100 साल पुरानी मिल से ‘द कंप्लीट मैन’ तक, विजयपत सिंघानिया ने ऐसे बनाया Raymond को ग्लोबल ब्रांड
punjabkesari.in Sunday, Mar 29, 2026 - 04:37 PM (IST)
नारी डेस्क : रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन और भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री के दिग्गज विजयपत सिंघानिया का 87 वर्ष की उम्र में मुंबई में निधन हो गया। उनका जाना सिर्फ एक उद्योगपति का जाना नहीं, बल्कि उस दूरदर्शी सोच का अंत है जिसने भारतीय पुरुषों की पहचान और आत्मविश्वास को एक नया रूप दिया।
छोटी मिल से शुरू हुआ बड़ा सफर
आज जिस Raymond Group को हम एक प्रीमियम ब्रांड के रूप में जानते हैं, उसकी शुरुआत 1925 में ठाणे की एक छोटी वूलन मिल से हुई थी। बाद में 1944 में सिंघानिया परिवार ने इसे अपने हाथ में लिया और इसे नई दिशा दी। कैलाशपत सिंघानिया के नेतृत्व में कंपनी आगे बढ़ी और 1958 में उनके बेटे विजयपत भी महज 20 साल की उम्र में बिजनेस से जुड़ गए।
जब संभाली कमान, बदल दी कंपनी की तस्वीर
1980 में पूरी जिम्मेदारी मिलने के बाद विजयपत सिंघानिया ने कंपनी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। उन्होंने न सिर्फ बड़े शहरों में बल्कि छोटे शहरों में भी शोरूम खोलकर ब्रांड की पहुंच बढ़ाई। तकनीक और आधुनिकता को अपनाकर उन्होंने Raymond Group को प्रीमियम क्वालिटी का पर्याय बना दिया।
‘द कंप्लीट मैन’: एक ब्रांड नहीं, एक एहसास
विजयपत सिंघानिया की सबसे बड़ी ताकत उनकी मार्केटिंग रणनीति थी। उन्होंने समझा कि भारतीय ग्राहक सिर्फ कपड़े नहीं, बल्कि भावनाएं खरीदता है। ‘The Complete Man’ कैंपेन के जरिए उन्होंने एक ऐसे पुरुष की छवि पेश की जो सिर्फ मजबूत ही नहीं, बल्कि संवेदनशील, जिम्मेदार और पारिवारिक मूल्यों को समझने वाला है। इस सोच ने Raymond Group को हर खास मौके, खासकर शादियों की पहली पसंद बना दिया।
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नए-नए सेक्टर्स में बढ़ाया कारोबार
1980 से 2000 के बीच विजयपत सिंघानिया ने कंपनी को सिर्फ कपड़ों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे कई नए सेक्टर्स में विस्तार दिया। उनके नेतृत्व में Raymond Group ने सिंथेटिक फैब्रिक, डेनिम, स्टील, सीमेंट और इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स जैसे क्षेत्रों में कदम रखा। इस दूरदर्शी सोच और जोखिम लेने की क्षमता ने कंपनी को एक मल्टी-डायमेंशनल बिजनेस में बदल दिया, जो सिर्फ टेक्सटाइल ही नहीं बल्कि कई इंडस्ट्रीज में अपनी मजबूत पहचान बनाने में सफल रहा।
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निजी जीवन और विवाद
विजयपत सिंघानिया अपने एडवेंचर के शौक के लिए भी जाने जाते थे। हालांकि, अपने बेटे गौतम सिंघानिया के साथ उनका पारिवारिक विवाद भी काफी सुर्खियों में रहा। विजयपत सिंघानिया ने सिर्फ एक कंपनी नहीं बनाई, बल्कि एक ऐसी पहचान दी जिसने भारतीय पुरुषों के पहनावे और सोच दोनों को बदल दिया। उनका विजन, उनकी सोच और उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।

