तनाव, एंग्जायटी और रोज़मर्रा की ज़िंदगी के दबावों से जुड़े लक्षणों से मिलते-जुलते होते हैं, इसलिए इनसे तुरंत मेनोपॉज की चिंता नहीं होती, जिससे कभी-कभी बीमारी का पता चलने में देरी हो सकती है।
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समय से पहले मेनोपॉज़ के कारण
समय से पहले मेनोपॉज़ का सटीक कारण हमेशा पता नहीं चल पाता; इसके होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कभी-कभी जेनेटिक्स (आनुवंशिकी) अहम भूमिका निभाते हैं, खासकर उन महिलाओं के मामले में जिनके परिवार में समय से पहले मेनोपॉज़ का इतिहास रहा हो। कभी-कभी ऑटोइम्यून स्थितियां ओवरी के काम करने की क्षमता को प्रभावित कर सकती हैं, जबकि कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी जैसे मेडिकल इलाज ओवरी को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जिससे समय से पहले मेनोपॉज़ हो सकता है। फर्टिलिटी के अलावा, समय से पहले मेनोपॉज का असर लंबे समय की सेहत पर भी पड़ सकता है। हड्डियों की मजबूती बनाए रखने और दिल की सेहत को ठीक रखने में एस्ट्रोजन अहम भूमिका निभाता है। जब कम उम्र में एस्ट्रोजन का लेवल कम हो जाता है, तो महिलाओं को समय के साथ ऑस्टियोपोरोसिस और दिल की बीमारी जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए, सही समय पर बीमारी का पता लगाना और सही मेडिकल इलाज न सिर्फ़ रिप्रोडक्टिव हेल्थ के लिए, बल्कि पूरी सेहत के लिए भी जरूरी है।

