रात भर सोने के बाद भी सुबह उठकर थकान! ये आदत हो सकती है वजह

punjabkesari.in Saturday, Apr 18, 2026 - 12:52 PM (IST)

नारी डेस्क: हमारी नींद पूरी होना बेहद ही जरुरी हैं शरीर के लिए अगर रात में नींद न पूरी हो तो हम दिन भर थके थके से रहते हैं। अगर हम रात में पूरी नींद ले रहे हैं और फिर भी सुबह उठने के बाद थकान महसूस हो तो इसका क्या कारण हो सकता हैं । अगर आप भी रात भर अच्छी नींद लेने के बाद सुबह उठते ही थकान और सुस्ती महसूस करते हैं तो यह सिर्फ नींद की कमी नहीं, बल्कि आपकी रोज़मर्रा की कुछ गलत आदतों का असर हो सकता है। चालिए आपको बताते हैं इसके पीछे की असली वजह आखिर क्या हैं। 

मुंह से सांस लेना हैं सबसे बड़ा कारण 

सांस लेना एक सामान्य प्रक्रिया है, जिस पर हम ज्यादा ध्यान नहीं देते। लेकिन कई बार नाक बंद होने, एलर्जी या साइनस की समस्या के कारण लोग मुंह से सांस लेने लगते हैं। धीरे-धीरे यह आदत बन जाती है, खासकर सोते समय। कई लोगों को इसका पता भी नहीं चलता, लेकिन सुबह उठते समय सूखे होंठ, गला सूखना या बार-बार प्यास लगना इसके संकेत हो सकते हैं।

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एक्सपर्ट क्या कहते हैं

विशेषज्ञों के अनुसार, मुंह से सांस लेना एक सामान्य स्थिति नहीं मानी जाती, खासकर जब यह नींद के दौरान लगातार हो। हमारा शरीर प्राकृतिक रूप से नाक से सांस लेने के लिए बना है। नाक हवा को फिल्टर करती है, उसमें नमी बनाए रखती है और धूल व बैक्टीरिया को शरीर में जाने से रोकती है। जब हम मुंह से सांस लेते हैं, तो यह पूरी प्रक्रिया बाधित हो जाती है।

शरीर पर इसका क्या असर पड़ता है

नाक से सांस लेने पर हवा साफ और संतुलित होकर फेफड़ों तक पहुंचती है, लेकिन मुंह से सांस लेने पर ठंडी, सूखी और बिना फिल्टर की हवा सीधे अंदर चली जाती है। इससे धीरे-धीरे सांस लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसका असर सिर्फ फेफड़ों पर ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर की ऊर्जा पर पड़ता है।

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क्यों महसूस होती है सुबह थकान

कई बार लोग पूरी नींद लेने के बाद भी खुद को थका हुआ महसूस करते हैं। इसकी एक वजह यह हो सकती है कि शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही। मुंह से सांस लेने पर ऑक्सीजन की सप्लाई सही तरीके से नहीं हो पाती, जिससे शरीर में ऊर्जा बनने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। नतीजा सुबह उठते ही थकान, ध्यान में कमी और दिनभर सुस्ती।

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नींद की क्वालिटी पर असर

मुंह से सांस लेने की वजह से नींद की गुणवत्ता भी खराब हो सकती है। कई बार नींद बार-बार टूटती है, भले ही हमें इसका एहसास न हो। यह स्थिति लंबे समय में स्लीप एपनिया जैसी समस्या को बढ़ा सकती है, जिसमें सांस लेने में रुकावट आती है और नींद पूरी नहीं हो पाती।बच्चों में यह आदत और भी ज्यादा असर डाल सकती है। लंबे समय तक मुंह से सांस लेने से उनके चेहरे की बनावट, दांतों की स्थिति और शरीर के पोस्चर पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए समय रहते इस आदत को पहचानना और सुधारना बेहद जरूरी है।

कैसे सुधारें यह आदत

इस समस्या से राहत पाने के लिए सबसे पहले इसकी वजह जानना जरूरी है। अगर नाक हमेशा बंद रहती है, एलर्जी या साइनस की दिक्कत है, तो उसका इलाज कराना चाहिए। इसके अलावा, प्राणायाम और ब्रीदिंग एक्सरसाइज काफी मददगार हो सकती हैं। नियमित व्यायाम और सही लाइफस्टाइल अपनाने से भी फर्क पड़ता है। जरूरत महसूस हो तो डॉक्टर से सलाह लेना सबसे बेहतर कदम होता है।
 


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Content Editor

Priya Yadav

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